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गुरुदेव की पुण्यतिथि केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात करने का भी अवसर -महंत

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: निष्काम भक्ति से परमात्मा की प्राप्ति जरूर होती है: पुण्डरीक गोस्वामी

बमबम यादव

Fri, Jan 26, 2024

मन्माधव गौड़ेश्वर वैष्णव आचार्य पुण्डरीक गोस्वामी ने कहा - राम इस देश की आत्मा है, 22 जनवरी को पूरी दुनिया इस दृश्य को देख चुकी

कथा को सम्बोधित करते उदासीन संगत ऋषि आश्रम पीठाधीश्वर श्रीमहंत डा भरत दास जी

जब तक आप परमात्मा में विलीन नहीं होंगे तब तक आपकी यात्रा मंगलमय नहीं होगी

कथा में उपस्थित संत महंत

अयोध्या। श्री राम मंदिर में राम लला प्राण प्रतिष्ठा अन्तर्गत श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह "भये प्रकट कृपाला उत्सव" के द्वितीय दिवस उदासीन संगत ऋषि आश्रम में चहुंओर प्रेम की रसधार में संत साधक गोता लगा रहें थे। व्यासपीठ से वृंदावन के राधारमण सरकार के परमभक्त ख्यातिलब्ध कथाव्यास श्री मन्माधव गौड़ेश्वर वैष्णव आचार्य पुण्डरीक गोस्वामी जी के श्रीमुख से भागवत कथा की अमृत वर्षा कर रहें है। आज कथा के द्धितीय दिवस आचार्य श्री ने कथा आरंभ में अयोध्या के महत्व को दर्शाया, कहा 'सिया राम मय सब जग जानी करहू प्रणाम जोड़ी जग पानी' पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि राम इस देश की आत्मा है और इस 22 जनवरी को पूरी दुनिया इस दृश्य को देख चुकी है।


महाराज श्री ने बताया की कई लोग कहते है की हमारे शास्त्रों और ऋषि मुनियों के द्वारा बताये गए मार्ग एवं साधनो का पालन करने के बाद भी हमें ईश्वर की प्राप्ति क्यों नहीं होती ? महाराज श्री ने बहुत ही सुन्दर जवाब देते हुए बताया की हमें ईश्वर की प्राप्ति इसलिए नहीं होती क्यूंकि हम ईश्वर को पाने वाले मार्ग पर अपने आप को पूर्णता समर्पण किये बिना ही छोड़ देते है। इसलिए हमारे हाथ असफलता लगती है,जब तक आप परमात्मा में विलीन नहीं होंगे तब तक आपकी ये यात्रा मंगलमय नहीं होगी।उन्होंने कहा कि सत्यं परमं धीमहि इस संसार में एक ईश्वर ही सत्य है जो दिख रहा है वह केवल वह प्रभु की माया है। भागवत की उत्पत्ति के बारे में बताया सुखदेव भगवान को श्री व्यास जी महाराज ने भागवत को प्रदान किया वही भागवत कथा आज हम सब को सुनने को मिल रही है। महाराज श्री ने बताया कि परमात्मा इस संसार में अपने भक्तों की रक्षा के लिए अनेक, अनेक अवतार लेकर आते भागवत में चौबीस अवतारो के माध्यम से बताया। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों के लिए सबकुछ करने के लिए तैयार रहते है। उदाहरण में पांडवो के लिए भगवान सारथी बने। महाभारत की कथा में के बारे में भी महाराज जी ने कहा कि कौरव और पांडवों के युद्ध में विजय सत्य की ही होती है। जिसके रक्षक प्रभु होते हे उसे इस संसार में कोई नहीं हरा सकता। आचार्य जी ने पांडवों की कथा को बताया अपने कल्याण के लिए परमात्मा की भक्ति ही एक उपाय हे भक्ति को दो प्रकार की बताया निष्काम भक्ति और सकाम भक्ति। निष्काम भक्ति से परमात्मा की प्राप्ति जरूर होती है। आज की कथा में अध्यक्षता कर रहें श्रीमहंत डा भरत दास, जगद्गुरू रंगनाथाचार्य जी रामानुज कोट उज्जैन, बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर श्रीमहंत अवधेश दास, श्रीमहंत डा रामानन्द दास, स्वामी कुरेशाचार्य,स्वामी शशिधराचार्य ने कथा प्रारंभ होने से पूर्व अपने प्रवचनों के द्वारा सभी को आशीष दिया। इस मौके पर सत्यनारायण जी मौर्य, रिटायर्ड आईपीएस विजयपाल सिंह, आईपीएस एस एन सिंह सहित बड़ी संख्या में संत साधक व आचार्य पुण्डरीक गोस्वामी जी के शिष्य परिकर मौजूद रहें।

भगवान रामलला के सम्मुख आचार्य पुण्डरीक गोस्वामी जी व आईपीएस एसएन सिंह गणतंत्र दिवस पर सामुहिक राष्ट्रगान करते हुए
संगीत महोत्सव का आनंद लेते आचार्य श्री

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