: राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर भाव-विभोर हुए भक्त
Fri, Dec 16, 2022
निष्काम भाव से भक्ति करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं: रामदिनेशाचार्य
बिंदुगाद्याचार्य के उत्ताराधिकारी महंत रामभूषण दास कृपालु जी के संयोजन में हो रही रामकथा
अयोध्या। श्रीराम जानकी मंदिर भरत तपोस्थली भरतकुंड में चल रही संगीतमय रामकथा में राम वनवास भरत मिलाप और राम-केवट संवाद की कथा का प्रसंग व्यासपीठ से जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने सुनाया। रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि भरत जैसा भाई इस युग में मिलना मुश्किल है। राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर भक्त भाव-विभोर हो गए। उन्होंने कहा कि भगवान राम मर्यादा स्थापित करने को मानव शरीर में अवतरित हुए। पिता की आज्ञा पर वह वन चले गए। भगवान राम वन जाने के लिए गंगा घाट पर खड़े होकर केवट से नाव लाने को कहते हैं लेकिन केवट मना कर देता है और पहले पैर पखारने की बात कहता है। केवट भगवान का पैर धुले बगैर नाव में बैठाने को तैयार नहीं होता है। राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर श्रोता आनंदित हो गए। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आदर्श समाज में आज भी कायम है। भगवान प्रेम भाव देने वाले का हमेशा कल्याण करते हैं। कहा कि भरत ने भगवान राम के वनवास जाने के बाद खड़ाऊं को सिर पर रखकर राजभोग की बजाय तपस्या की। कहा कि जीवन में भक्ति और उपासना का अलग महत्व है। निष्काम भाव से भक्ति करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा मनोरंजन का साधन नही हैं बल्कि मन के मैल को धोकर पवित्र करने व भगवत प्राप्ति की ओर अग्रसर होने का एकमात्र माध्यम है। स्वामीजी ने कहा कि भगवान का स्वभाव है कि वह पशु पक्षियों का भी सम्मान करते हैं। उनके उपकार को भी नहीं भूलते हैं। मौजूदा दौर में मनुष्य किसी भी उपकार को नहीं मानता है।कथा की अध्यक्षता दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज कर रहें है।आये हुए संतो का विशेष अभिनन्दन बिंदुगाद्याचार्य के उत्ताराधिकारी महंत रामभूषण दास कृपालु जी ने किया। गौरव शास्त्री व शिवेंद्र शास्त्री सहित सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।
: रामनारायण दास काे साैंपी गई रामजानकी मंदिर की महंती
Fri, Dec 16, 2022
अयोध्यानगरी के विशिष्ट संत-महंतों ने साधुशाही परंपरानुसार उन्हें कंठी, चादर, तिलक देकर महंती की मान्यता प्रदान दी
श्रीरामजानकी मंदिर सेवा संस्थान में भगवान की अष्टयाम सेवा सहित होगी साधु संतो की सेवा: महंत रामनारायण दास
अयाेध्या। रामनगरी के लवकुशनगर स्थित श्रीरामजानकी मंदिर सेवा संस्थान का नया महंत रामनारायण दास महाराज काे बनाया गया। गुरूवार को मंदिर प्रांगण में एक महंताई समाराेह का आयोजन किया गया। समाराेह में अयोध्यानगरी के विशिष्ट संत-महंतों ने साधुशाही परंपरानुसार उन्हें कंठी, चादर, तिलक देकर महंती की मान्यता प्रदान किया। मंदिर के महंत व अध्यक्ष रहे दयाराम दास महाराज ने कहा कि वृद्धावस्था व स्वास्थ्य गड़बड़ हाेने के कारण वह आश्रम के महंत का दायित्व सुचार रूप से निर्वहन नही कर पा रहे थे। इस कारण उन्होंने अपने गुरूभाई रामनारायण दास काे मंदिर का सर्वराहकार महंत नियुक्त किया है। संताें ने उनकी महंत पद पर ताजपाेशी की है। अब से रामनारायण दास ही श्रीरामजानकी मंदिर सेवा संस्थान का कार्यभार संभालेंगे और ठाकुर जी की सेवा करेंगे। नये महंत रामनारायण दास महाराज ने कहा कि आज उन्हें श्रीरामजानकी मंदिर सेवा संस्थान की बागडोर साैंपी गई है। रामनगरी के संत-महंतों ने उनकाे इस आश्रम महंत नियुक्त किया है। अब से वही अपने बड़े गुरूभाई के मार्गदर्शन में यहां का कुशल संचालन करेंगे। महंत पद की गरिमा हमेशा अक्षुण्ण बनाए रखेंगे। उनके द्वारा ऐसा काेई कार्य नही किया जायेगा, जिससे महंत पद की छवि धूमिल हाे। महंत पद की प्रतिष्ठा पर कभी आंच नही आने देंगे। सदैव पद की प्रतिष्ठा बनाकर चलेंगे। मंदिर का सर्वांगीण विकास करेंगे। आश्रम में गाै, संत, विद्यार्थी, अतिथि सेवा सुचार रूप से चलती रहेगी। नवनियुक्त महंत ने आए हुए संत-महंतों का स्वागत-सत्कार किया। महंताई समाराेह में मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, श्रीकरूणानिधान भवन महंत रामजी दास, श्रीरामवल्लभाकुंज अधिकारी राजकुमार दास, सरपंच रामकुमार दास, रामचरित मानस विद्यापीठ के महंत कमलादास रामायणी, लालसाहेब दरबार महंत रामनरेश शरण, महंत रामअवतार दास, कथावाचक भगवान शरण, पार्षद पुजारी रमेश दास, मिथिला बिहारी दास, दामाेदर दास, संतदास आदि संत-महंत उपस्थित रहे।
: तीनों तापों को हरने वाली है श्रीराम कथा: रामदिनेशाचार्य
Thu, Dec 15, 2022
रामानन्दाचार्य जी ने कहा, जिस पर प्रभु की कृपा होती है उन्हें ही यह कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है
अयोध्या। रामनगरी के श्रीराम जानकी मंदिर भरत तपोस्थली भरतकुंड में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव के छटवें दिन कथाव्यास जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने श्रीराम का राज्याभिषेक वनवास और राम केवट संवाद की कथा सुनाई। कहा कि श्रीराम कथा दैहिक दैविक और भौतिक तीनों तापों को हरने वाली है। जिस पर प्रभु की कृपा होती है उन्हें ही यह कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि श्रीराम विवाह के समय पूरी अयोध्या आनंद में डूबी हुई। कुछ दिनों बाद राजा दशरथ ने श्रीराम का राज्याभिषेक करने का निर्णय लिया। उधर देवता चितित है कि यदि श्रीराम राजा बन गए तो देवताओं की रक्षा कौन करेगा। राक्षसों का संहार कौन करेगा। देवता माता सरस्वती के पास जाते हैं। माता सरस्वती मंथरा की मति फेर देती हैं। मंथरा के बहकाने पर कैकेयी श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लेती हैं । श्री राम कथा की यही विशेषता है कि भरत राज्य पाकर भी उसे स्वीकार नहीं करते हैं। उन्होंने 14 वर्ष तक श्रीराम के खड़ाऊं सिंहासन पर रखकर राज्य चलाया। राम सीता और लक्ष्मण के वनगमन के समय गंगा पार जाने के लिए श्रीराम केवट को बुलाते हैं। केवट शर्त लगाता है कि जब तक आपके चरण नहीं धो लूंगा आपको पार नहीं उतारूंगा। भगवान भक्त केवट की बात मान लेते हैं। कथा के पंचम दिवस में व्यासपीठ से जगद्गुरू जी ने दिव्य व आनंदमयी श्री सीताराम विवाह की रसभरी कथा सुनाई जिसको सुनकर पूरा कथा मंडप भावविभोर हो गई। दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज के पावन अध्यक्षता में यह महोत्सव हो रहा है। कथा में रंग महल के श्रीमहंत रामशरण दास श्रीरामबल्भाकुंज के अधिकारी स्वामी राजकुमार दास जानकी घाट बड़ा स्थान के रसिकपीठाधीश्वर श्रीमहंत जन्मेजय शरण, आचार्य पीठ लक्ष्मणकिला के महंत मैथलीरमण शरण, पौराणिक पीठ हनुमानगढ़ी नाका के श्री महंत रामदास, तुलसी दास जी की छावनी के महंत जनार्दन दास, वैदेही भवन के महंत रामजीशरण सहित बड़ी संख्या में रामनगरी के संत धर्माचार्यो ने शिरकत कर अपने अपने विचारों से श्रीरामकथा में भगवान राम के चरित्र का गुणगान किया। आये हुए संतो का विशेष अभिनन्दन बिंदुगाद्याचार्य के उत्ताराधिकारी महंत रामभूषण दास कृपालु जी ने किया। गौरव शास्त्री व शिवेंद्र शास्त्री सहित सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।