आत्मा में छिपी है परमात्मा बनने की शक्ति : ज्ञानमती माता : दशलक्षण महापर्व में उत्तम क्षमा धर्म की महिमा बताई, गृहस्थ और मुनि धर्म को बताया एक-दूसरे का पूरक
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Wed, Sep 16, 2026
आत्मा में छिपी है परमात्मा बनने की शक्ति : ज्ञानमती माता
दशलक्षण महापर्व में उत्तम क्षमा धर्म की महिमा बताई, गृहस्थ और मुनि धर्म को बताया एक-दूसरे का पूरक
अयोध्या। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में आयोजित 51 स्वर्णिम इंद्रध्वज महामंडल विधान महामहोत्सव एवं दशलक्षण महापर्व के अवसर पर गणिनी प्रमुख आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माता ने श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण और क्षमा धर्म का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बीज में वृक्ष और दूध में घी विद्यमान रहता है, उसी प्रकार प्रत्येक जीव की आत्मा में परमात्मा बनने की शक्ति निहित है। त्याग, संयम और तपस्या के माध्यम से इस शक्ति को प्रकट किया जा सकता है।
माता जी ने भगवान महावीर के प्रमुख गणधर गौतम स्वामी के मुख से निःसृत चैत्यभक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें तीनों लोकों में स्थित कृत्रिम और अकृत्रिम जिन मंदिरों को नमन किया गया है। उन्होंने दशलक्षण पर्व के दस धर्मों—उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य—का महत्व बताया।
उत्तम क्षमा धर्म की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति जीवन में क्षमा और सहनशीलता को धारण करता है, वह महान पद प्राप्त करता है। क्षमा से घर भी स्वर्ग समान बन सकता है। उन्होंने कहा कि गृहस्थ धर्म, मुनि धर्म का छोटा भाई है और दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
रामायण प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जब श्रीराम वनवास गए तो भरत दुखी हुए। तब आचार्य ने उन्हें गृहस्थ धर्म का पालन करने की प्रेरणा दी।
अंत में उन्होंने कहा कि क्षमा धर्म सभी के लिए मंगलकारी हो और अयोध्या तीर्थ तथा धर्म की जय हो। इंद्रध्वज महामंडल विधान में 458 ध्वजाएं आकाश की ऊंचाइयों तक फहराई जाएंगी।
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