Monday 5th of October 2026

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सुचना

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भगवताचार्य की रामलीला में कैकेयी कोपभवन और वनगमन का हुआ मंचन : भगवान राम ने जैसे ही वन के लिए प्रस्थान किए तो लीलाप्रेमियों की आंखों से आंसू छलक पड़े

भगवताचार्य की रामलीला में कैकेयी कोपभवन और वनगमन का हुआ मंचन

भगवान राम ने जैसे ही वन के लिए प्रस्थान किए तो लीलाप्रेमियों की आंखों से आंसू छलक पड़े

संतों की पौराणिक व ऐतिहासिक रामलीला में रामनगरी के व्यापारियों ने भगवान की आरती उतारी

अयोध्या। राम को चौदह वर्ष का वनवास और भरत को राज्य का वरदान कैकेयी ने मांगा तो दशरथ के होश उड़ गए। उनकी खुशियों पर मानों वज्रपात हो गया। भगवान राम ने जैसे ही वन के लिए प्रस्थान किए तो लीलाप्रेमियों की आंखों से आंसू छलक पड़े। रामनगरी के भगवताचार्य स्मारक सदन की ऐतिहासिक व पौराणिक रामलीला के छटवें दिन कैकेयी कोपभवन और वनगमन की लीला का मंचन हुआ।

रामनगरी की धार्मिक व मर्यादित संत तुलसीदास रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित भगवताचार्य स्मारक सदन की रामलीला में इन दिनों दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। रामलीला के छटवें दिन गुरुवार को लीला मंचन के दृश्य में विचारमग्न सीता को देख भगवान राम कहते हैं कि यह समय सोचने का नहीं है। शीघ्र वन चलने की तैयारी करो। सीता अपनी सास कौशल्या का पैर पकड़कर कहती हैं कि मैं बहुत ही अभागन हूं। जब सेवा करने का मौका आया तब वन जाना पड़ रहा है। कौशल्या ने सीता को आशीर्वाद दिया। उधर, राम के वन जाने की खबर सुनकर लक्ष्मण आते हैं और वह भी पिता दशरथ से वन जाने की आज्ञा मांगते हैं। दशरथ जी सीता से कहते हैं कि वन में तुम्हें बहुत कष्ट होगा। तुम वहां कैसे रहोगी। सीता संकोचवश कोई उत्तर नहीं दे पातीं। इतने में कैकेयी तिलमिलाती हुई आती हैं और मुनियों का वस्त्र राम के आगे रख देती हैं। कैकेयी राम से कहती हैं कि तुम राजा के प्राण हो तुम्हारा शील और स्नेह छोड़ने से वो डरते हैं। कैकेयी की यह बात राजा दशरथ को बाण की तरह लगती है। राम वशिष्ठ के पास पहुंचकर सबको विकल देख समझाते हैं। कहते हैं कि सब लोग महाराज की सेवा करते रहिए हम शीघ्र आएंगे। राम वन की ओर निकल पड़ते हैं। सुमंत रथ लेकर राम को बैठाने के लिए जाते हैं लेकिन सबको वापस होना पड़ता है। राम के बिना अयोध्या सूनी हो जाती है। भगवान की पहली रात तमसा नदी के किनारे कटती है। सुबह होने पर राम, सीता और लक्ष्मण शृंगवेरपुर पहुंच जाते हैं। स्वरूपों की आरती समिति के कार्यकारी अध्यक्ष रसिक पीठाधीश्वर श्रीमहंत जनमेजय शरण महाराज,कोषाध्यक्ष बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास, समिति के महामंत्री संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजयदास, श्रृंगीऋषि आश्रम के पीठाधीश्वर महंत हेमंत दास,पहलवान मुनिराम दास व्यवस्थापक राजीव रंजन पाण्डेय, व्यवस्थापक महंत धनुषधारी शुक्ला, पुजारी राजन दास, तीर्थ पुरोहित अध्यक्ष ओम प्रकाश पांडेय, अखाड़े के मुख्तार अजय श्रीवास्तव, महंत संजय दास के निजी सचिव समिति के मंत्री शिवम श्रीवास्तव, व्यापारी नेता पंकज गुप्ता, रमेश गुप्ता पूर्व चेयरमैन, व्यापारी नेता नन्दलाल गुप्ता, रसकुंज प्रतिष्ठान विकास गुप्ता, चंद्रा प्रतिष्ठान अंचल गुप्ता सहित आदि की संख्या में साधु संत उपस्थित रहे।

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