Saturday 2nd of May 2026

ब्रेकिंग

संतों के सानिध्य में 6 दिवसीय आयोजन सम्पन्न, कथा व रासलीला ने भक्तों को किया भावविभोर

अयोध्या में पार्किंग व्यवस्था पर सवाल, श्रद्धालुओं से अवैध वसूली के आरोप

सृष्टि एक अनुशासित और मेधावी छात्रा रही: प्रबंध निदेशक रवि यादव 

सौरभ कुमार ने 98.10 व सुमित तिवारी ने 96.64 अंक प्राप्त कर जिले का मान बढ़ाया 

संतों के सान्निध्य में वैष्णव परंपरा के अनुसार विधिवत अनुष्ठान कर अमित कुमार दास को कंठी, चादर और तिलक देकर महंत पद की

सुचना

Welcome to the DNA Live, for Advertisement call +91-9838302000

राम को चौदह वर्ष का वनवास और भरत को राज्य का वरदान कैकेयी ने मांगा तो : भगवताचार्य की रामलीला में वनगमन और निषाद मिलन का हुआ मंचन

भगवताचार्य की रामलीला में वनगमन और निषाद मिलन का हुआ मंचन

भगवान राम ने जैसे ही वन के लिए प्रस्थान किए तो लीलाप्रेमियों की आंखों से आंसू छलक पड़े

अयोध्या। राम को चौदह वर्ष का वनवास और भरत को राज्य का वरदान कैकेयी ने मांगा तो महाराज दशरथ जी के होश उड़ गए। उनकी खुशियों पर मानों वज्रपात हो गया। भगवान राम ने जैसे ही वन के लिए प्रस्थान किए तो लीलाप्रेमियों की आंखों से आंसू छलक पड़े। रामनगरी के भगवताचार्य स्मारक सदन की ऐतिहासिक रामलीला के सातवें दिन वनगमन और निषाद मिलन की लीला का मंचन हुआ।

रामनगरी की धार्मिक व मर्यादित संत तुलसीदास रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित भगवताचार्य स्मारक सदन की रामलीला में इन दिनों दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। रामलीला के सातवें दिन शुक्रवार को लीला मंचन के दृश्य में विचारमग्न सीता को देख भगवान राम कहते हैं कि यह समय सोचने का नहीं है। शीघ्र वन चलने की तैयारी करो। सीता अपनी सास कौशल्या का पैर पकड़कर कहती हैं कि मैं बहुत ही अभागन हूं। जब सेवा करने का मौका आया तब वन जाना पड़ रहा है। कौशल्या ने सीता को आशीर्वाद दिया। उधर, राम के वन जाने की खबर सुनकर लक्ष्मण आते हैं और वह भी पिता दशरथ से वन जाने की आज्ञा मांगते हैं। दशरथ जी सीता से कहते हैं कि वन में तुम्हें बहुत कष्ट होगा। तुम वहां कैसे रहोगी। सीता संकोचवश कोई उत्तर नहीं दे पातीं। इतने में कैकेयी तिलमिलाती हुई आती हैं और मुनियों का वस्त्र राम के आगे रख देती हैं। कैकेयी राम से कहती हैं कि तुम राजा के प्राण हो तुम्हारा शील और स्नेह छोड़ने से वो डरते हैं। कैकेयी की यह बात राजा दशरथ को बाण की तरह लगती है। राम वशिष्ठ के पास पहुंचकर सबको विकल देख समझाते हैं। कहते हैं कि सब लोग महाराज की सेवा करते रहिएए हम शीघ्र आएंगे। राम वन की ओर निकल पड़ते हैं। सुमंत रथ लेकर राम को बैठाने के लिए जाते हैं लेकिन सबको वापस होना पड़ता है। राम के बिना अयोध्या सूनी हो जाती है। भगवान की पहली रात तमसा नदी के किनारे कटती है। सुबह होने पर राम, सीता और लक्ष्मण शृंगवेरपुर पहुंच जाते हैं जहां पर निषाद से मिलन होता है। स्वरूपों की आरती समिति के कोषाध्यक्ष बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास, समिति के महामंत्री संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजयदास,उपाध्यक्ष नागा राम लखन दास जी महाराज, श्रृंगी ऋषि आश्रम पीठाधीश्वर महंत हेमंत दास महाराज, योग गुरु स्वामी महेश योगी, व्यवस्थापक राजीव रंजन पाण्डेय, व्यवस्थापक महंत धनुषधारी शुक्ला, तीर्थ पुरोहित अध्यक्ष ओम प्रकाश पांडेय, मुख्तार अजय श्रीवास्तव, घनश्याम दास, पृथ्वी दास व महंत संजय दास के निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में साधु संत उपस्थित रहे।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें