: पौराणिक पीठ रामजानकी मंदिर श्रृंगीऋषि आश्रम के महंत बने हेमंत दास
Thu, Jul 31, 2025
पौराणिक पीठ रामजानकी मंदिर श्रृंगीऋषि आश्रम के महंत बने हेमंत दासपुत्रेष्टि यज्ञ के बाद श्रृंगी ऋषि महाराज यहीं आकर के रुक थे और साधना की थी, महाराज जी की यहां समाधि भी है: हेमंत दास पीठाधीश्वर श्रृंगीऋषि आश्रमधर्म सम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज के शिष्य संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास की अध्यक्षता में संतों महंतों ने रामानन्दी परम्परानुसार दिया कंठी चद्दरअयोध्या। पौराणिक पीठ रामजानकी मंदिर श्रृंगीऋषि आश्रम, शेरवाघाट में कंठी चद्दर तिलक देकर संतों महंतों ने धर्म सम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज के शिष्य संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास की अध्यक्षता में संतों महंतों ने श्रृंगीऋषि आश्रम, शेरवाघाट के महंत पद पर हनुमानगढ़ी वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास महाराज को प्रतिष्ठित किया।साकेतवासी महंत जगदीश दास महाराज के निधन के उपरांत उनकी इच्छा अनुसार उनके तेरहवीं संस्कार पर उनकी इच्छा अनुसार आश्रम की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संत समाज ने सर्वसम्मति से श्री हेमंत दास को नया महंत घोषित किया। इस अवसर पर रामानन्दी परम्परा के रूप से उन्हें कंठी-चद्दर प्रदान कर गद्दी सौंप दी गई। महंत संजय दास महाराज ने बताया कि गुरुदेव भगवान के आशीर्वाद से हमारे छोटे गुरु भाई को रामजानकी मंदिर श्रृंगीऋषि आश्रम की बड़ी जिम्मेदारी महंत जगदीश दास महाराज के इच्छानुसार संतों महंतों की उपस्थिति में सौपीं गई, जिसका निर्वाहन वह पूरे मनोयोग से करेंगे, हनुमान जी महाराज और अयोध्या के संत महंत उनको आशीर्वाद देकर जो जिम्मेदारी सौंपी है उसको वह पूरे मनोयोग से पूरा करेंगे और आश्रम का चौमुखी विकास करेंगे।
महंत हेमंत दास महाराज ने कहा कि पूज्य गुरुदेव भगवान के आशीर्वाद से संतों महंतों जो जिम्मेदारी दी है उसका पालन करूंगा। महंत जगदीश दास महाराज हनुमानगढ़ी पर आते रहते थे उनकी इच्छा थी कि हनुमानगढ़ी की परंपरा से हमारे साकेत वास के बाद आश्रम की जिम्मेदारी दी जाए, संतों महंतों ने हमें श्रृंगी ऋषि आश्रम की जिम्मेदारी दी है मैं आश्रम की परंपरा का निर्वहन करुंगा इसका विकास करूंगा जिससे महंत जगदीश दास जी महाराज की आत्मा को भी शांति मिले। उन्होंने बताया कि श्रृंगी ऋषि आश्रम 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर है और एक पड़ाव यह भी है जिसे इसका और अधिक महत्व है अभी तक जो भी विकास जगदीश दास जी महाराज ने किया है उसको आगे बढ़ाएंगे यहां के आश्रम से जुड़े लोगों के सहयोग से। उन्होंने बताया कि आश्रम बहुत ही पौराणिक है, पुत्रेष्टि यज्ञ के बाद श्रृंगी ऋषि महाराज यहीं आकर के रुक महाराज जी की समाधि भी यहां है इससे इसकी पौराणिकता और बढ़ जाती है क्योंकि यह स्थान भगवान के राम जन्म और त्रेता युग से जुड़ा हुआ है, इसलिए पूरे मनोयोग के साथ इसका विकास करूंगा। महंती समारोह में प्रमुख रूप से निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास,तीनों अनी अखाड़ा के पूरे प्रधानमंत्री महंत माधव दास, महासचिव महंत सत्यदेव दास, महंत नंदराम दास, बसंतिया पट्टी के महंत रामचरण दास, महंत पहलवान राजेश दास, हनुमत संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य गद्दी नसीन श्री महंत प्रेम दास जी महाराज के शिष्य महंत डॉक्टर महेश दास, सियाराम किला पीठाधीश्वर महंत करुणानिधान शरण महाराज, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, बड़ा भक्तमाल महंत अवधेश कुमार दास, जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी वल्लभाचार्य, जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य, तुलसीदास छावनी पीठाधीश्वर महंत जनार्दन दास, श्रृंगार कुंज के महंत हरिभजन दास, हनुमानकिला के महंत परशुराम दास, बड़े हनुमान मंदिर के अधिकारी छविराम दास, करतलिया बाबा आश्रम पीठाधीश्वर महंत रामदास, सांसद करण भूषण सिंह, विधायक अभय सिंह, पूर्व विधायक इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू, महंत संजय दास के निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव सहित सैकड़ो संतों महंतों ने मांस जगदीश दास को श्रद्धांजलि अर्पित की और कंट्री चद्दर तिलक देकर के हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास महाराज को महंत बनाया।
: अति प्राचीन छोटी कुटिया मंदिर में किराएदार कर रखें है जबरिया कब्जा
Thu, Jul 31, 2025
अति प्राचीन छोटी कुटिया मंदिर में किराएदार कर रखें है जबरिया कब्जा
जर्जर है मठ मंदिर, हो सकती है अप्रिय घटना प्रशासन घृतराष्ट की भूमिका में बंद किये है आंखमंदिर के महंत चाहते है दिव्य भव्य मंदिर का हो निर्माण, बाहर से आने वालों रामभक्तों की हो सेवाअयोध्या धाम जर्जर मठ मंदिरों को नगर निगम प्रशासन ने जारी कर रखा है नोटिस, नही हो रहा कोई कार्यवाहीअयोध्या। प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या प्राचीनतम नगरों में से एक है और अभी भी यहां सैकड़ों हजारों वर्ष पुराने मंदिर और भवन जो जर्जर स्थिति में है, और जैसी बरसात पिछले दो दिनों से हो रही है वह कभी भी गिर सकते हैं, नगर निगम प्रत्येक वर्ष सावन मेला के पहले लिस्ट भी जारी करता है, मकान मालिकों और मंदिर के महंतों को नोटिस भी दी जाती है लेकिन कार्यवाही नहीं होती कहीं मंदिर के महंत और किराएदार का विवाद चल रहा है कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन है तो कहीं मकान मालिक और किराएदार का झगड़ा चल रहा है उनका भी मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन जब स्वर्ग द्वार स्थित यादव मंदिर की घटना घटती है मंदिर भर भर के गिर जाता है तब कोई भी व्यक्ति सामने नहीं आता ऐसे में जब राम मंदिर का निर्माण हो गया है प्रत्येक दिन लाखों श्रद्धालु अयोध्या धाम आते हैं, सावन मेला में तो यह संख्या और बढ़ जाती है फिर नगर निगम कोई ऐसा रास्ता क्यों नहीं निकलता जिससे अयोध्या के जर्जर मंदिरों मकान से मुक्ति मिले और आने वाले श्रद्धालुओं को खतरे से बचाया जा सके।
आपको बताते हैं अगर आप खुली निगाह से देखेंगे तो राम पथ से जैसे ही मणि रामदास छावनी की तरफ मुड़ेंगे सड़क के दोनों तरफ जर्जर मकान ही दिखाई देंगे यह एरिया प्रमोद बन में आता है और यह वह सड़क है जो बीच से सीधे मणि रामदास छावनी और बाईपास को जोड़ती इस पर भीड़ का दबाव तब बढ़ जाता है जब लता मंगेशकर चौक से श्री राम पथ रोक दिया जाता है श्रद्धालुओं को लेकर के ई-रिक्शा सैकड़ो की संख्या में आते हैं और बाईपास से दूरी कम होने के कारण और प्रसिद्ध पीठ मणिरामदास छावनी में चार धाम मंदिर, वाल्मीकि भवन का भी दर्शन हो जाता है इसका उपयोग लोग पैदल भी करते हैं।सर्वाधिक जर्जर मंदिर व भवन स्वर्गद्वार मुहल्ले में हैं। इनके अलावा राम की पैड़ी, नयाघाट, देवकाली, तुलसीबाड़ी, कजियाना व अन्य मुहल्ले हैं। अधिकांश भवन व मंदिर रख-रखाव न होने के कारण जर्जर हो चुके हैँ। मालिकाना या किराएदारी के विवाद भी हैं। ज्यादातर भवनों को लेकर मुकदमेबाजी चल रही है। इन भवनों में रहने वाले बेहद कम किराए पर हैं। यही वजह कि वे जान का खतरा होने के बावजूद इन भवनों को छोड़ने को तैयार नहीं हैं। इतने कम किराए पर अन्यत्र मकान मिलना भी संभव नहीं है। प्रमोद वन स्थित छोटी कुटिया मंदिर है जो अति प्राचीन है उस मंदिर में किराएदार जबरिया कब्जा कर रखे है। मंदिर के महंत चाहते है दिव्य भव्य मंदिर का निर्माण हो सके और बाहर से आने वालों रामभक्तों की सेवा हो सके। पर ये किराएदार है कि भवन खाली करने को तैयार नही है। भवन पूरा जर्जर है कभी भी गिर सकता है,कोई अप्रिय घटना हो सकती है। प्रशासन घृतराष्ट की भूमिका में आंख बंद किये हुए है।
: मित्रता में त्याग और समर्पण होना चाहिए: डा राघवाचार्य
Wed, Jul 30, 2025
मित्रता में त्याग और समर्पण होना चाहिए: डा राघवाचार्यरामलला सदन देवस्थानम में बह रही भागवत कथा की रसधार,व्यासपीठ से कथा का रसास्वादन करा रहें जगद्गुरू रामानुजाचार्यअयोध्या। रामलला सदन देवस्थानम पर इन दिनों श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव की अमृत वर्षा हो रही है। जिसमें व्यासपीठ से भागवत कथा की अमृत वर्षा प्रख्यात कथावाचक रामलला सदन देवस्थानम पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य महाराज कर रहे है। यह महोत्सव मंदिर में भगवान के पवित्रोत्सव व झूलनोत्सव के पावन अवसर पर हो रहा है। कथा के छटवें दिवस पर कथा में सुदामा व परमात्मा श्री कृष्ण की मित्रता की कथा सुनाते हुए कथा व्यास स्वामीजी ने कहा कि यदि मित्रता करना सीखना है तो हमें सुदामा की त्याग और परमात्मा के समर्पण की कथा अवश्य सुनना चाहिए। मित्रता निस्वार्थ व निष्काम भाव से करना चाहिए। मित्रता में जहां स्वार्थ आता है वहां मित्रता मित्रता नहीं रह जाती। बल्कि एक स्वार्थ से परिपूर्ण संबंध बन करके रह जाता है। उन्होंने कहा कि मित्रता में त्याग और समर्पण अत्यधिक आवश्यक है एक तरफ जहां सुदामा अत्यंत गरीब होते हुए भी परमात्मा श्री कृष्ण से स्वार्थ नहीं रखता है जबकि सुदामा परमात्मा श्री कृष्ण का बालसखा है। वहीं दूसरी ओर परमात्मा श्री कृष्ण जब सुदामा जी को अपने पास आया हुआ देखते हैं तो मित्र को किसी भी प्रकार की ग्लानि न हो यह ध्यान रखते हुए सुदामा के दिए हुए चावल अत्यंत प्रेम के साथ खाते हैं और अपना सर्वस्व सुदामा के लिए समर्पित कर देते हैं। कथाव्यासजी ने कहा कि जहां पर त्याग और समर्पण की भावना है मित्रता वही है और मित्रता का असली स्वरूप भी यही है। कार्यक्रम में रामलला सदन देवस्थानम से जुडे शिष्य परिकर मौजूद रहे।