स्वामी नारायण मंदिर में संत हरिभक्तों ने निवेदित की अपनी श्रद्धा : स्वामी नारायण मंदिर कालूपुर में धूमधाम से मनाया गया गुरुपूर्णिमा महोत्सव, जुटें हजारों संत साधक व हरिभक्त
admin
Wed, Aug 5, 2026
स्वामी नारायण मंदिर कालूपुर में संत व हरिभक्तों ने निवेदित की अपनी श्रद्धा
स्वामी नारायण मंदिर कालूपुर में धूमधाम से मनाया गया गुरुपूर्णिमा महोत्सव, जुटें हजारों संत साधक व हरिभक्त
गुरु पूर्णिमा पर गुरु भक्ति में सराबोर हुई रामनगरी, कालूपुर में आचार्य श्री के सान्निध्य में मना भव्य महोत्सव
अयोध्या। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर रामनगरी अयोध्या श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगी नजर आई। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने प्रातःकाल पवित्र सरयू में आस्था की डुबकी लगाई और इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि, हनुमानगढ़ी सहित प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन कर अपने आराध्य का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। दर्शन-पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने अपने-अपने गुरुओं के चरणों में उपस्थित होकर उनका पूजन किया तथा आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसी क्रम में स्वामीनारायण संप्रदाय की प्रमुख पीठ श्री स्वामीनारायण मंदिर कालूपुर (अहमदाबाद) में गुरु पूर्णिमा महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक गरिमा के साथ मनाया गया। आषाढ़ मास की पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, हरिभक्त सभा, गुरु पूजन तथा संतों के प्रवचन का आयोजन किया गया। देशभर से स्वामीनारायण संप्रदाय के विभिन्न मंदिरों एवं मंडलों के संत, महंत और हजारों हरिभक्त इस अवसर पर उपस्थित रहे।
श्री नर-नारायण देव गादीपति आचार्य धर्मधुरंधर कौशलेन्द्र प्रसाद महाराज, भावी आचार्य बिजेंद्र प्रसाद जी महाराज तथा बड़े महाराज श्री मोटा महाराज तेजेन्द्र प्रसाद जी के सान्निध्य एवं आशीर्वाद में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस दौरान देशभर से आए संतों और श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री का आशीर्वाद प्राप्त कर गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
रामनगरी अयोध्या के रायगंज स्थित स्वामीनारायण मंदिर के महंत शास्त्री नारायण बल्लभ स्वामी महाराज ने भी कालूपुर पहुंचकर आचार्य श्री की आरती उतारी और उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास को समर्पित पर्व है। इस दिन शिष्य अपने गुरु का पूजन कर उनके प्रति श्रद्धा और समर्पण प्रकट करता है। उन्होंने कहा कि जब गुरु शिष्य के हृदय में मंत्र की स्थापना करता है तो उसका स्वरूप ब्रह्मा के समान होता है, ज्ञान के संरक्षण और विस्तार के माध्यम से वह विष्णु स्वरूप बन जाता है तथा जब गुरु शिष्य को आत्मबोध और परम सत्य की अनुभूति कराता है, तब वह परब्रह्म परमेश्वर का स्वरूप धारण कर लेता है।
महंत शास्त्री नारायण बल्लभ स्वामी महाराज ने कहा कि जो शिष्य गुरु की आज्ञा का पालन करता है, उसकी आध्यात्मिक उन्नति और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। गुरु की कृपा से ही जीवन का कल्याण संभव है। यही कारण है कि गुरु पूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। महोत्सव में बड़ी संख्या में संत, साधक एवं हरिभक्त उपस्थित रहे और पूरे वातावरण में गुरु भक्ति, वैदिक मंत्रोच्चार तथा आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला।
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