उत्तर तोताद्रिमठ में श्रावण झूलनोत्सव का समारोहपूर्वक समापन : श्रीलक्ष्मी वेंकटेश की झूलन झांकी में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, भक्ति गीतों से गूंजा मठ परिसर
admin
Sat, Aug 29, 2026
उत्तर तोताद्रिमठ में श्रावण झूलनोत्सव का समारोहपूर्वक समापन
श्रीलक्ष्मी वेंकटेश की झूलन झांकी में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, भक्ति गीतों से गूंजा मठ परिसर
अयोध्या। रामनगरी में रामानुज संप्रदाय की वरिष्ठतम पीठ उत्तर तोताद्रिमठ विभीषणकुंड में श्रावण झूलनोत्सव का समारोहपूर्वक समापन हुआ। श्रावण शुक्ल एकादशी से शुरू हुआ झूलन महोत्सव रक्षाबंधन यानी श्रावण शुक्ल पूर्णिमा तक चला। मठ परिसर में प्रतिदिन होने वाली झूलन झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही। देर रात तक भक्त भगवान की मनोहारी झांकी का दर्शन कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करते रहे।
झूलनोत्सव का सानिध्य उत्तर तोताद्रिमठ विभीषणकुंड के वर्तमान पीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी अनंताचार्य महाराज ने किया। वहीं उनके उत्तराधिकारी एवं मैनेजिंग ट्रस्टी स्वामी केशव प्रपन्नाचार्य उर्फ केशव नारायण दूबे के संयोजन में महोत्सव की व्यवस्थाएं संचालित हुईं।
मठ में विराजमान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश के नित्य पूजन-अर्चन और आरती के बाद भगवान को सियाराम के प्रतीकात्मक स्वरूप में झूले पर विराजमान कराया जाता रहा। इसके बाद कलाकारों ने झूलन गीतों और पदों की मनोहारी प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा। 'चलो देखि आएं सिया रघुवीर झुलनवा झूल रहे...', 'झूलन में आज सज-धजकर युगल सरकार बैठे हैं...' और 'झूला झूलें सियाराम, झुलावें सखियां...' जैसे पदों से झूलन की महफिल सजती रही। साधु-संत और श्रद्धालु इन प्रस्तुतियों में भावविभोर नजर आए।
मठ परिसर में की गई रंग-बिरंगी विद्युत सजावट झूलनोत्सव की भव्यता में चार-चांद लगाती रही। पीठाधीश्वर स्वामी अनंताचार्य महाराज की ओर से कलाकारों को न्योछावर भी भेंट किया गया।
स्वामी केशव प्रपन्नाचार्य ने बताया कि युगल सरकार की झूलन झांकी के दर्शन की परंपरा त्रेतायुग से चली आ रही है। सनातन मान्यता के अनुसार इसके दर्शन से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है और जीव को 84 लाख योनियों के बंधन से मुक्ति मिलती है। इसी आस्था के साथ श्रद्धालु झूलनोत्सव में शामिल होकर भगवान के दिव्य स्वरूप का दर्शन करते रहे।
Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन