हनुमान बाग बना भक्ति और भव्यता का केंद्र : हनुमत लला को लगा छप्पन भोग, रामनगरी में छाया चहुंओर उल्लास, महोत्सव में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
admin
Sat, Mar 28, 2026
अयोध्या में रामजन्मोत्सव की धूम: हनुमान बाग बना भक्ति और भव्यता का केंद्र
साधना शुचिता और वैराग्य के अमृतपुंज अयोध्या में शिद्दत से शिरोधार्य हुए हनुमानजी
हनुमत लला को लगा छप्पन भोग, रामनगरी में छाया चहुंओर उल्लास, महोत्सव में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
अयोध्या। रामनगरी में रामजन्मोत्सव का उल्लास इस वर्ष कुछ अलग ही छटा बिखेरता नजर आया। हर गली, मंदिर और आश्रम में भक्ति की सरिता प्रवाहित होती रही, लेकिन विशेष आकर्षण का केंद्र बना हनुमान बाग, जहां पूरे विधि-विधान और भव्यता के साथ रामजन्मोत्सव मनाया गया।
मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी विद्युत झालरों, पुष्प सज्जा और पारंपरिक अलंकरण से सजाया गया था। संध्या होते ही पूरा वातावरण रोशनी से जगमगा उठा और श्रद्धालु भक्ति में डूब गए। “जय श्रीराम” और “सीताराम” के जयकारों से पूरा परिसर गूंजता रहा।
इस आयोजन का मुख्य आकर्षण भगवान को अर्पित किया गया छप्पन भोग रहा। विविध प्रकार के व्यंजन, मिठाइयां और फल सुसज्जित थालियों में सजाकर अर्पित किए गए। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल भोग नहीं, बल्कि अपनी आस्था और समर्पण का प्रतीक था।
कार्यक्रम के दौरान नवाह पारायण पाठ और रामकथा का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। रामकथा के श्रवण के साथ वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। रामनवमी के अवसर पर जैसे ही भगवान श्रीराम के जन्म का उत्सव मनाया गया, मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। कार्यक्रम का समापन दिवस भगवान के जन्म महोत्सव के साथ हुआ। जन्म महोत्सव के अगले दिन यानी आज भगवान को छप्पन भोग लगाया गया।पूरे मंदिर परिसर को भव्यता के साथ सजाया संवारा गया है। रंग बिरंगी रोशनी वाली विद्युत झालरों से सजा मंदिर सभी भक्तों को बरबस ही अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी। महोत्सव की अध्यक्षता भजनानंदी महंत जगदीश दास महाराज ने किया।साधना शुचिता और वैराग्य के अमृतपुंज भगवान श्री हनुमानजी की आध्यात्मिक स्थली श्रीअयोध्याजी के मर्यादित आश्रमों में सिद्धपीठ श्रीहनुमानबाग गरीबों मजलूमों की सेवा कर अपने परिकल्पना को परिलक्षित कर रहा है।कार्यक्रम में पुजारी योगेंद्र दास, मंदिर के अधिकारी सुनील दास,रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री, समेत हनुमान बाग सेवा संस्थान से जुड़े शिष्य परिकर मौजूद रहे।
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