Thursday 17th of September 2026

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संत गोपाल मंडपम में श्रद्धांजलि सभा, शिष्यों ने सुनाए संस्मरण; संत-महंत और राजनेता हुए शामिल

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संत ज्योतिषी रामशरणाचार्य जी महाराज को संतों ने दी भावांजलि : संत गोपाल मंडपम में श्रद्धांजलि सभा, शिष्यों ने सुनाए संस्मरण; संत-महंत और राजनेता हुए शामिल

संत ज्योतिषी रामशरणाचार्य जी महाराज को संतों ने दी भावांजलि

संत गोपाल मंडपम में श्रद्धांजलि सभा, शिष्यों ने सुनाए संस्मरण; संत-महंत और राजनेता हुए शामिल

अयोध्या। मां सरयू के पावन तट पर स्थित श्री संत गोपाल मंडपम में बुधवार को संत ज्योतिषी रामशरणाचार्य जी महाराज की श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई। जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी कुरेशाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता में हुई सभा में अयोध्या के संत-महंतों, महाराज जी के शिष्यों और श्रद्धालुओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावांजलि दी। देशभर में फैले उनके शिष्यों ने उनकी साधना, तप और आध्यात्मिक जीवन को स्मरण किया।लगभग आधी शताब्दी से अयोध्या में साधनारत संत ज्योतिषी रामशरणाचार्य जी महाराज ज्योतिष एवं तंत्र विद्या के सिद्ध साधक के रूप में विख्यात रहे। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में जन्मे महाराज जी ने हरिद्वार के भूमा निकेतन के तत्कालीन स्वामी जी के साथ बदरी क्षेत्र में तप किया। सत्तर के दशक में अयोध्या आगमन के बाद अशर्फी भवन में प्रवास किया। विगत तीन वर्षों से वह श्री संत गोपाल मंडपम में जगद्गुरु स्वामी कुरेशाचार्य जी महाराज के सानिध्य में रह रहे थे।महाराज जी की दिनचर्या में नित्य सरयू स्नान का विशेष स्थान था। चिकित्सा के लिए अयोध्या से बाहर जाना पड़ा, लेकिन देहत्याग से पूर्व वह अयोध्या धाम लौट आए और यहीं अंतिम सांस ली। संतों ने कहा कि आचार-निष्ठ तपस्वी का अयोध्या धाम में परमपद प्राप्त करना उनकी साधनामयी जीवनयात्रा का भावपूर्ण पूर्णत्व है।महाराज जी के प्रमुख शिष्य एवं प्रतिष्ठित व्यवसायी अयोध्यावासी आईपी सिंह जी ने कहा कि “महाराज जी का आशीर्वाद सदैव हमारे ऊपर बना रहा। एक बार उन्होंने दिल्ली से फोन कर मुझे अयोध्या न आने को कहा। मैं उस दिन नहीं आया और उसी समय एक घटना घट गई। ऐसे अनेक संस्मरण आज भी स्मृति में हैं। महाराज जी हमारे लिए भगवान स्वरूप थे।”श्रद्धांजलि सभा में अयोध्या के संत-महंतों के साथ राजनेताओं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी पहुंचकर संत ज्योतिषी रामशरणाचार्य जी महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

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