: घर में सिलेंडर से लगी आग, जलकर सब कुछ हुआ खत्म
Fri, Dec 10, 2021
समाजसेविका दीपिका सिंह पीड़ित परिवार की मदद, दिया हर सम्भव सहयोग का भरोसा
अयोध्या। रामनगरी के वासुदेव घाट स्थित प्रमोद शास्त्री के मकान में रहने वाले गोविंद कुशवाहा अपनी पत्नी और दो बच्चे के साथ फुलकी का ठेला लगाकर घर का भरण पोषण करते थे। बीती रात कल 8 बजे घर में पत्नी के द्वारा गैस पर खाना बनाते समय सिलेंडर में आग लग गई। जिससे घर का पूरा सामान जलकर खाक हो गया। कोई भी मदद के लिए इस परिवार के लिए सामने नहीं आया। वही जब इसकी सूचना समाजसेविका दीपिका सिंह 'दीदी' विश्व रामराज महासंघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष को मिली तो वह अपने राष्ट्रीय महासचिव आशीष मौर्य साथ गोविंद के आवास पहुंची और पीड़ित परिवार की मदद की। परिवार को गरम शॉल, कंबल, कपड़े, नगद धनराशि परिवार के सदस्यों को भेंट करते हुए आगे भी मदद करने का आश्वासन दिया। इस नेक कार्य को देखकर वहां मौजूद लोगों ने विश्व रामराज महासंघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपिका सिंह को धन्यवाद दिया।
: राम विवाहोत्सव की परंपरा प्रवाहमान है:लक्ष्मणकिलाधीश
Fri, Dec 10, 2021
श्रीराम एवं सीता के मिलन के महापर्व विवाह उत्सव का चरम परिलक्षित होता है
अयोध्या। वैष्णव नगरी अयोध्या में उपासना की दो अलग-अलग शाखाएं हैं। इन शाखाओं में दास परम्परा और सख्य परम्परा शामिल है। मिथिला धाम से अपना रिश्ता जोड़ने वाले मधुरोपासक कहलाते हैं और सख्य भाव से राम व सीता के रूप में दूल्हा-दुलहिन सरकार की उपासना करते हैं। इन दोनों ही परम्पराओं के उपासक संत रामानंद सम्प्रदाय के प्रथम आचार्य के रूप में देवी सीता जी को ही स्वीकारते हैं। गुरु वंदना में सीतानाथ समारम्भाम् रामानंदार्य मध्यमाम अस्मादचार्य पर्यन्ताम वंदे श्रीगुरु परम्पराम् इसी श्लोक का वाचन किया जाता है।
फिर भी दास परम्परा के उपासक राजा राम व हनुमान जी की उपासना दास यानी कि सेवक भाव से करते हैं। इसके समानान्तर सख्य भाव के उपासक सखी भाव की गुप्त उपासना करते हैं। इन संतों की मान्यता है कि जनकपुर में विवाह के बाद भगवान दुलहिन सरकार के साथ दूल्हा सरकार के रूप में ही विराजते हैं। यही कारण है कि ये उपासक श्रीरामचरित मानस के पारायण के दौरान विवाह प्रसंग तक का ही पारायण करते हैं। पूजन-अर्चन के दौरान सिर पर पल्लू रखकर त्रिरयोचित भाव से ही आराध्य को रिझाते हुए उनसे अनुनय-विनयपूर्वक प्रत्येक क्रिया करते हैं।
रामनगरी में पिछले पांच दिनों से चल रहे राम विवाह महोत्सव में आज आखरी दिन कलेवा का कार्यक्रम किया गया। जिसमे भगवान राम और तीनो भाइयो को उपहार देकर विदाई के समय गाली देकर विदा किए जाने का कार्यक्रम किया गया। भगवान की जनक पूरी से विदाई के लिए महिलाएं भगवान राम के अचर धराई किया गया जिसमें दूरदराज से अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान राम सभी भाइयो को विभिन्न प्रकार के उपहार दिया गया। इसके साथ ही विदाई कार्यक्रम के दौरान भगवान के भजनों पर श्रद्धालुु झूमते नाचते रहे।
इस परम्परा को पुष्पित और पल्लवित करने का श्रेय लक्ष्मण किला के संस्थापक आचार्य स्वामी युगलानन्य शरण महाराज को दिया जाता है। इस परम्परा के अनेक संत हुए है। आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला की परम्पराओं का निर्वहन आज भी वतर्मान किलाधीश महंत मैथलीरमणशरण जी महाराज कर रहे है। सीता-राम विवाहोत्सव रामनगरी के जिन चुनिंदा मंदिरों में पूरे भाव-चाव से मनाया जाता है, पुण्यसलिला सरयू के तट पर स्थित लक्ष्मणकिला उनमें से एक है। लक्ष्मणकिला उस रसिकोपासना की प्रधान पीठ है, जिसमें सीता के बिना श्रीराम की कल्पना तक नहीं की जाती है और ऐसे में श्रीराम एवं सीता के मिलन के महापर्व पर यहां उत्सव का चरम परिलक्षित होता है। मंदिर में पूरे रस्मोरिवाज के साथ बड़े ही धूमधाम से सीताराम विवाह महोत्सव मनाया गया। यह पूरा आयोजन किलाधीश महंत मैथली रमण शरण जी महाराज के सानिध्य व पूज्य आचार्य श्री मिथलेश नन्दनी शरण जी महाराज के संयोजन में सम्पादित हुआ। लक्ष्मणकिलाधीश महंत मैथिलीरमणशरण के अनुसार दो शताब्दी पूर्व लक्ष्मणकिला की स्थापना के साथ ही यहां राम विवाहोत्सव की परंपरा प्रवाहमान है। इस उत्सव के माध्यम से किला का आध्यात्मिक परिकर आराध्य से जुड़ाव को प्रत्येक वर्ष पुख्ता करता है।
: छयलवा को दैहो चुनि-चुनि गारी…
Fri, Dec 10, 2021
सिद्धपीठ श्री रामवल्लभा कुंज में धूमधाम से मनाया गया रामकलेवा
अयोध्या। छयलवा को दैहो चुनि-चुनि गारी, छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन, आनी धरी मणि थारी.. लुटि न जावें अवध नगर को सिगरी कन्या कुमारी, जेवत लालन मृदु मुसुकावत, सिया अली बलिहारी..’ मधुर गालियों की यह बौछार किसी और नहीं बल्कि अपने ही उपास्य को वह रसिकोपासक संत-साधक कर रहे थे जो प्रतिदिन उन्हें ही भजते और स्वयं के साथ लोक कल्याण की भी कामना करते हैं। अवसर था कुंवर कलेवा का। श्रीसीताराम विवाह महोत्सव के अवसर पर अवध नगरी वर पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए भी जनकपुरवासियों के ही रंग में रंगी नजर आई और दास परम्परा के अनुगामी संत भी सखी परम्परा में ही पगे दिखाई दिए।
यही कारण है कि मधुर उपासना के निर्धारित स्थानों के अतिरिक्त भी वैष्णव नगरी के अधिकांश मंदिरों में कुंवर कलेवा का आयोजन किया गया। वहीं मानसकार गोस्वामी तुलसी दास की भावना के अनुरुप ही संत-महंत भी ‘पुनि जेवनार भई बहु भांति, पठए जनक बोलाए बाराती..’ का अनुसरण करते हुए युगल सरकार को विविध व्यंजनो का रसास्वादन कराने में पीछे नहीं रहे। सिद्धपीठ श्री रामवल्लभा कुंज के श्रीमहंत रामशंकर दास वेंदाती जी महाराज के सानिध्य व मंदिर के यशश्वी अधिकारी पूज्य राजकुमार दास जी महाराज के निर्देशन में कुंवर कलेवा का पूरी भव्यता से आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंदिर के आंगन में युगल सरकार के विग्रह की प्रतिष्ठा कर उनकी पूजा-अर्चना की गई और आचार्य प्रणीत पदों का गायन हुआ।
सिद्धपीठ श्री रामवल्लभा कुंज में अधिकारी पूज्य प्रमुख स्वामी अधिकारी राज कुमार दास ने बताया कि अयोध्या में वैदिक विधि द्वारा विवाह उत्सव सम्पन हुआ और आज सुबह से कलेवा का कार्यक्रम किया गया। जिसमे विभिन्न प्रकार के व्यंजनों से भगवान को भोग लगाया गया। अयोध्या में वैदिक विधि व लौकिक विधि द्वारा विवाह उत्सव हुआ और इसी क्रम में आज सुबह से कलेवा का कार्यक्रम किया गया।इस कार्यक्रम में कई प्रान्तों से श्रद्धालु आज अयोध्या आए है। तथा बताया कि भगवान को हम लोग कुछ नहीं दे सकते हैं। वो तो सबका भरन पोषण करते हैं। लेकिन आज यह कार्य एक उपासना के रूप में हम लोग करते हैं। इसी क्रम में कलेवा का कार्यक्रम किया गया।और हजारों श्रद्धालु इस महोत्सव के दौरान झूमते रहे।