Sunday 5th of July 2026

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जन्मोत्सव पर शिद्दत से शिरोधार्य हुए भगवान ऋषभदेव : अयोध्या में भगवान ऋषभदेव की जन्मजयंती श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाई गई, 31 फुट प्रतिमा का हुआ महामस्तकाभिषेक

जन्मोत्सव पर शिद्दत से शिरोधार्य हुए भगवान ऋषभदेव

अयोध्या में भगवान ऋषभदेव की जन्मजयंती श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाई गई, 31 फुट प्रतिमा का हुआ महामस्तकाभिषेक

रायगंज दिगंबर जैन मंदिर से निकली भव्य रथयात्रा, श्रद्धालुओं ने की विश्व शांति और मंगल की 

अयोध्या। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर की जन्मजयंती के अवसर पर रायगंज स्थित दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ जन्मोत्सव मनाया गया। इस दौरान भगवान ऋषभदेव की 31 फुट ऊंची प्रतिमा का पंचामृत से महामस्तकाभिषेक कर विश्व शांति और मंगल की कामना की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।मंदिर परिसर में प्रातःकाल से ही धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई थी। भक्तों ने भगवान के मस्तक पर जल, दूध, दही, घी, केसर, हरिद्रा और पुष्पवृष्टि सहित विभिन्न द्रव्यों से अभिषेक किया। इसके बाद शांतिधारा कर समस्त विश्व के कल्याण और शांति की कामना की गई। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा तथा श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते हुए पूजा-अर्चना में लीन दिखाई दिए।

   इस अवसर पर जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता जी तथा पीठाधीश्वर महंत रवीन्द्रकीर्ति स्वामी जी का सान्निध्य प्राप्त हुआ। उनके मार्गदर्शन में श्रद्धालुओं ने धर्ममय वातावरण में भगवान ऋषभदेव की आराधना की।जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में रायगंज दिगंबर जैन मंदिर से भगवान ऋषभदेव की भव्य रथयात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा गाजे-बाजे के साथ भगवान के जन्मस्थल टोंक मंदिर तक पहुंची। शोभायात्रा में शामिल जैन श्रद्धालु केसरिया वस्त्र धारण कर भगवान के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर रथयात्रा का स्वागत किया। भक्तिमय वातावरण में निकली यह शोभायात्रा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही।

    पीठाधीश्वर महंत रवीन्द्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि भगवान ऋषभदेव ने करोड़ों वर्ष पूर्व इस पुण्य धरा पर जन्म लेकर मानव समाज को सभ्य जीवन जीने की दिशा प्रदान की। उन्होंने मानव को कृषि, शिल्प, व्यापार सहित अनेक आजीविकाओं की विधि सिखाई और संयम, अहिंसा तथा सदाचार का मार्ग बताया। उनके ज्येष्ठ पुत्र  के नाम पर ही इस देश का नाम भारत पड़ा, जो आज भी उनकी गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है।कार्यक्रम में अवध क्षेत्र के साथ-साथ देश के विभिन्न स्थानों से सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। धार्मिक आयोजन के अंत में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद स्वरूप लड्डू का वितरण किया गया। इस अवसर पर डॉ जीवन प्रकाश जैन, मनोज जैन सहित दर्जनों लोग व्यवस्था में लगे रहे।

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