Sunday 23rd of August 2026

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हनुमानगढ़ी के पूर्व गद्दीनशीन श्रीमहंत दीनबंधु दास के नाती शिष्य पुजारी राजन दास ने संतों का किया सम्मान

गुरुदेव की पुण्यतिथि केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात करने का भी अवसर -महंत

जानकी घाट  स्थित चारुशिला मंदिर में संतों ने की बैठक, अध्यक्षता चारुशिला मंदिर पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम-सीता, लक्ष्मण व हनुमानजी का पंचामृत से अभिषेक; दक्षिण भारतीय वाद्य और मशालों ने मोहा मन

स्वतंत्रता दिवस पर रायगंज स्थित स्वामी नारायण मंदिर में भगवान राधाकृष्ण व स्वामी नारायण का विशेष श्रृंगार,दर्शन को उमड़े

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: पर्यावरण को संरक्षित करना भी भगवान श्री सीताराम के पद चिन्हों पर चलना होगा: रामदिनेशाचार्य

बमबम यादव

Mon, Jan 22, 2024

हरिधाम गोपाल पीठ में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का प्राण प्रतिष्ठा हुआ, अतिथियों का हुआ अभिनन्दन

अयोध्या।राम मंदिर में भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा होने के साथ ही पूरे अयोध्या में जश्न का माहौल चारों तरह हुआ। हर कोई राममय हो गये। उसी के साथ हरिधाम गोपाल पीठ में भी भगवान शिव प्राण प्रतिष्ठित हुए। तो दूसरे सत्र में व्यासपीठ से राम कथा की अमृत वर्षा करते हुए जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि भगवान श्री राम का पूरा चरित्र मानव मात्र को संदेश देने के लिए हुआ था। भगवान का जन्म विवाह और वनवास तीनों में मानव जाति को एक सूत्र में ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त करके एक सूत्र में पिरोने का काम करती है। जगद्गुरु जी ने कहा कि भगवान श्री राम के विवाह के 12 वर्ष बीत जाने के बाद वनवास की लीला प्रारंभ हुई उस समय प्रभु की आयु 27 वर्ष थी और 14 वर्ष के वनवास के पीछे भगवान के राजा अभिषेक की चल रही 14 दिन से तैयारी ही कारक बनी और मंथरा ने उन्हीं 14 दिन का हवाला देते हुए कैकेई से 14 वर्ष के वनवास मांगने की बात राजा दशरथ से कहीं। स्वामी जी ने समाज को संदेश देते हुए कहा कि भगवान श्री राम का वनवास समाज को एक सूत्र में बांधने के लिए हुआ था जहां श्री राम जी वनवासी गिरी वासी पर्वत वासी ऋषि-मुनियों को गले लगा कर के यह संदेश दिया कि ईश्वर की दृष्टि में कोई ऊंच-नीच छोटा बड़ा नहीं है सब एक समान हैं जहां प्रभु श्रीराम प्रयागराज में ब्रह्म ऋषि भारद्वाज पर कृपा करते हैं तो दूसरी ओर उल्टा नाम जपत जग जाना बाल्मीकि भए ब्रह्म समाना। बाल्मीकि पर भी कृपा करते है। श्री आचार्य जी ने कहा हमारे आराध्य प्रभु श्री राम केवट के राजा को गले लगाते हैं तो केवट जैसे छोटी जाति को भी पैर धोने का मौका देते है। श्रीराम के पैरों को पखारनेका मौका केवल 2 लोगों को प्राप्त हुआ जिसमें एक राजा जनक और दूसरा वह केवट जो प्रभु को मां गंगा से पार उतारता है। व्यास जी ने कहा कि वन में रहकर के प्रभु श्री राम माता जानकी पर्यावरण को संरक्षण करने का भी बहुत बड़ा बीड़ा उठाया था। अब हमें भी उनके पद चिन्हों पर चलकर पर्यावरण को संरक्षित करना चाहिए। यजमान नरेश गर्ग,कुसुमलता गर्ग ने व्यासपीठ की आरती उतारी। कथा का संचालन आचार्य रमेश दास शास्त्री व व्यवस्था गौरव दास कर रहें। आज की कथा में कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह के अयोध्या प्रभारी महेंद्र त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।

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