: राम पथ चौड़ीकरण मुवावजे में लेखपाल पर लगा क्षतिपूर्ति हड़पने का आरोप
Sat, Dec 17, 2022
लेखपाल ने भू स्वामी से कहा 5 लाख में एक लाख मैं लूंगा तब दूंगा 2 लाख नकद
भू स्वामी ने एसडीएम से की लेखपाल की शिकायत लगाया न्याय की गुहार
अयोध्या। रामनगरी में राम पथ के चौड़ीकरण की जद में आने वाले दुकानों व मकानों के मालिकों के साथ राजस्व विभाग के लेखपाल और तहसीलदार उन्हें मिलने वाले मुआबजे में बड़ा खेल करने में जुटे है। जिसका खुलासा शुक्रवार को एक भूस्वामी द्वारा एसडीएम सदर को दी गयी शिकायत के बाद हुआ है। जिसमे शिकायत कर्ताओं ने संबंधित लेखपाल पर क्षतिपूर्ति का कागजात तो 17 लाख का बनाया गया लेकिन मुआबजा 2 लाख रुपए देने की बात की जा रही है। जिसको लेकर जमीन के मालिकों ने वरिष्ठ अधिकारियों का दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि लेखपाल सर्वा सिंह ने उनसे मात्र 5 लाख मुआवजा बनने की बात कहते हुए 1 लाख स्वयं लेने और 2 लाख मकान वालो को और 2 लाख भू स्वामी को नकद देने की बात कहते हुए हुए उनसे सरकारी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने का दबाब बनाया है। ऐसा न करने पर किसी और से हस्ताक्षर करवाने कर कागजी कोरम पूरा करने की भी धमकी दी है। जबकि भू स्वामी द्वारा पता करने पर जो जानकारी हुई वह काफी चौकने वाली है। जिसमे उस भूमि पर 17-17 लाख दो जगह मुआवजा तय किया गया है। शिकायत कर्ताओं का कहना है कि लेखपाल सर्वा सिंह मकान स्वामियों ताहिरा बेगम समरा बनो, मो0 इस्तियाक,मो0 मुस्ताक,रियाज अहमद,मो इरशाद, के साथ सांठगांठ करके उसके स्वामित्व वाली भूमि गाटा संख्या 111 मि0 क्षेत्रफल 1 बीघा 5 विस्वानसी में अधिग्रहित भूमि की क्षतिपूर्ति 35 लाख रुपये हड़प लेने के फिराक में है जोकि एक अपराध है। शिकायत कर्ता रामजी शुक्ला ने एसडीएम से उक्त प्रकरण में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करवाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है। जब इस बारे में आरोपी लेखपाल से बात करने के लिए उनके मोबाइल पर सम्पर्क किया गया तो वह एनेबल कांटेक्ट रहे।
: आरम्भ सकामता से , समापन निष्कामता से<br>यही ध्रुव चरित्र का वैशिष्ट्य: राधेश्याम
Sat, Dec 17, 2022
मारवाड़ी भवन में श्रीरामकथा की अमृत वर्षा, व्यासपीठ कथा कह रहे प्रख्यात कथावाचक आचार्य राधेश्याम शास्त्री
अयोध्या। भगवान कहते हैं ध्रुव पहले प्राप्त करो, फिर त्याग करो। भक्त्ति प्रतीक्षा है, प्रयास नहीं। भक्त्ति समर्पण है, संकल्प नहीं। भक्ति का मूल आधार ही, सांसारिक मन पर आत्मघात हो जाये। उक्त बातें प्रख्यात कथाव्यास आचार्य राधेश्याम शास्त्री जी ने कही। अयोध्या के मारवाड़ी भवन में चल रहें श्रीराम कथा के तृतीय दिवस व्यासपीठ से कथा समझाते हुए व्यासजी कहते है कि सांसारिक मन कहता है, करने से कुछ होगा। भक्ति कहती है, करने से कुछ कुछ तो होगा पर वो नही होगा जिसके लिए तुम आये हो। अहंकार नये-नये नाम रखता है। कभी कहता है, संकल्प की शक्ति कभी कहता है, हिम्मत, साहस, व्यक्तित्व, आत्मा हजार नाम रखता है, लेकिन सबके भीतर तुम अहंकार को छिपा हुआ पाओगे, सबके भीतर मैं'माजूद है, मैं की कम-ज्यादा मात्रा मौजूद है। और वही बाधा है। आचार्य जी ने कहा कि जगत कल्याण जगत का उद्धार और जगत में के ऊपर कृपा करने के लिए अयोध्या के इस पावन भूमि को और गौरव प्रदान करने के लिए साक्षात परमात्मा भगवान श्री राम के रूप में अवतरित हुए और सारा समाज परमात्मा के अवतरित होने से आनंदित उल्लासित अपने आप को सौभाग्यशाली मानने लगा। कथा से पूर्व मारवाड़ी भवन से विशाल शोभायात्रा निकली।कथा में व्यासपीठ का पूजन यजमान श्रीमती अंजुल गुप्ता व जयप्रकाश ने किया। आये हुए अतिथियों का स्वागत प्रकाश स्वीट्स ने किया।
: संत की कृपा से मिलती है भगवान की भक्ति: जगद्गुरू रामदिनेशाचार्य
Sat, Dec 17, 2022
श्रीराम कथा महोत्सव का हुआ समापन, आज होगा विशाल भंडारा, रामनगरी के संत धर्माचार्यो का होगा विशेष अभिनन्दन
अयोध्या। रामनगरी के श्रीराम जानकी मंदिर भरत तपोस्थली भरतकुंड में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव का समापन बड़े ही धूमधाम के साथ किया गया। समापन सत्र में जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कथा विश्राम करते हुये कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन चरित्र आज भी हम सब को मर्यादित रहने की प्रेरणा देता है। उनकी कथा भारतीय संस्कृति की मधुरता सामाजिक सौहार्दय परिवार की ज़िम्मेदारी तथा सबके प्रति सम्मान की आदर्श गाथा है। हमें उसी आदर्श को जीने का प्रयास करना चाहिए।जगद्गुरु जी ने भगवान के नाम की महिमा की मीमांसा करते हुए कहा कि भगवान के नाम जपने से मानसिक पूजा अर्चना हो जाती है। भगवान का नाम लेने वाले की आलोचना मत करो नहीं तो नाम अपराध लगेगा। नाम की महिमा गणेश जी ने जानी तो प्रथम पूज्य पद प्राप्त हुआ। नाम जपने से उम्र बढ़ती है कलियुग में कृतित्व का अहंकार देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मानव मात्र को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए क्योंकि यदि जल से भरे एक घड़े में हम एक-एक कर के पत्थर डालते जाते है तो धीरे-धीरे वह घड़ा कंकड़ से भर जाता है तथा जल से रिक्त हो जाता है। वैसे ही यदि हम अपने शरीर रूपी घड़े में अंधकार रूपी कंकड़ ज्यादा डालेंगे तो हमारा शरीर शीलगुण रूपी पानी से रिक्त हो जायेगा। रामानन्दाचार्य जी ने बताया कि भगवत कथा की अर्थात मन से की केवल एक चैपाई भी पूरी तरह से टूट चुके जीण-शीर्ण हो चुके मनुष्य को पुनः उसके वास्तविक स्वरूप जैसा पवित्र कर देती है। आज की कथा में समाजवादी पार्टी के लोकप्रिय नेता तेजनारायण पाण्डेय पवन ने व्यासपीठ का पूजन किया। महोत्सव की अध्यक्षता दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी ने किया। आये हुए संतो का विशेष अभिनन्दन बिंदुगाद्याचार्य के उत्ताराधिकारी महंत रामभूषण दास कृपालु जी ने किया। गौरव शास्त्री व शिवेंद्र शास्त्री सहित सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।