: श्रद्धा, समर्पण और प्रेम का प्रतीक बना झुनझुनिया बाबा आश्रम
Sat, Jul 26, 2025
श्रद्धा, समर्पण और प्रेम का प्रतीक बना झुनझुनिया बाबा आश्रमपुण्यतिथि विशेष
झुनझनियां बाबा राम नाम के अनन्य उपासक थे, अपनी भक्ति श्रद्धा और भावना से परमात्मा को सखी रूप से करते थे आराधनातीन दशक से आश्रम को सर्वोच्च शिखर पर स्थापित किया श्रीमहंत करूणा निधान शरण जी महाराज नेअयोध्या। मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम की धराधाम को सन्तो की सराह भी कही जाती है। या हम यूं कह ले कि रामनगरी में अनेक भजनानन्दी सन्त हुये उनमें से एक रहे विभूषित जगदगुरू स्वामी श्री जानकी शरण झुनझुनिया बाबा जो रामनाम के सच्चे साधक के रूप में न सिर्फ अयोध्या अपितु पूरे भारत में रामनाम की अलख जगायी।
झुनझुनिया बाबा का नाम अयोध्या के सिद्ध संतों में शामिल है। बाबा को सीता जी की सखी चंद्रकला का अवतार कहा जाता है। यही वजह थी कि बाबा हमेशा स्त्री रूप में रहते थे और राम धुन में लीन रहते थे। रसिक भाव से श्रीराम नाम का प्रचार कर उसे जनमानस के हृदय में प्रतिष्ठित करने वाले स्वामी जानकी शरण महाराज उर्फ झुनझुनिया बाबा की गिनती अयोध्या के सिद्ध संतों की अग्रणी पंक्ति में की जाती है। महाराजश्री को सीता जी की सहेली चंद्रकला का अवतार माना जाता है। उन्होंने सरयू के तट पर जहां तपस्या की थी। वहां सियाराम किला भव्य मंदिर बना हुआ है।
सरयूतट पर सुशोभित श्री सियाराम किला झुनकी घाट के आचार्य श्री की तपोस्थली आज अपने सर्वोच्च शिखर की ओर अग्रसर है। यह आश्रम मां सरयू के पावन तट पर स्थित है। जो चतुर्दिक धर्म की स्थापना, समाज सेवा गौ सेवा अतिथि सेवा विद्यार्थी सेवा संत सेवा व दरिद्र नारायण की सेवा में भी दिन प्रतिदिन निरंतर आगे बढ़ रहा है। जहां पर पूरी निष्ठा व ईमान से सभी सेवा किया जा रहा है। इस आश्रम में भक्तों की एक लम्बी फेरहिस्त है। जिसमें पूरे भारत से लाखों भक्त इस आश्रम से जुड़े हुये है। श्री सियाराम किला को भक्ति श्रद्धा समर्पण और प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। मां सरयू के तट पर भव्य और आकर्षक श्री सियाराम किला झुनकीघाट भक्ति और साधना के दृष्टि से भी सर्वोत्तम स्थान माना जाता है। यहां पहुंचकर सन्त साधक अपने परमाराध्य प्रभु की आराधना कर अपने को कृत्य-कृत्य करते है। मन्दिर के जगमोहन में युगल सरकार की प्रतिमा संगमरमर से बनी दिव्य मूर्ति का दर्शन करते है। मन्दिर में लगातार आज भी सीताराम धुनि कीर्तन संपादित कर महौल को भक्ति मय बना देता है। कहते है सौन्दर्यशाली, शांत वातावरण सरयूतट साकेत लोक का अनुभव सदा सर्वदा शीतल मंद सुगंध समीर अनुपम सूर्यास्त दर्शन भजनानंदीयों के लिए उत्तम शोर से परमशांत गुफा किला से सरयू तक जाने का गुप्त मार्ग झुनकी उद्यान मिथिला वाटिका संत्संग भवन श्री युगल बिहारी जू का अद्भुत दर्शन जैसी भाव-भंगिमा रखे ठाकुर जी वैसा ही बन जाए आदि सियाराम किला का विशिष्ठ गुण है। स्वामी जानकी शरण उर्फ झुनझुनिया बाबा उल्टी खाट पर बैठकर श्री राम नाम सत्य है की धुन लगाते हुए यात्रा करते थे। झुनझुनिया बाबा कानों में बाली हाथों में कंगन पैरों में घुंघरू पहन के सीता जी की सखी चंद्रकला के रूप में ही आजीवन भगवान श्रीराम की आराधना में लीन रहे। उन्होंने सत्यभाव से श्री सीताराम की उपासना की धारा प्रज्वलित की, जो आज भी करोड़ों लोगों को रामनाम रूपी दिव्य रस का अनुभव कराती है। मंदिर के महंत करुणानिधान शरण महाराज कहते हैं की झुनझुनियां बाबा ने कई दशक तक कठोर तपस्या कर भगवान का साक्षात दर्शन प्राप्त किया। किशोरी जी से उन्हें जन कल्याण का आदेश मिला।
सिद्ध संत और श्री राम नाम के अनन्य उपासक अपनी भक्ति श्रद्धा और भावना से परमात्मा को सखी रूप से आराधना कर प्रसन्न करने वाले जगद्गुरु द्वाराचार्य अनंत श्री समलंकृत श्री जानकी शरण जी महाराज झुनझनियां बाबा जी की 30वीं पुण्यतिथि पर रविवार 27 जुलाई को चरण पादुका पूजन एवं अभिषेक के साथ धूमधाम से सिद्ध पीठ श्री सियाराम किला झुनकी घाट में मनाया जायेगा। इस आश्रम को तीन दशक से अपने सर्वोच्चत शिखर पर निरन्तर ले जाने के लिए आज भी वर्तमान महन्त श्री करूणा निधानशरण जी महराज लगे रहते है। आश्रम से जुड़े प्रख्यात कथावाचक जिनका नाम देश विदेश के नामचीन कथावाचकों में लिया जाता है। स्वामीजी प्रंभजनानन्द शरण जी महराज प्रभुवन्दन एवं जनसेवा संस्थान द्वारा निरन्तर दीन-दुखी असहाय की मदद करना चिकित्सालयों की स्थापना कर रोगियों को निःशुल्क उपचार करना वृद्धजनों व वृद्धा आश्रम असहाय व निर्धन कन्याओं का विवाह करना विशाल गौशाला प्राकृतिक प्रकोप यानि बाढ़ भूकप में राहत देना सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार करना जैसी तमाम योजनाएं चला कर निरन्तर लोगों की मदद करते चले आ रहे है। आश्रम में सभी उत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है।
: गुरूदेव अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत थे: विद्याभास्कर
Sat, Jul 26, 2025
गुरूदेव अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत थे: विद्याभास्करकाेशलेश सदन के संस्थापक आचार्य स्वामी रामनारायणाचार्य महाराज के 40 वीं पुण्यतिथि पर संतों ने किया नमनअयाेध्या। काेशलेश सदन के संस्थापक आचार्य स्वामी रामनारायणाचार्य महाराज काे संताें ने श्रद्धापूर्वक याद किया। माैका था उनके 40वें पुण्यतिथि महाेत्सव का। इस अवसर पर शनिवार को मंदिर प्रांगण में श्रद्धांजलि सभा का आयाेजन किया गया जिसमें रामनगरी के विशिष्ट संत-महंत और धर्माचार्याें ने पूर्वाचार्य की प्रतिमा पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। संताें ने संस्थापक आचार्य के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। काेशलेश सदन के वर्तमान पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी श्री वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर जी महाराज ने कहा कि उनके गुरूदेव अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत थे। उनकी गणना सिद्ध संताें में हाेती रही है। उनका व्यक्तित्व बड़ा ही उदार था। रामनगरी के सभी संत-महंत उनका आदरपूर्वक सम्मान करते थे। अपने जीवनकाल में उन्होंने आश्रम का सर्वांगीण विकास किया। जीवन पर्यंत मठ के उत्तराेत्तर समृद्धि में लगे रहे। आज उन्हीं की देन है कि आश्रम अयाेघ्यानगरी के प्रमुखतम पीठाें में से एक है। जहां गाै, संत, विद्यार्थी व आगंतुक सेवा सुचार रूप से चल रही है। इस माैके पर बड़ी जगह के बिंदुगाद्यायाचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, लक्ष्मणकिलाधीश महंत मैथिलीरमण शरण, दिगम्बर अखाड़ा के उत्तराधिकारी महंत रामलखन दास, गाेपाल मंडपम महंत स्वामी कूरेशाचार्य, बड़ाभक्तमाल महंत अवधेश दास, हनुमत निवास महंत डॉ. मिथिलेश नंदिनी शरण, वेद मंदिर महंत रामनरेश दास, श्रीरामाश्रम महंत जयराम दास, महंत रामकुमार दास, महंत हरिसिद्धि शरण, महंत शशिकांत दास, नागा रामलखन दास, महंत कमलादास रामायणी, महंत रामनरेश शरण, महंत संताेष दास, महंत तुलसीदास, पार्षद पुजारी रमेश दास, प्रियेश दास आदि संत-महंत व भक्तगण उपस्थित रहे।
: भक्ति करने का उत्तम साधन है श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करना: रामानुजाचार्य
Sat, Jul 26, 2025
भक्ति करने का उत्तम साधन है श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करना: रामानुजाचार्यश्रावण झूलनोत्सव के पावन अवसर पर रामलला सदन देवस्थानम अयोध्या के तत्वावधान में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का हुआ शुभारंभअयोध्या। रामलला सदन देवस्थानम श्रावण झूलनोत्सव के पावन अवसर पर सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। प्रथम दिवस कथा के शुभारंभ करते हुए रामलला सदन देवस्थानम पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ स्वामी राघवाचार्य महाराज श्रीमद् भागवत कथा के महात्मा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत कथा अमृत कथा है जिसके श्रवण से मनुष्य भवसागर के पार हो जाता है। उन्होंने कहा कि अयोध्या धाम में भगवान का पावन झूलनोत्सव चल रहा है। चारों मंगल उत्सव मनाया जा रहा है। रामानुजाचार्य जी ने श्रीमद् भागवत का मंगलाचरण करते हुए कहा कई जन्मों के संचित पुण्य उदित होते हैं तब सप्तपूरियों में प्रतिष्ठित श्री अवधपुरी में भगवान के जीवन चरित्र को सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है इस कली काल में भक्ति करने का उत्तम साधन है। श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करना प्रभु के नाम का चिंतन स्मरण करना एवं परोपकार की भावना से कार्य करना हम सभी जीव धन्य हैं जो देव दुर्लभ भारत भूमि में हम सब ने जन्म लिया है। मनुष्य के स्वरूप को पाया है यह वह पवित्र भूमि है जिसका गुणगान देवगण स्वर्ग लोक में भी करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा से ईह लौकिक एवं पारलौकिक सुखों की प्राप्ति होती है शरणागत रक्षक है।प्रभु मां उत्तरा के गर्भ में भागवत के उत्तम श्रोता महाराज परीक्षित की प्रभु ने रक्षा की। आज से रामलला सदन में सांयकाल 4 बजे से 7 बजे तक चलेगी, इस कथा का विश्राम 31 जुलाई को होगी। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन यजमान ने किया। इस अवसर पर रमेश मिश्रा सिब्बू, राघवेंद्र मिश्रा अप्पू, मनोज तिवारी, अवधेश जी समेत बड़ी संख्या में संत साधक व महराज जी के शिष्य परिकर मौजूद रहें।