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: अयोध्या से जैनधर्म का भी अनादिकालीन संबंध है: ज्ञानमती माता

बमबम यादव

Mon, Jan 15, 2024

जैन मंदिर रायगंज में आज से विशाल अन्नक्षेत्र होगा शुरु, प्रतिदिन 5 हजार से भी अधिक भक्तों के लिए सुबह 10 बजे से सायं 4 बजे चलेगा भंडारा

अयोध्या। जहां देश ही नहीं पूरे विश्व में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर उद्घाटन व प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन सभी के लिए उत्साह का विषय बना हुआ है। वहीं जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री ऋषभदेव सहित 5 तीर्थकरों की जन्मभूमि होने के नाते अयोध्या में ही जैनधर्म बड़ी मूर्ति जैन मंदिर के नाम से लगभग 6 एकड़ के विशाल प्रांगण में प्राचीन जिनमंदिरों के साथ नये 5 जिनमंदिरों का निर्माण भी चल रहा है। भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगम्बर जैन तीर्थ के पीठाधीश्वर श्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी ने बताया कि ऐसे भगवान ऋषभदेव और भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में चिर प्रतीक्षित श्रीराम जैन मंदिर के उद्घाटन का जब अवसर आया है। तो जैन समाज भी हर्ष से भावविभोर होकर आने वाले भक्तों के लिए अपने मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन कर रहा है। जो श्रीदिगम्बर जैन अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी अयोध्या द्वारा प्राण प्रतिष्ठा के सम्पूर्ण आयोजन में 15 जनवरी से 24 जनवरी तक प्रतिदिन 5 हजार से भी अधिक भक्तों के लिए सुबह 10 बजे से सायं 4 बजे तक चालू रहेगा। जैनधर्म के अनुसार अयोध्या तीर्थ अनादिकालीन है और इसे शाश्वत की संज्ञा प्राप्त है। शाश्वत का अर्थ होता है कि जो हमेशा अजर और अमर रहे। कभी किसी से युद्ध में जीता न जा सके। ऐसी पावन, पवित्र धरा को अयोध्या के नाम से जैन पुराणों में भी महिमा मण्डित किया गया है। यह प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव भगवान के साथ ही 24 तीर्थकरों में से दूसरे तीर्थकर अजितनाथ, चौथे तीर्थंकर अभिनंदननाथ, पाँचवें तीर्थकर सुमतिनाथ एवं चौदहवें तीर्थकर अनंतनाथ की जन्मभूमि भी है। जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माता ने बताया 22 जनवरी को रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान होने जा रहे हैं। जो हम सबके लिए हर्ष का विषय है। अयोध्या से जैनधर्म का भी अनादिकालीन संबंध है। क्योंकि जैन आगम ग्रंथों के अनुसार भगवान की वाणी से यही प्राप्त हुआ है। प्रत्येक काल में सभी 24 तीर्थकरों का जन्म अयोध्या में ही होता है। इसीलिए यह अयोध्या शाश्वत तीर्थंकर जन्मभूमि के नाम से जैन धर्मानुयायियों एवं समूचे विश्व द्वारा पूजी जाती रही है। भगवान ऋषभदेव इक्ष्वाकुवंशीय थे, जिनका जन्म वर्तमान से करोड़ो करोड़ों साल पहले युग की आदि में इसी धर्मभूमि अयोध्या में हुआ था। उनका कहना है कि भगवान राम भी जैनधर्म के लिए आराध्य हैं, जिन्होंने अपने समस्त कर्मों को नष्ट करके मोक्ष प्राप्त किया है। तीर्थक्षेत्र की मार्गदर्शिका साध्वी आर्यिका श्री चंदनामती माता ने कहा कि इसी भूमि से ऋषभदेव के पुत्र चक्रवर्ती भरत सम्राट ने पूरी दुनिया पर एक छत्र प्रजाहित का अहिंसामयी शासन किया था। अयोध्या महान तीर्थभूमि है, जिसकी वंदना करने से नरक और पशुगति के बंध छूटते हैं। भक्तों को देवगति प्राप्त होती है।

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