: दर्शनभवन में प्राकट्योत्सव का छाया उल्लास
Mon, Mar 7, 2022
पुष्पों से ठाकुर जी एवं जानकी जीवन जी का हुआ विधिवत पूजन-अर्चन:डॉ. ममता शास्त्री
अयोध्या। रामनगरी के जानकी घाट स्थित रामानंद जी का मंदिर दर्शन भवन में विराजमान श्रीठाकुर, श्रीजानकी जीवन जी का दो दिवसीय प्राकट्योत्सव का उल्लास चहुंओर छाया। रविवार को सुबह आठ बजे तुलसी एवं पुष्प द्वारा ठाकुर, श्री जानकी जीवन जी का सहस्त्रार्चन हुआ। इसके बाद 1008 बत्तियों की महाआरती भी उतारी गई।
दर्शन भवन की महंत डॉ. ममता शास्त्री ने बताया कि दो दिवसीय प्राकट्योत्सव के अवसर पर आयोजित अनुष्ठानों की कड़ी में रविवार की सुबह कई क्विंटल पुष्पों से ठाकुर जी एवं जानकी जीवन जी का पूजन-अर्चन किया गया।
इसके बाद महाआरती उतारी गई। इसी क्रम में अपराह्न सुंदरकांड पाठ का आयोजन हुआ तो मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। शाम को फूलबंग्ला झांकी व भजन संध्या का भी आयोजन हुआ।
अनुष्ठान के समापन अवसर पर सोमवार सुबह आठ बजे भगवान शंकर का रुद्राभिषेक विधिविधान पूर्वक किया जाएगा। सुबह दस बजे से भक्तों द्वारा जेवनार गायन होगा।
इसके बाद संत-धर्माचार्यों की गोष्ठी आयोजित की जाएगी। अनुष्ठान के अवसर पर अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्र, सुखदेव दास, विजय कुमार, राघव दास सहित विभिन्न जिलों से आए भक्त मौजूद रहे।
: स्वामी अग्रदेवाचार्य जी महाराज का प्राकट्य उत्सव धूमधाम से मनाया गया
Sun, Mar 6, 2022
सिद्ध पीठ रसप्रमोद कुंज के पीठाधीश्वर महंत रामप्रिया शरण जी महाराज के सानिध्य में स्वामी अग्रदेवाचार्य महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और पदों का हुआ गायन
अयोध्या। विक्रम संवत 1552 के फागुन शुक्ल पक्ष द्वितीया ग्राम रेवासा जिला सीकर राजस्थान ब्राह्मण कुल में जन्मे रसिकाचार्य स्वामी अग्रदेवाचार्य जी महाराज सनातन धर्म की रक्षा और उसके उत्तरोत्तर उन्नति के लिए निरंतर काम किए और वैष्णव परंपरा में बावन द्वाराचार्यो अपने शिष्यों द्वारा 13 द्वाराचार्य पीठ की प्रतिष्ठा कराई। स्वामी अग्रदेवाचार्य जी महाराज का प्राकट्य उत्सव सिद्ध पीठ रसप्रमोद कुंज में वर्तमान पीठाधीश्वर महंत रामप्रिया शरण जी महाराज के सानिध्य में मनाया गया जिसमें स्वामी जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और पदों का गायन किया गया। स्वामी जी महाराज के प्राकट्य उत्सव ठाकुर जी की विशेष पूजा अर्चना के साथ स्वामी जी महाराज की भी विशेष पूजा अर्चना की गई।
रसमोद कुंज पीठाधीश्वर महंत राम प्रिया शरण जी महाराज ने बताया कि अग्रदेवाचार्य जी महाराज चंद्रकला जी महाराज के अवतार के रूप में माना गया है और 16 वर्ष की उम्र में श्री कृष्ण दास पयहारीजी दीक्षा लेकर शरणागति प्राप्त की।श्री महाराज जी द्वारा रसराज मई श्री सीताराम मई उपासना की अनंत सलिल फाल्गुन गंगा की भांति अविरल और मुक्त है त्रिवेणी से मिलने वाली श्री सरस्वती जी की धारा के समान इस उपासना का व्यापक रूप से प्रचार श्री अग्र देवाचार्य जी महाराज ने किया। उन्होंने बताया कि श्री महाराज जी को उपनाम अग्र अली जू के नाम से भी जाना जाता है।श्री महाराज जी ने बताया कि अग्र देवाचार्य जी महाराज प्राकट्य उत्सव हर्षोल्लास के साथ बधाई गायन करके मनाया गया। बधाई गायन में रसिक सिया छबीली शरण, व्यास राघवेंद्र शरण, व्यास लक्ष्मण पांडे, राजेंद्र पांडे, संजय, सुबोध, रामचंद्र श्रृंगारी व्यास, जयराम दास, रामस्वरूप शरण, युगल किशोर शरण, विश्राम शरण, रामानंद शरण सहित सैकड़ों श्रद्धालु भक्त श्री अग्र देवाचार्य जी महाराज के प्राकट्य उत्सव उत्सव में सम्मिलित हुए।
: शिद्दत से शिरोधार्य हुए रामानुजाचार्य स्वामी पुरूषाेत्तमाचार्य
Sat, Mar 5, 2022
पुरूषाेत्तमाचार्य जी ने राममन्दिर आन्दाेलन में अमिट छाप छोड़ी, जिसे कभी भुलाया नही जा सकता
अयोध्या। राम मंदिर आन्दोलन का मुख्य केंद्र रहा श्री सुग्रीव किला के संस्थापक आचार्य रामानुजाचार्य स्वामी पुरूषाेत्तमाचार्य जी महाराज का तीसरी पुण्यतिथि बड़े ही हावभाव के साथ मनाया गया। महोत्सव का समापन शनिवार को वृहद भंडारे के साथ संत धर्माचार्यों ने आचार्य श्री को श्रद्धांजलि अर्पित की।रामानुजाचार्य स्वामी पुरूषाेत्तमाचार्य जी महाराज का प्रभु श्रीराम से अगाध प्रेम था। यही कारण था कि वह राममन्दिर आन्दाेलन में शुरूवाती दाैर से ही जुड़ गए और उनका आश्रम आन्दाेलन का मुख्य केन्द्र विन्दु बना। जहां से समय-समय पर उसे गति दी गई। वह रामजन्मभूमि आन्दाेलन के अग्रणी याेद्धाओं में से एक थे। जिन्हाेंने भगवान राम और राममन्दिर के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्हाेंने मन्दिर आन्दाेलन में अमिट छाप छोड़ी। जिसे कभी भुलाया नही जा सकता है। उनका सपना था कि श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मन्दिर बने। हमारे रामलला टाट-पट्टी से निकलकर दिव्य भवन में विराजमान हाे। राममन्दिर का भव्य निर्माण कार्य जारी है।जिससे महाराजश्री का सपना जल्द साकार हाेने वाला है। पूज्य आचार्य के 3वीं पुण्यतिथि पर रामनगरी के संत धर्माचार्य का स्वागत परम्परागत तरीकें से आश्रम के वर्तमान पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य महाराज व मुख्य पुजारी स्वामी अनंत पद्मनाभाचार्य जी ने किया।जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य महाराज कहते है कि महाराज श्री काे देखकर ही हम बड़े हुए हैं। उनके आदर्शों व किए गए कार्याें काे कभी भुलाया नही जा सकता है। उन्हाेंने रामजन्मभूमि के लिए बहुत त्याग किया। अब राममन्दिर का निर्माण शुरु हो गया है। हमारे गुरू की भी आखिरी इच्छा थी कि भव्य मन्दिर का निर्माण हाे और हमारे रामलला टेण्ट से निकलकर दिव्य भवन में विराजमान हाें। जाे अब पूरी हाेने जा रही है। लेकिन मलाल यही रहेगा कि वह अपने जीते-जी अपनी आंखाें से राममन्दिर का निर्माण देख पाए।इस मौके पर महंत सुरेश दास, जगद्गुरू रामदिनेशाचार्य, महंत रामकुमार दास, महंत रामभूषण दास कृपालु, महंत उद्धव शरण, महंत जनमेजय शरण,नागा रामलखन दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।