Saturday 22nd of August 2026

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गुरुदेव की पुण्यतिथि केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात करने का भी अवसर -महंत

जानकी घाट  स्थित चारुशिला मंदिर में संतों ने की बैठक, अध्यक्षता चारुशिला मंदिर पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम-सीता, लक्ष्मण व हनुमानजी का पंचामृत से अभिषेक; दक्षिण भारतीय वाद्य और मशालों ने मोहा मन

स्वतंत्रता दिवस पर रायगंज स्थित स्वामी नारायण मंदिर में भगवान राधाकृष्ण व स्वामी नारायण का विशेष श्रृंगार,दर्शन को उमड़े

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता व संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास के नेतृत्व व श्रृंगी ऋषि आश्रम

सुचना

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: श्रीसंतगोपाल मंडपम् में दक्षिणायन शैली से हो रहा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव

बमबम यादव

Fri, Jul 5, 2024

व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा कर रहे कोसलेस सदन पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानुजाचार्य वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर महाराज

अयोध्या। कांचीमठ प्रतिवादि भयंकर मूलगादी स्वामी श्रीनिवासाचार्य महाराज की अध्यक्षता में अयोध्याधाम के नवनिर्मित श्रीसंतगोपाल मंडपम् में चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों एवं वेदमंत्रों से पूरा मंदिर प्रांगण गुंजायमान है। अवसर श्रीरंगराघव भगवान के प्राणप्रतिष्ठा महा महोत्सव का है। महोत्सव के उपलक्ष्य में नित्य शालिग्राम भगवान का सवा लाख अर्चन, 111 ब्राह्मण आचार्यों द्वारा श्रीमद्भागवत का मूल पारायण किया जा रहा है। गुरूवार को अग्नि प्रतिष्ठा, हवन-पूजन पाठ, धान्याधिवास का कार्यक्रम हुआ। व्यासपीठ पर विराजमान राष्ट्रीय कथाव्यास कोसलेस सदन पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानुजाचार्य वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर महाराज ने कहह्या पांच वर्षीय अबोध बालक ध्रुव की तरह अविरल भक्ति जब साधक के मन में व्याप्त हो जाती है। तब वह साधक भगवान को प्राप्त करता है। जन्म से ही पाप कर्म में लीन अजामिल प्रभु भक्ति में लीन संत जनों की कृपा पाकर भगवान के धाम को प्राप्त हुआ। बिना गुरु कृपा व संतों की सन्निधि के भक्ति मार्ग की प्राप्ती संभव नही है। हिरण्यकश्यप ने घोर तप कर ब्रह्मा से वरदान भी प्राप्त किया। यदि साधक भक्तों के मन में अभिमान व्याप्त हो जाता है। तो वह साधक भक्त भी भक्ति मार्ग से अलग होकर पाप कर्म में लीन हो जाता है। हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद मां के गर्भ में ही देवर्षि नारद से नवधा भक्ति का श्रवण करने के प्रभाव से अनेकों यातनाएं पिता से पाकर भी भक्ति मार्ग को नहीं छोड़ता है। प्रहलाद की दृढ़ भक्ति को देखकर भगवान उसे बचाने नरसिंह रूप धारण कर दुष्ट हिरण्यकश्यप का वध करते हैं। सुखदेव महाराज से कथा का श्रवण कर राजेंद्र परीक्षित का विश्वास और भी दृढ़ हो गया। अंत में कथा का प्रसाद वितरित हुआ। नवनिर्मित श्रीसंतगोपाल मंडपम् के स्वामी कूरेशाचार्य महाराज व उघोगपति आईपी सिंह ने व्यासपीठ की भव्य आरती उतारी। उन्होंने आए हुए संतों का अंगवस्त्र ओढ़ाकर स्वागत-सत्कार किया। सभी भक्तजन कथा का श्रवण कर आनंदित हो रहे हैं।

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