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: आधुनिक शिक्षा के साथ सनातन धर्म की शिक्षा बहुत जरूरी: बापू

बमबम यादव

Tue, Aug 23, 2022

आज बड़े धूमधाम से होगा श्री सीताराम विवाह, पूरा हनुमान बाग सजा दुल्हन की तरह

अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठों में शुमार श्री हनुमान बाग मंदिर में इन दिनों गुजरात से पधारे प्रख्यात कथावाचक रामेश्वरबापू हरियाणी के श्री मुख से रामकथा कथा आनंदमयी वर्षा हो रही है। यह भव्य आयोजन महंत श्री चंदेश्वर बापू सीताराम कुटीर शीलज अहमदाबाद के पावन अध्यक्षता में सम्पादित हो रहा है। कथा श्रवण करने के लिए गुजरात से सौकड़ों भक्त भी पधारे है। महंत श्री चंदेश्वर बापू अनवरत रामकथा व भागवत कथा सहित धार्मिक अनुष्ठान कराते रहते है।इस महोत्सव को हनुमान बाग मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास महाराज का सानिध्य मिल रहा। कथा के पंचम दिवस रामेश्वरबापू हरियाणी ने कहा कि गुरू कृपा से राजा दशरथ के वहा अयोध्या मे चार पुत्र का जन्म हुआ। चार पुत्र आनी चार वेद के समान अयोध्या मे बडा उत्सव मनाया है। उन्होंने कहा कि गुरू वशिष्ट का आगमन अयोध्या मे हुआ। गुरूजीने चारेय पुत्र का नामकरण किया। राम आनी विश्राम देने वाला तत्व, भरत आनी विश्व का भरण पोषण करने वाला तत्व , शत्रुघ्न आनी शत्रु को मारने वाला तत्व ओर लखन आनी सेवा करने वाला ओर जागृत तत्व है। बापू ने कहा कि भगवान राम शिक्षा अभ्यास करने के लिए गुरू के आश्रम मे जाना पडा। शिक्षा मे पाच वस्तु हर बालक को मिलना चाहिये।आज की शिक्षा मे यह पाच वस्त मिलना बालक के और जीवन के लिए श्रेष्ठ माना गया है। आधुनिक शिक्षा के साथ साथ सनातन धर्म की भी बहोत जरूरी है। बिना धर्म व्यक्ति अच्छा जीवन जी पाता नही है। आने कल रामकथा मे भगवान राम का विवाह होगा। सब लोग राम की बारात मे विशेष रूप से मनाया जायेगी।रामेश्वरबापू हरियाणी ने कहा कि शाश्वत आत्मा में समाई हुई है, कुछ लोग उसे आत्मज्ञान कहते हैं। शरीर में व्याप्त आत्मा अमृत है अर्थात वह कभी मृत नहीं होती। तीर्थ में घूमने से पाप का भार कम होता है, शरीर में पाप अर्थात् ही नकारात्मकता नष्ट होगा तो सकारात्मकता अर्थात् ही श्रद्धा बढ़ने लगती है। उन्होंने कहा कि निरन्तर राम का नाम रटने से कोई पाप कर्म हमारे हाथों नहीं होगा। हमें राम जी को सर्वत्र समान समझना चाहिए, जहाँ कम समझ लिया वहां हम पाप में डूबते हैं। इस मौके पर सुनील दास, रोहित शास्त्री, गोलू दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।

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