Sunday 28th of June 2026

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मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ व आईएमए अयोध्या ने आयोजित किया सीएमई कार्यक्रम

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स्ट्रोक में हर मिनट की देरी से नष्ट हो सकती हैं 19 लाख ब्रेन सेल्स:डा. : मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ व आईएमए अयोध्या ने आयोजित किया सीएमई कार्यक्रम

स्ट्रोक में हर मिनट की देरी से नष्ट हो सकती हैं 19 लाख ब्रेन सेल्स: डॉ. रतीश जुयाल

मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ व आईएमए अयोध्या ने आयोजित किया सीएमई कार्यक्रम

स्ट्रोक, क्रिटिकल केयर और किडनी स्टोन के आधुनिक उपचार पर विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

नई चिकित्सा तकनीकों और बेहतर मरीज देखभाल पर हुई विस्तृत चर्चा

अयोध्या। स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें उपचार में होने वाली हर मिनट की देरी मरीज के मस्तिष्क की लगभग 19 लाख ब्रेन सेल्स को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में समय पर पहचान और तत्काल उपचार न केवल मरीज की जान बचा सकता है, बल्कि उसे स्थायी विकलांगता से भी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह जानकारी मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) अयोध्या द्वारा आयोजित कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने साझा की। कार्यक्रम में अयोध्या एवं आसपास के क्षेत्रों के बड़ी संख्या में चिकित्सकों ने भाग लिया। इस अवसर पर न्यूरोलॉजी, और यूरोलॉजी से जुड़े विशेषज्ञों ने आधुनिक चिकित्सा तकनीकों, नवीन उपचार पद्धतियों और अपने क्लिनिकल अनुभवों पर विस्तार से चर्चा की। मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ के न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. रतीश जुयाल ने कहा कि भारत में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग स्ट्रोक से प्रभावित होते हैं। उन्होंने बताया कि समय पर थ्रोम्बोलाइसिस और अन्य उन्नत उपचार उपलब्ध होने पर मरीजों को गंभीर जटिलताओं और स्थायी विकलांगता से बचाया जा सकता है। यूरोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. रोहित कपूर ने बताया कि भारत में लगभग 10 से 12 प्रतिशत लोगों को जीवनकाल में कभी न कभी किडनी स्टोन की समस्या हो सकती है और यह समस्या युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कम पानी पीना, अधिक नमक का सेवन और बदलती जीवनशैली इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। डॉ. कपूर ने बताया कि आधुनिक तकनीकों जैसे आरआईआरएस और लेजर आधारित उपचार ने किडनी स्टोन सर्जरी को अधिक सुरक्षित, कम दर्दनाक और तेज रिकवरी वाला बना दिया है। कई मामलों में मरीज 24 घंटे के भीतर अस्पताल से छुट्टी लेकर सामान्य जीवनचर्या में लौट सकते हैं। उन्होंने समय पर जांच और उपचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे किडनी को होने वाले संभावित नुकसान से बचा जा सकता है। आईएमए अयोध्या के अध्यक्ष डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम चिकित्सकों को चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास और उपचार पद्धतियों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। आईएमए अयोध्या के सचिव डॉ. निशांत सक्सेना ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुभव और ज्ञान का लाभ स्थानीय चिकित्सकों के माध्यम से सीधे मरीजों तक पहुंचता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. वी.के. गुप्ता, डॉ. एस.पी. बंसल एवं डॉ. रमेश सिन्हा ने की। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों ने विशेषज्ञों के साथ विभिन्न विषयों पर संवाद किया तथा अपने अनुभव भी साझा किए। कार्यक्रम के दौरान डॉ. रोहित कपूर ने बताया कि अब अयोध्या और आसपास के मरीज नियमित रूप से स्थानीय ओपीडी में भी उनसे परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि वे प्रत्येक महीने के चौथे शनिवार को, देवा हॉस्पिटल, देवकाली, अयोध्या में सुबह 11.00 बजे से दोपहर 1.00 बजे तक तथा राज राजेश्वरी हॉस्पिटल, नहरबाग, नियावां रोड, अयोध्या में दोपहर 1.00 बजे से 3.00 बजे तक मरीजों को परामर्श देंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सकों को नवीनतम चिकित्सा ज्ञान से अवगत कराने के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को और सशक्त बनाना था।

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