: श्रीमद् भागवत कथा है ज्ञान गंगा : महंत गोविंद दास
Tue, Dec 14, 2021
परमहंस आश्रम कटरा में बह रही श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा
अयोध्या। भगवान की कोई आकृति नहीं होती है। भक्त जिस भाव से प्रभु में अपनी आस्था रखता है भगवान उसी स्वरूप में भक्त के समक्ष प्रकट होते हैं।यह बात सोमवार को अयोध्या के प्रसिद्धपीठ श्री परमहंस आश्रम कटरा में महंत विष्णुदेव दास महाराज के पावन सानिध्य में चल रहे श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में कथा ज्ञान यज्ञ के मर्मज्ञ प्रख्यात कथाव्यास महंत गोविंद दास जी महाराज ने कही। कथाव्यास ने कहा कि मनुष्य को प्रतिदिन ईश्वर के भजन करने चाहिए। इससे मनुष्य को आत्मिक शांति व शुद्धता मिलती है।महंत गोविंद दास जी महाराज ने भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया तथा भजनों की प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि मां सरयू पावन पवित्र नदी है। सरयू में स्नान से मनुष्य को पापकर्मों से मुक्ति मिलती है। भगवान कृष्ण ने भी यमुना का उद्धार किया था जो कि बाद में चलकर जन-जन की आस्था का केन्द्र बनी। रामनगरी के कटरा स्थित प्रसिद्धपीठ श्री परमहंस आश्रम कटरा में श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा के छटवें दिवस पर कथाव्यास महंत गोविंद दास जी महाराज ने कहा कि सच्चा धन भगवान का नाममात्र है। कलियुग में नाम और दान का बहुत अधिक महत्व है। अधिक से अधिक भगवान के नाम का स्मरण करे और दान करके घमंड़ न करे। जीवन में अच्छे संकल्प के साथ कार्य करें। महंत गोविंद दास जी कहते है कि मानव को जीवन में हमेशा गौ माता की सेवा करनी चाहिए। गौ माता के शरीर में 36 करोड़ देवी देवताओं का निवास करते हैं। गाय का संरक्षण करने से मनुष्य का कल्याण हो जाता है। कथाव्यास जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान गंगा है। इसे सुनने के लिए देव भी आतुर रहते हैं।उन्होंने बताया कि सुनीति के मार्ग को जो मनुष्य छोड़कर सुरुचि के मार्ग पर चलता है निश्चित ही उसको अंत में पछताना पड़ता है। इसलिए हर मनुष्य को हर स्थिति में सुनीति के मार्ग पर अवश्य चलना चाहिए। सुनीति का मार्ग ही मनुष्य को उत्थान के मार्ग पर ले जाते हुए भगवत प्राप्ति दिला सकती है। सुरुचि के मार्ग पर चलने वाले मनुष्य को जरूर कुछ दिन अच्छा मान सम्मान मिल सकता है परंतु उसे अंत में पछताना ही पड़ता है। उन्होंने कहा कि सर्वजन सुखाय एवं सर्वजन हिताय तथा लोक कल्याण की भावना से किए जाने वाले यज्ञ ही सफल होते हैं। किसी के प्रति द्वेष एवं नीचा दिखाने की भावना से किए गए यज्ञ हवन निश्चित ही असफल होते हैं। ऐसे यज्ञ हवन कभी सफल नहीं होते हैं। श्रीमद् भागवत कथा में श्रीमदजगद्गुरु स्वामी सूर्य नारायणाचर्या, श्री राम प्रिया कुंज के महंत उद्धव शरण व मंदिर से जुड़े शिष्य परिकर सहित सैकड़ों संत महंत श्रद्धालु वृंद उपस्थित रहे।
: प्रेरक है स्वामी विश्वनाथ प्रसादाचार्य की सरलता: देवेंद्रप्रसादाचार्य
Mon, Dec 13, 2021
दशरथ महल बड़ा स्थान के पूर्वाचार्य विश्वनाथ प्रसादाचार्य की 24वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके व्यक्तित्व-कृतित्व के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की गई
अयोध्या। दशरथ महल बड़ा स्थान के पूर्वाचार्य विश्वनाथ प्रसादाचार्य की 24वीं पुण्यतिथि विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मनाई गई। मंदिर के वर्तमान पीठाधिपति बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य की अध्यक्षता में विश्वनाथ प्रसादाचार्य की प्रतिमा का पूजन-अर्चन किया गया। श्रद्घांजलि समारोह में संत-धर्माचार्यों ने विश्वनाथ प्रसादाचार्य को नमन करते हुए उन्हें बिंदु संप्रदाय का गौरव बताया। पुण्यतिथि पर श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। दशथमहल के वर्तमान महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य के संयोजन में पूर्वाह्न पूर्वाचार्य को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके व्यक्तित्व-कृतित्व के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की गई। देवेंद्रप्रसादाचार्य ने अपने गुरु एवं पूर्वाचार्य को याद करते हुए कहा, उनकी सरलता-साफगोई आज भी प्रेरित करती है और उनसे मिला वात्सल्य अविस्मरणीय है। इस दौरान साकेतवासी आचार्य को निकट से जानने वाले बड़ी संख्या में संत-महंत मौजूद रहे और उन्होंने अनेक संस्मरण सुनाकर महंत विश्वनाथप्रसादाचार्य के व्यक्तित्व में निहित उदारता और सच्चाई बयां की। महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य ने कहा कि सद्गुरुदेव द्वारा स्थापित परंपराओं का सम्यक निवर्हन कर मंदिर में सतत धर्म ध्वजा फहराती रहे इसके लिए हम प्रतिबद्घ रहते हैं। हनुमानगढ़ी के महंत संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजयदास महाराज ने कहा कि वे बिंदु संप्रदाय के गौरव थे। संत समाज सदैव उनसे प्रेरणा लेता रहेगा। महंत मुरली दास महाराज ने कहा कि उनकी स्मृति सदैव धर्म के मार्ग पर अग्रसर रहने के लिए प्रेरित करती है। महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन व सुंदर सदन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास महाराज ने श्रद्घांजलि में पहुंचे संतों का स्वागत सम्मान किया।श्रद्धांजलि समारोह का दूसरा चरण भंडारा के नाम रहा। इस मौके पर महंत रामजीदास, बालयोगी महंत रामदास, महंत राम बरन दास, नागा रामलखन दास, पुजारी हेमंत दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहे।
महंत कृपालु रामभूषण दास के साथ बालयोगी महंत रामदास
: अमरकंटक के तपोनिष्ठ महंत बर्फानी दादा जी को संतो ने किया नमन
Mon, Dec 13, 2021
बर्फानी दादाजी महाराज सेवा को ही परम धर्म मानते थे, पूरे भारत में सभी तीर्थ स्थलों में सेवा किया करते थे इसी कारण से महाराज जी के पूरे भारत में कई आश्रम हैं जहां आज भी महाराज जी के प्रमुख शिष्यों द्वारा सेवा किया जा रहा...
अयोध्या। अखिल भारतीय चतु: सम्प्रदाय के अध्यक्ष हिमालय के कायाकल्पी अमरकंटक के तपोनिष्ठ महंत बर्फानी दादा जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि श्री राम नगरी अयोध्या में बर्फानी दादा के मुख्य शिष्य बाल योगी महंत लक्ष्मण दास मौनी जी महाराज के दिशा निर्देशन में प्रमुख गद्दी के महंत रामशरण दास और परमहंस महंत कृष्णा दास जी महाराज के संयोजन में श्री राम नगरी अयोध्या के तेरह भाई त्यागी खाक चौक अयोध्या में मनाया गया। मंदिर प्रांगण में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया जिसमें अयोध्या के संतो महंतों ने श्री महाराज जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और शब्द रूपी भावांजलि श्री महाराज जी को समर्पित किया। श्रद्धांजलि सभा के अवसर पर महंत कृष्णा दास जी महाराज ने बताया कि श्री बर्फानी दादाजी महाराज कायाकल्पी थे संत स्वरूप में गुरु भगवान रूप में हम सभी को आशीर्वाद प्राप्त होता रहा है लेकिन पिछले वर्ष श्री महाराज जी का साकेत वास हो गया और आज रविवार को श्री महाराज जी की प्रथम पुण्यतिथि अयोध्या में मनाई गई क्योंकि यह वही स्थान है जिसकी स्थापना श्री महाराज जी के गुरु भगवान ने किया था।
श्री महाराज जी ने बताया कि बर्फानी दादाजी महाराज सेवा को ही परम धर्म मानते थे और पूरे भारत में सभी तीर्थ स्थलों में सेवा किया करते थे इसी कारण से महाराज जी के पूरे भारत में कई आश्रम हैं जहां आज भी महाराज जी के प्रमुख शिष्य द्वारा सेवा का कार्य किया जा रहा है। महाराज जी का यही आदेश था की सेवा में ही परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है इसलिए निरंतर सेवा चलती ही रहनी चाहिए क्योंकि संत का प्रमुख कार्य सेवा ही है। श्री महाराज जी की प्रथम पुण्यतिथि श्रद्धांजलि सभा में अयोध्या के महंत सीताराम त्यागी, महंत राम कुमार दास, महंत भानुदास,करतलिया आश्रम के महंत बाल योगी रामदास जी श्री महाराज जी को श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रसाद पाए।