: मां सरयू को समर्पित हुई चुनरी, वैदिक रीति रिवाज से हुआ पूजन
Tue, Dec 20, 2022
हाथी घोड़े बैड़ बाजे के साथ नाचते गाते हनुमान बाग से निकली शोभायात्रा, सरयू जी का हुआ अभिषेक, पूजन
राधे राधे महिला मंडल समिति जयपुर के तत्वावधान में चुनरी महोत्सव का हुआ भव्य आयोजन
अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठों में शुमार हनुमान बाग मंदिर में भव्य चुनरी महोत्सव मनाया गया।जिसमें मां सरयू को 108 चुनरी समर्पित किया गया। मां सरयू को एक छोर से दूसरे छोर तक बकायदा नावों पर सवार होकर चुनरी समर्पित किया गया। चुनरी महोत्सव का आयोजन राधे राधे महिला मंडल समिति जयपुर के तत्वावधान में समिति की संरक्षक कुसुम झलानी के संयोजन में हुआ। महोत्सव का शुभारंभ रविवार को नवाह पारायण पाठ से हो गया था। जिसमें 51 वैदिक आचार्य पारायण पाठ करें जिसका समापन आज सोमवार को हुआ इसके बाद मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकली। हाथी घोड़े बैड़ बाजे के साथ नाचते गाते शोभायात्रा हनुमान बाग से निकली, जो नगर भ्रमण करते हुए मां सरयू के पावन तट गई जहां पर वैदिक आचार्यों द्धारा विधिवत पूजन अर्चन किया गया। इसके बाद सरयू जी का दुग्धाभिषेक हुआ फिर एक छोर से दूसरे छोर तक चुनरी चढ़ाई गई। पूजन के लिए अयोध्या, काशी, नैमिषारण्य आदि जगहों से विशेष आचार्य बुलायें गये थे।कार्यक्रम का समापन वृहद भंडारे के साथ हुआ जिसमें रामनगरी के विशिष्ट संतों का अभिनन्दन भी किया गया। यह सारा महोत्सव हनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज के पावन सानिध्य में हुआ। हनुमान बाग सेवा संस्थान द्धारा पूरा महोत्सव को भव्यता के साथ सम्पादित कराया गया। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हनुमान बाग के ट्रस्टी नवल किशोर झलानी, जितेंद्र कुमार झलानी सहित जयपुर राजस्थान के सौकड़ों भक्त आये थे। कार्यक्रम की देखरेख सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री, गोलू शास्त्री सहित हनुमान बाग से जुड़े संत साधक शिष्य परिकर कर रहें थे।
: आनेस्टी इज़ दि बेस्ट पालिसी, ईमानदारी श्रेष्ठतम नीति है: राधेश्याम शास्त्री
Tue, Dec 20, 2022
कहा, चरित्रहीन का विपुल शास्त्राध्ययन भी व्यर्थ ही है
मारवाड़ी भवन में भागवत कथा की बह रही रसधार
अयोध्या। धर्म नगरी के मारवाड़ी भवन में भागवत कथा की रसधार बह रही है। व्यासपीठ से कथा सूत्रात्मक व्याख्या कर रहें प्रख्यात कथावाचक आचार्य राधेश्याम शास्त्री जी महाराज।आज कथा के पांचवें दिवस कथा की व्याख्या करते हुए कहते है कि चित्र कनक घट जैसा हो किन्तु चरित्र विष जैसा हो तो समझो पूतना है। पूतना का चित्र अच्छा किन्तु चरित्र गन्दा था। शिव का चित्र भयंकर भी है चरित्र अभयंकर है। उन्होंने कहा कि श्री राम, कृष्ण का चित्र भी अच्छा और चरित्र भी अच्छा।चरित्रहीन का विपुल शास्त्राध्ययन भी व्यर्थ ही है, जैसे कि अंधे के आगे लाखों-करोड़ों दीपक जलाना। आचार्य शास्त्री जी ने कहा कि एक चरित्र वह है, जो ऊपर से आरोपित है। एक चरित्र वह है, जो भीतर से आविर्भूत हुआ है। एक चरित्र है, जिसका हम अभ्यास करते हैं। और एक चरित्र है, जो सहज खिला है। सहज खिलनेवाले को ही चरित्र कहा जाता है। जो आरोपित है, अभ्यासजन्य है, चेष्टा से बंधा है, वह चरित्र नैतिक है।अवास्तविक चरित्र को व्यवहार-चरित्र कहा है। एक तो चेहरा है जो मुखौटा है।दूसरों को दिखाने के लिए। और एक स्वयं का मौलिक चेहरा है। एक तो व्यवहार है। सच बोलते हो, ईमानदारी से जीते हो, लेकिन वह भी व्यवहार है। सारी दुनिया के दुकानदार कहते हैं, आनेस्टी इज़ दि बेस्ट पालिसी। ईमानदारी श्रेष्ठतम नीति है। लेकिन इस पालिसी में होशियारी है , नीति है, लेकिन धर्म नहीं। ईमानदार इसलिए होना उचित है कि ईमानदारी में लाभ है। ईमानदारी स्वयं मूल्यवान नहीं है, लाभ के कारण बहुमूल्य है। उन्होंने कहा कि शिव का सर्व समावेशी देवत्व ही उनका वैशिष्ट्य है । शिव समन्वय वादी हैं। व्यासपीठ का पूजन यजमान श्रीमती अंजुल गुप्ता व जयप्रकाश ने किया। आये हुए अतिथियों का स्वागत प्रकाश स्वीट्स ने किया।
: भागवत कथा में ज्ञान की सात भूमिकाओं की विस्तृत चर्चा
Mon, Dec 19, 2022
मारवाड़ी भवन में आचार्य राधेश्याम शास्त्री जी महाराज के श्रीमुख से भागवत कथा की हो रही अमृत वर्षा
अयोध्या। धर्म नगरी अयोध्या के मारवाड़ी भवन में इन दिनो भागवत कथा की अमृत वर्षा हो रही है। व्यासपीठ से प्रख्यात कथावाचक आचार्य राधेश्याम शास्त्री जी बताते हैं कि भागवत कथा में ज्ञान की सात भूमिकाओं की विस्तृत चर्चा करते हुए कहते है कि शुभेच्छा, सुविचारणा, तनुमानसा, सत्वापतत्ति, असंसक्ति:, पदार्थभाविनी:, तुर्यगा। उन्होंने कहा कि लोक कल्याण की भावना से कुछ भी करने की इच्छा को सुभेच्छा कहते हैं। भोगेच्छाओं, वासनाओं को मिटाने की, जन्म-मरण से छूटने की जो आकांक्षा है, वह ʹशुभेच्छाʹ है।
इस भूमिका वाला साधक अहंकार पोसने के लिए कर्म नहीं करता। वह व्यवहार में कुशल एवं मितभाषी होता है। प्रशंसा उसे आतिशबाजी के अनार जैसी लगती है। वह जगत में प्रसन्न रहता है भीतर से भीतर से उदासीन रहता है। उसे सब फीका फीका लगने लगता है। शास्त्री जी ने वामन अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि जब मानव दान में पूर्णता आ जाती है, तब भगवान स्वयं याचक बन कर आ जाते हैं और चरण कमल से कल्याण करते हैं। द्वारपाल बन कर उसकी रक्षा करते हैंं। कथा में भक्त पहले दिन से ही आनंद में डूबकर भजनो में झूमते एवं नाचते नजर आ रहे हैं।जैसे ही कथा के दौरान भगवान कृष्ण का जन्म हुआ पूरा मारवाड़ी भवन जयकारों से गूंज गया। आचार्य राधेश्याम शास्त्री जी ने कहा कि प्रभू के आते ही माया मोह के बन्धन टूट जाते हैं और संसार रूपी कारागार से मुक्त हो जाता है। भक्ती रूप जमना में आकंठ निमग्न हो जाता है। कथा के दौरान कृष्ण जन्म उत्सव और भजनों पर श्रद्धालु जमकर नाचे। भगवान को माखन मिश्री का भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया। एक दूसरे को कृष्ण जन्म की बधाईयां दीं।