सनातन के नाम पर पोंगापंथी समाज को बांटने का कर रहे काम : रामनयन दास : छुआछूत और ऊंच-नीच का भेद खत्म करने की मांग, प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति मुख्यमंत्री संघ कार्यवाह को भेजा गया ज्ञापन
admin
Sun, Aug 30, 2026
सनातन के नाम पर पोंगापंथी समाज को बांटने का कर रहे काम : महंत रामनयन दास
छुआछूत और ऊंच-नीच का भेद खत्म करने की मांग, प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति मुख्यमंत्री संघ कार्यवाह को भेजा गया ज्ञापन
अयोध्या। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या के रामघाट मोहल्ले स्थित श्री रावत मंदिर में भक्ति आंदोलन मंच न्यास की बैठक राष्ट्रीय अध्यक्ष राजर्षि रामनयन दास रामायणी भागवताचार्य की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में सनातन समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, छुआछूत और ऊंच-नीच की भावना को समाप्त करने पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि समाज में विशेषकर साधु समाज और मंदिरों में व्याप्त छुआछूत एवं जातिगत भेदभाव को समाप्त करने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री तथा आरएसएस के सरसंघचालक और सरकार्यवाह को रजिस्ट्री के माध्यम से ज्ञापन भेजा जाएगा।बैठक को संबोधित करते हुए न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजर्षि रामनयन दास ने कहा कि सनातन के नाम पर पोंगापंथी लोग समाज को बांटने का काम कर रहे हैं। समाज में समानता का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सबसे अधिक छुआछूत संत समाज में दिखाई दे रही है। उन्होंने अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि तेली जयसवाल समाज से
ऊपर की जातियों के लोग नागा बन सकते हैं, लेकिन महंत और पुजारी नहीं बन सकते। वहीं तेली जयसवाल से नीचे की जातियों और ओबीसी समाज के लोग नागा भी नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के खिलाफ भक्ति आंदोलन मंच वर्ष 2004 से लड़ाई लड़ रहा है और जब तक इसका समाधान नहीं होगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। हमारे वेदों और रामायण में भी सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इसके बावजूद कुछ तथाकथित लोग समाज को बांटने का कार्य कर रहे हैं, जो सनातन धर्म के लिए उचित नहीं है।
राजर्षि महंत रामनयन दास ने रामजन्मभूमि में हुई प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रामजन्मभूमि की जो प्राण प्रतिष्ठा कराई गई, वह औपचारिक थी। मुख्य प्राण प्रतिष्ठा चंपत राय ने अनिल मिश्रा से कराई। उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति को गर्भगृह में पूजा न करने दिए जाने का मुद्दा भी उठाया।उन्होंने कहा कि समाज को बांटने वाली सोच से सनातन समाज कमजोर होगा। कहा जाता है कि ‘काटोगे तो बांटोगे’ सही है, लेकिन मैं कहता हूं कि सटोगे तो मिटोगे, सटने में भी कल्याण नहीं है। न्यास के राष्ट्रीय महामंत्री एवं करतालिया आश्रम के महंत बाल योगी रामदास ने कहा कि प्रभु श्रीराम ने कोल-भील सहित सभी जातियों और वर्गों को साथ लेकर चले। आज उन्हीं के सेवक समाज में जातिगत बंटवारा होना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जब हम साधु बनते हैं तो हमारा अच्युत गोत्र हो जाता है और हमारी जाति समाप्त हो जाती है। इसके बावजूद मंदिरों और अपने समाज में जाति-पांति का भेद दिखाई देता है तो इससे बहुत दुख होता है।बैठक में सचिव ध्रुवनाथ, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष महंत रामबालक दास, कुशीनगर जिलाध्यक्ष लक्ष्मणानंद सरस्वती, प्रवक्ता मणिराम दास, बिहार प्रांत अध्यक्ष अमर दास, पश्चिमी चंपारण अध्यक्ष शत्रुघ्न दास त्यागी, श्री भगवान शरण, सहसचिव रामबक्श प्रधानाचार्य, सहसचिव पंडित श्यामसुंदर दास शास्त्री, दुदही ब्लॉक अध्यक्ष सुभाष दास रामराम सहित दर्जनों संतों ने अपने विचार व्यक्त किए।इस अवसर पर महंत रामदास, राधेश्याम, सत्यनारायण दास सहित सैकड़ों की संख्या में संत-महंत उपस्थित रहे। बैठक में उपस्थित सभी संतों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष राजर्षि रामनयन दास द्वारा रखे गए प्रस्ताव पर एक स्वर में सहमति जताई। बैठक में निर्णय लिया गया कि समाज से, विशेषकर साधु समाज और मंदिरों से छुआछूत, जातिगत भेदभाव तथा ऊंच-नीच की भावना समाप्त करने के लिए संबंधित प्रमुखों को ज्ञापन भेजकर प्रभावी कार्रवाई की मांग की जाएगी।
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