सिलेंडर संकट पर आस्था भारी, चूल्हे पर बन रहा प्रसाद : गैस किल्लत के बीच अयोध्या के मठ-मंदिरों ने परंपरा निभाते हुए दिया आत्मनिर्भरता का संदेश
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Wed, Apr 1, 2026
सिलेंडर संकट पर आस्था भारी, चूल्हे पर बन रहा प्रसाद
गैस किल्लत के बीच अयोध्या के मठ-मंदिरों ने परंपरा निभाते हुए दिया आत्मनिर्भरता का संदेश
यह पहल न केवल आस्था की शक्ति को दर्शाती है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि किसी भी संकट में सामूहिक प्रयास और परंपरागत उपायों से समाधान संभव
अयोध्या। वैश्विक स्तर पर गैस संकट के असर से भारत भी अछूता नहीं है। ऐसे समय में आमजन से गैस के संयमित उपयोग और वैकल्पिक ईंधन अपनाने की अपील की जा रही है। इसी बीच धर्म और आस्था की नगरी अयोध्या ने एक बार फिर उदाहरण प्रस्तुत करते हुए संकट से निपटने की राह दिखाई है। रामनवमी जैसे बड़े पर्व पर जहां हर वर्ष भव्य भंडारों का आयोजन होता था, वहीं इस बार गैस सिलेंडर की कमी के चलते इन आयोजनों का स्वरूप सीमित हो गया। बावजूद इसके, श्रद्धा और सेवा भाव में कोई कमी नहीं आई।रामनगरी के मठ-मंदिरों में परंपरागत भंडारे इस बार भी आयोजित हुए, लेकिन संख्या में कमी साफ दिखाई दी। मंदिरों के महंतों के अनुसार, जहां पूर्व वर्षों में पांच हजार से लेकर पचास हजार तक श्रद्धालुओं को भोजन प्रसाद वितरित किया जाता था, वहीं इस बार यह संख्या घटकर कुछ हजार तक ही सीमित रह गई। इसका प्रमुख कारण गैस की किल्लत और लकड़ी के चूल्हों पर बड़े पैमाने पर भोजन बनाना है, जो समय और श्रम दोनों की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है।
इसके बावजूद अयोध्या के मंदिरों ने हार नहीं मानी। श्री स्वामीनारायण मंदिर, रायगंज अयोध्या धाम में परंपरागत विधि से भगवान व हरि भक्तों के प्रसाद का आयोजन लगातार किया जा रहा है। श्री नर नारायण देव पीठ, अहमदाबाद के आचार्य प्रवर 1008 श्री कौशलेंद्र प्रसाद जी महाराज, बड़े महाराज श्री तेजेंद्र प्रसाद जी तथा भावी आचार्य श्री बृजेंद्र प्रसाद जी महाराज के पावन आदेशानुसार यह आयोजन संपन्न हुआ। महंत स्वामी श्री शास्त्री नारायण बल्लभ दास जी महाराज के निर्देशन में भगवान रामलला और भगवान घनश्याम महाराज का जन्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया।
मंदिर की रसोई में गैस के स्थान पर लकड़ी के चूल्हों का सहारा लिया जा रहा है। भगवान के भोग से लेकर श्रद्धालुओं के प्रसाद तक, हर व्यवस्था चूल्हों पर ही तैयार की जा रही है। यह न केवल परंपरा का निर्वहन है, बल्कि संकट के समय वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने का सशक्त संदेश भी है।
महंत स्वामी श्री शास्त्री नारायण बल्लभ दास जी महाराज ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर युद्ध के कारण उत्पन्न संकटों से निपटने के लिए आत्मनिर्भर बनना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज चूल्हों पर ही भोजन बनाते थे, जिससे शुद्धता भी बनी रहती थी। हालांकि इसमें कुछ कठिनाइयां जरूर हैं, लेकिन जब बात देशहित की हो तो हर चुनौती का सामना करना चाहिए।
उन्होंने गैस की कालाबाजारी पर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ लोग इस संकट में भी मुनाफाखोरी कर रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है। इस पर सरकार और प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों हरि भक्त पहुंच रहे हैं और सभी के लिए प्रसाद की व्यवस्था की जा रही है।
अयोध्या की यह पहल न केवल आस्था की शक्ति को दर्शाती है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि किसी भी संकट में सामूहिक प्रयास और परंपरागत उपायों से समाधान संभव है।
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