Sunday 23rd of August 2026

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हनुमानगढ़ी के पूर्व गद्दीनशीन श्रीमहंत दीनबंधु दास के नाती शिष्य पुजारी राजन दास ने संतों का किया सम्मान

गुरुदेव की पुण्यतिथि केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात करने का भी अवसर -महंत

जानकी घाट  स्थित चारुशिला मंदिर में संतों ने की बैठक, अध्यक्षता चारुशिला मंदिर पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम-सीता, लक्ष्मण व हनुमानजी का पंचामृत से अभिषेक; दक्षिण भारतीय वाद्य और मशालों ने मोहा मन

स्वतंत्रता दिवस पर रायगंज स्थित स्वामी नारायण मंदिर में भगवान राधाकृष्ण व स्वामी नारायण का विशेष श्रृंगार,दर्शन को उमड़े

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: परिवार को मालिक बनकर नहीं माली बनकर संभालिए: प्रभंजनानन्द शरण

बमबम यादव

Thu, Jan 18, 2024

प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के पावन अवसर पर सियाराम किला झुनकी घाट में बह रही रामकथा की रसधार

अयोध्या। रामनगरी में चारो तरफ राममय वातावरण है। हर कोई राम रुपी सागर में गोता लगा रहा है। भगवान रामलला अपने निज धाम में विराजमान होने वाले हैं। मठ मंदिर घर आगंन चारों तरह लोग खुश है। घरों के आगे रंगोली बना रहें है। मंदिर मंदिर कथा,नवाह पारायण उत्सव मनाये जा रहें है। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठों में शुमार सियाराम किला झुनकी घाट पर मंदिर के प्रथम आचार्य का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। तो व्यासपीठ से रामकथा की अमृत वर्षा प्रख्यात कथावाचक स्वामी प्रभंजनानन्द शरण जी कर रहें है। महोत्सव की अध्यक्षता झुनकी पीठाधीश्वर श्रीमहंत करुणानिधान शरण जी महाराज कर रहें है। आज कथा के द्धितीय दिवस स्वामी प्रभंजनानन्द शरण ने कहा कि गुण और अवगुण सब के अंदर होता है। दुनिया में कोई भी मनुष्य सर्वगुण संपन्न नहीं होता इसलिए सामने वाले की कमियों को नजर अंदाज करके संबंध निभाना सीखिए। वाणी और विचार यह दोनों प्रोडक्ट हमारी खुद की कंपनी के हैं जितनी क्वालिटी और गुणवत्ता अच्छी रखेंगे उतनी ही आपकी कीमत ज्यादा होगी।उन्होंने कहा कि खुशी के फूल उन्ही की झोली में गिरते हैं जो अपनों से अपनों की तरह मिलते हैं। दिखावा और झूठ बोलकर व्यवहार बनाने से अच्छा है सच बोलकर दुश्मन बना लो तुम्हारे साथ कभी कोई विश्वास घात नहीं होगा।स्वामीजी ने कहा कि विश्वास और भरोसा उन ईंटों की तरह होता है जिन पर पूरी इमारत टिकी होती है यदि एक भी ईट खिसक जाए या दरार पड़ जाए तो इमारत गिर जाती है। जब परिस्थितियों बदलना असंभव लगे तब अपने मन की स्थिति को बदल लीजिए। जिंदगी तब बेहतर होती है जब हम खुश होते हैं लेकिन जिंदगी तब बेहतरीन हो जाती है जब हमारी वजह से सब लोग खुश होते हैं।परिवार को मालिक बनकर नहीं माली बनकर संभालिए जो खयाल तो सबका रखना है पर अधिकार किसी पर नहीं जताता। जब हम अकेले हो तब अपने विचारों को संभाले और जब सबके बीच हो तब अपने शब्दों को संभालेक्षुद्र स्वार्थ और व्यक्तिगत सुख के लिए जीने वाले कभी महापुरुष नहीं बन सकते उसके लिए समस्त सुख सुविधाओं का त्याग करके घर से बाहर निकलनाा पड़ता है।दो बातों का सदैव ध्यान रखें बड़ी से बड़ी  विपत्ति में भी घबराएं नहीं हिम्मत नहीं हारेें। अपने सामने किसी को छोटा नहीं समझे, अपने प्रेम और विनीत आचरण से सबको अपनाये।

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