: अनादिकाल से चल रही,झूलन की परंपरा : रामदास जी
Wed, Jul 30, 2025
अनादिकाल से चल रही,झूलन की परंपरा : रामदास जीप्रसिद्ध पीठ श्री करुणानिधान भवन मंदिर में झूलनोत्सव का छाया उल्लास, मंदिर कलाकारों द्धारा प्रस्तुत किया जा रहा गीत संगीतअयोध्या। प्रतिष्ठित पीठ श्री करुणानिधान भवन मंदिर के पीठाधीश्वर महंत रामदास जी महाराज की अध्यक्षता व अधिकारी रामनारायण दास जी के संयोजन में झूलनोत्सव का उल्लास छाया है। महंत रामदास जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में अनादिकाल से झूलन की परंपरा चली आ रही है। उस परंपरा का हम सब आज भी निर्वाहन कर रहे हैं। हम संत, महंत अपने-अपने मंदिरों में युगल सरकार को झूलन पर पधराकर झूला झुलाते हैं। साथ ही साथ अनेकानेक झूलन के पद्य गाकर भाव के अंतरंग में आनंदित भी होते हैं।अधिकारी रामनारायण दास ने कहा कि सर्वप्रथम प्रभु श्रीराम व मां जानकी के लिए मणिपर्वत पर झूले का आयोजन किया गया था। तब से प्रतिवर्ष श्रावण शुक्ल तृतीया को मणिपर्वत झूला मेले का आयोजन किया जाता है। इस दिन हम संत-महंत अपने मंदिरों के देव विग्रहों को पालकी पर बिठाकर गाजे-बाजे, हाथी घोड़ा संग मणिपर्वत ले जाते हैं और झूला झुलाते है। हरियाली तीज के दिन मणिपर्वत पर झूला पड़ने के साथ ही ऐतिहासिक झूला मेले का शुभारंभ हो जाता है। इसी दिन अयोध्या के मठ- मंदिरों में भी झूला पड़ जाता है। जो श्रावण शुक्ल पूर्णिमा रक्षाबंधन तक अपने चरमोत्कर्ष पर रहता है। मंदिरों में सायंकाल झूलन झांकी सजती है, जिसका सिलसिला देररात्रि तक चलता है। अनेकानेक नामचीन कलाकार अपने गायन-वादन से झूलनोत्सव में चार-चांद लगाते हैं। संत, महंत अपने-अपने मंदिरों युगल सरकार को झूला झुलाते हैं। साथ ही कलाकारों को नेग- न्यौछावर भी भेंट करते हैं। झूलन महोत्सव का कार्यक्रम पूरे 15 दिनों तक अपने चरम पर रहता है। अधिकारी राम नारायण दास जी ने कहा कि झूलन में विराजमान युगल सरकार का दर्शन करने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है।उन्होंने कहा कि झूलन का समापन रक्षाबंधन के दिन समारोह पूर्वक किया गया। जिसमें रामनगरी के संतों महंतो व कलाकारों का सम्मान किया गया।
: वेद वेदांत का परिपक्व फल है श्रीमद् भागवत कथा: रामानुजाचार्य
Sun, Jul 27, 2025
वेद वेदांत का परिपक्व फल है श्रीमद् भागवत कथा: रामानुजाचार्यरामलला सदन देवस्थानम में श्रावण झूलनोत्सव के पावन अवसर श्रीमद्भागवत कथा की बह रही रसधारअयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ रामलला सदन देवस्थानम में श्रीमद्भागवत कथा की रसमयी वर्षा हो रही है। श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस में व्यासपीठ पर विराजमान जगद्गुरू रामानुजाचार्य डा स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज ने कथा का विस्तार करते हुए कहा 5 वर्षीय अबोध बालक ध्रुव की तरह अविरल भक्ति जब साधक के मन में व्याप्त हो जाती है तब वह साधक भगवत धाम को प्राप्त करता है। जगद्गुरू जी ने पापी अजामिल की कथा का श्रवण कराते हुए कहा जन्म से ही पाप कर्म में लीन अजामिल प्रभु भक्ति में लीन संत जनों की कृपा पाकर के भगवान के धाम को प्राप्त करता है। वेद वेदांत का परिपक्व फल है श्रीमद् भागवत कथा। मनुष्य जन्म को प्राप्त करके प्रभु के बताए हुए मार्ग का अनुसरण करके सभी साधक भक्तजन सभी सुखों को प्राप्त कर सकते हैं।स्वामीजी ने कहा कि हिरण्यकश्यप ने घोर तप किया ब्रह्मा जी से वरदान भी प्राप्त किया लेकिन साधक भक्तों के मन में यदि अभिमान व्याप्त हो जाता है तो वह साधक भक्त भी भक्ति मार्ग से अलग हो जाता है और पाप कर्म में लीन हो जाता है। हिरण्यकशिपु के पुत्र बालक प्रहलाद मां के गर्भ में ही देवर्षि नारद से नवधा भक्ति का श्रवण करने के प्रभाव से अनेकों यातनाएं पिता से पाकर भी भक्ति मार्ग को नहीं छोड़ते हैं। प्रह्लाद जी की दृढ़ भक्ति को देख कर भगवान भक्त प्रहलाद को बचाने नरसिंह रूप धारण करके दुष्ट हिरण्यकशिपु का वध करते हैं। सुखदेव जी महाराज से कथा का श्रवण करके राजेंद्र परीक्षित जी का विश्वास और भी दृढ़ हो गया।कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन यजमान ओमप्रकाश जी ने सपरिवार ने किया। श्रावण झूलनोत्सव के पावन अवसर पर मंदिर में हो रहा श्रीमद् भागवत कथा। इस मौके पर राजेश मिश्रा, रमेश मिश्रा सिब्बू, राघवेंद्र अप्पू, मनोज तिवारी, अवधेश शास्त्री सहित जगद्गुरु जी के शिष्य परिकर मौजूद रहे।
: शिद्दत से शिरोधार्य हुए राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा रामचंद्र दास परमहंस
Sun, Jul 27, 2025
शिद्दत से शिरोधार्य हुए राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा रामचंद्र दास परमहंसराम मंदिर आंदोलन की हृदय स्थली रही दिगंबर अखाड़ा में 22वीं पुण्यतिथि पर संत धर्माचार्यों सहित शिष्य परिकरों ने पुष्पांजलि अर्पित कर नमन कियामंदिर में चल रहे पाच दिवसीय महोत्सव का हुआ भव्य समापन, अतिथियों का स्वागत किया उत्तराधिकारी महंत रामलखन दास नेअयोध्या। रामनगरी में प्रतिवाद भयंकर के नाम से मशहूर रहे राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा रामचंद्र दास परमहंस की रविवार को 22वीं पुण्यतिथि है। राम मंदिर आंदोलन की हृदय स्थली रही दिगंबर अखाड़ा में आज उनको श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान अयोध्या ही नहीं आसपास के जिलों के भी साधु संत मौजूद रहे और नम आंखों से राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा रामचंद्र दास परमहंस को श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वर्गीय रामचंद्र दास को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ अयोध्या के वरिष्ठ साधु संतों ने पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन को लेकर के कभी किसी से न डरने वाले प्रतिवाद भयंकर जिसे वाद विवाद में कभी कोई नहीं जीत सकता था, जो शंकराचार्य से भी राम मंदिर आंदोलन पर खुलकर चर्चा करते थे और प्रधानमंत्री से भी आंख में आंख डाल करके राम जन्मभूमि के मुक्ति की बात करते थे। ऐसे थे प्रतिवाद भयंकर स्वर्गीय रामचंद्र दास परमहंस। चंपत राय ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में हमेशा सक्रिय भूमिका निभाने वाले स्वर्गीय रामचंद्र परमहंस की आज पुण्यतिथि है, जिन्हें आज हमने श्रद्धांजलि अर्पित की है। रामचंद्र दास परमहंस को याद करते हुए उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के साथ जानवरों से उनका विशेष लगाव था। फक्कड़ स्वभाव के कारण उन्हें परमहंस की उपाधि दी गई थी। प्रतिवाद भयंकर और परमहंस यह दोनों उपाधि उनके लिए एकदम परफेक्ट थी। हमेशा जानवरों के प्रति उनका लगाव था। बंदरों के भोजन की व्यवस्था वह प्रतिदिन करते थे। इसके साथ ही वह कभी दूध और फल का सेवन न करके केवल चाय का ही सेवन करते थे। इन तमाम विषयों पर बहुत गंभीरता से चंपत राय ने रामचंद्र दास परमहंस को याद करते हुए मीडिया से बातचीत की।
कैसरगंज के लोकप्रिय नेता पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने परमहंस के जीवन के प्रेरणादायक प्रसंगों और उनके अदम्य साहस को याद किया।
उत्तराधिकारी महंत रामलखन दास ने अपने दादा गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पूज्य स्वर्गीय परमहंस राम मंदिर के लिए जीते थे। राम मंदिर के लिए उन्होंने आंदोलन शुरू किया और आंदोलन को ऐसी धार दे गए, जिसे कोई भूला नहीं सकता है।मंदिर के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत रामलखन दास ने कहा कि जब-जब आंदोलन में निराशा छाई, तब-तब परमहंस जी की वाणी ने आशा का संचार किया।
परमहंस जी का सानिध्य प्राप्त करने वाले सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी राजेश नाथ त्रिपाठी ने कहा कि अगर वो न होते तो मंदिर आंदोलन जन-जन का आंदोलन नहीं बन पाता। वे अकेले खड़े होकर हजारों को प्रेरित कर देते थे। महंत रामलखन दास व व्यवस्थापक आशुतोष सिंह ने संत-धर्माचार्यों का अभिनंदन किया। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में महंत रामशरण दास, जगद्गुरु रामानन्दाचार्य रामदिनेशाचार्य, महंत गौरीशंकर दास, महंत डॉ. भरत दास, महंत विवेक आचारी, जगद्गुरु डॉ. राघवाचार्य, महंत मिथिलेश नंदिनी शरण, महंत जन्मेजय शरण, महंत अवधेश दास, महंत रामकुमार दास, कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास,महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, नगर विधायक वेदप्रकाश गुप्ता, पूर्व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय,नीलेश सिंह, महेंद्र त्रिपाठी सहित, वृंदावन, मध्यप्रदेश, गुजरात सहित अन्य कई प्रांतों से संत-धर्माचार्य व भक्त शामिल रहे।