: वेद ही इस देश का मूल आधार:अशोक थपलियाल
Thu, Oct 13, 2022
तीन दिवसीय क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन का हुआ समापन
अयोध्या। वेद वेदांत शिक्षा को संपूर्ण देश में स्थापित करने के लिए हर प्रकार से सहयोग के साथ ही समर्पण करना होगा, वेद सुरक्षित रहेगा तो धर्म सुरक्षित रहेगा और जब धर्म सुरक्षित रहेगा तो राष्ट्र भी सुरक्षित होगा। समाज में वेद की शिक्षा ठीक उसी प्रकार से होनी चाहिए जिस प्रकार से अन्य विषयों को लेकर विद्यालयों की संरचना की गई है, और उन्हें बढ़ाया जा रहा है। कार सेवक पुरम् में 11 अक्टूबर से चल रहे तीन दिवसीय क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन का गुरुवार को अपराह्न समापन हो गया।
दिल्ली विश्वविद्यालय के वास्तु शास्त्र के आचार्य अशोक थपलियाल ने समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कहा करें वेद ही इस देश का मूल आधार है, और अपने मूल को समझना उसकी सुरक्षा करना हर भारतीय का कर्तव्य है।
इस अवसर पर विहिप केन्द्रीय मंत्री हरिशंकर ने वेद विद्यालय की स्थापना को आवश्यक बताया और कहा वेद कंठस्थ करने के साथ ही इसका प्रचार प्रसार भी आवश्यक है। कार्यक्रम में कुलपति देवी प्रसाद त्रिपाठी महर्षि सांदीपनि के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार मिश्र, राकेश शास्त्री, ज्योतिषाचार्य गणेश भारद्वाज, आचार्य राधाकृष्ण मनोड़ी, पूर्व सचिव महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के ओम प्रकाश पांडे जी श्री राम वेद विद्यालय के प्रधानाचार्य इंद्रदेव मिश्रा,आचार्य सत्यम,आचार्य, सुनील ,आचार्य, टीकाराम, डां विक्रमा पांडेय, राधेश्याम मिश्र, आदि उपस्थित रहे।
: सीएम योगी ने श्रीमद् रामहर्षणायनम् महाकाव्य का किया विमोचन
Thu, Oct 13, 2022
अयोध्या। मैथिल सख्यपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी वल्लभाचार्य जी महाराज चारुशीला आश्रम जानकीघाट अयोध्या के सानिध्य मे चल रहे 108 कुण्डीय श्री राममन्त्र महायज्ञ मे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ द्वारा यज्ञ की भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए श्रीमद् रामहर्षणायनम् नामक महाकाव्य का विमोचन किया गया। यह महाकाव्य श्री श्री 1008 स्वामी श्री रामहर्षण दास जी महाराज के जीवन चरित्र पर आधारित डॉ0 भारत प्रसाद मिश्र द्वारा लिखा गया है। 1 हजार पेज के इस ग्रन्थ मे रामचरित मानस जैसे तीस मास मासपारायण नव नवाह्न पारायण हैं।
: जगद्गुरू परमहंसाचार्य के नेतृत्व में साधु-संत पीएम काे भेजेंगे पत्र
Thu, Oct 13, 2022
सुप्रीम कोर्ट के फैसले बाद भव्य राममंदिर बन रहा देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयाेध्या आ रहे उनकी समुचित व्यवस्था हो: मामा दास
अयाेध्या। तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरू परमहंस आचार्य के नेतृत्व में सात सूत्रीय मांगों काे लेकर साधु-संत पीएम नरेंद्र मोदी काे पत्र भेजेंगे। इस संबंध में गुरूवार को आचार्य पीठ तपस्वी छावनी, रामघाट में संताें की एक बैठक सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जगद्गुरू परमहंस आचार्य ने कहा कि सप्त सूत्रीय मांगों काे लेकर संताें ने बैठक की, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं काे रखा गया है। वह इसकाे लेकर जल्द ही प्रधानमंत्री काे पत्र भेजेंगे और संताें के साथ उनसे मिलेंगे भी। उन्होंने कहा कि हमारी पहली मांग है कि वेदों की रक्षा किया जाए। केंद्र सरकार इस ओर अपना ध्यान आकृष्ट करे। वेदाें के विद्वान धीरे-धीरे गुजरते जा रहे हैं। नई पीढ़ी तैयार नही हाे रही है। वेदाें की रक्षा जैसे-न्याय, व्याकरण, ज्याेतिष है। इसकी शिक्षा हाेनी चाहिए। वैदिक शिक्षा ही हमारी भारतीय शिक्षा है। अगर वह चली गई। ताे भारतीय संस्कृति खाे जायेगी। इसी प्रकार विरक्त संताें की रक्षा हाे। विरक्त संताें की परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त हाे रही है। संत राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। उनके मठ-मंदिराें का बिजली, पानी फ्री हाे। संताें काे सरकार की तरफ से 40 हजार रूपया महीना भत्ता दिया जाए। गाै हत्या पर तत्काल राेक लगाया जाना चाहिए। इस पर सरकार कठाेर कानून बनाए। गाै वंशाें की रक्षा हाे। सरकार दाे बच्चों की नीति जल्द से जल्द लागू करे। जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाए जाए। साथ ही समान नागरिक संहिता कानून लागू हाे। इसी प्रकार सरकार पर्यावरण पर गंभीर हाे। पर्यावरण की रक्षा काे लेकर कानून बनाए। इन सभी बातों काे हम केंद्र सरकार तक पहुंचायेंगे। वहीं हनुमानगढ़ी गद्दीनशीन के शिष्य मामा दास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले बाद भव्य राममंदिर बन रहा है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयाेध्या आ रहे हैं। उनके लिए शुद्ध पेयजल, लाकर रूम, शाैचालय आदि की व्यवस्था हाे। साथ ही साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर अयाेध्यावासियाें व श्रद्धालुओं को परेशान किया जा रहा है। इस पर शासन-प्रशासन विशेष ध्यान दे। ताकि अयाेध्यावासियाें और श्रद्धालुओं को काेई दिक्कत न हाे। उक्त बैठक में नागा नंदराम दास हनुमानगढ़ी, काली मंदिर कलकत्ता के कर्ण पुरी महाराज, तिरुपति बालाजी मंदिर आंध्र प्रदेश के पुजारी कृष्ण प्रपन्नाचार्य, श्रीमहंत रामउदार दास बलिया, नागा सूर्यभान दास, महंत जानकी शरण रामायणी, चंदा बाबा, पहलवान मनाेज दास, पुजारी उपेंद्र दास, पहलवान राजेश दास आदि संताें ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर काफी संख्या में साधु-संत माैजूद रहे।