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: अशर्फी भवन मंदिर में हो रही रामकथा अमृत वर्षा

बमबम यादव

Wed, Aug 23, 2023

भरत और राम जी के जैसा भ्रातृत्व प्रेम इस घोर कलयुग में हो जाए तो इस कलयुग में भी रामराज्य आ जाएगा: रामानुजाचार्य

अयोध्या। रामनगरी के अशर्फी भवन मंदिर में इन दिनों श्रीराम कथा की अमृत वर्षा हो रही है। श्री खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति द्वारा आयोजित श्री राम कथा के पंचम दिवस में जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज श्री राम  कथा का विस्तार करते हुए  कहां कि भगवान श्री राम के वन जाने के बाद सभी अयोध्या वासियों की स्थिति दयनीय हो गई। सभी अयोध्यावासी प्रभु राम के वियोग में रुदन करने लगे। श्री राम केवट की नाव में बैठकर नदी पार की और वन की ओर प्रस्थान किए सुमंत जी अयोध्या वापस लौट कर आते हैं। महाराज दशरथ को सभी समाचार बताते हैं महाराज दशरथ पुत्र वियोग में रुदन करने लगते हैं। जिस अयोध्या में प्रतिदिन उत्सव का आयोजन होता था आज वही अयोध्या भगवान राम एवं मा सीता जी के जाने से श्री रुग्ण हो गई ना कहीं कोई उत्सव मनाया जा रहा है ना ही पकवान बनाए जा रहे हैं। सभी अयोध्या वासियों के नेत्रों से अश्रु धारा प्रवाहित हो रही है। रामानुजाचार्य जी ने कहा कि प्राणों से प्रिय पुत्र राम के वियोग में महाराज दशरथ तड़प ते हुए कौशल्या जी को बताते हैं देवी मेरे पूर्व पाप के कारण मेरा अंतिम समय सन्निकट है। प्राणों से प्रिय राम के बिना मैं एक क्षण भी अब जीवित नहीं रह सकता। मां कौशल्या रुदन करती है मां कौशल्या के देखते देखते दशरथ जी का परम पद हो गया अयोध्या पर आए इस असहनीय संकट को देखकर गुरु वशिष्ठ जी ने भरत को अयोध्या बुलाया है। भरत जी जैसे ही अयोध्या  आए इस असहनीय संकट को देख कर के दुखित हो गए अपनी मां के महल में गए केकई के चरणों में प्रणाम किया। मां केकई की  स्वार्थपूर्ण वाणी को सुनकर भरत जी दुखी हो जाते हैं और अपने को धिक्कारने लगते हैं भरत जी कहते हैं यदि मेरा जन्म ना होता तो पिताजी के प्राणों से प्रिय भाई राम को वन नहीं जाना पड़ता और ना पिताजी के प्राण जाते मैं भरत अभागा हूं जो इस अभागिनी केकई के पुत्र के रुप में जन्म लिया हूं। गुरू वशिष्ठ जी भरत को समझाते हैं और अयोध्या के राजसिंहासन पर बैठने की आज्ञा देते हैं। भरत जी रुदन करने लगते हैं और प्राणों से प्रिय भाई श्री राम को मनाने के लिए भरत जी वन में जाते हैं भाई भरत और राम जी के जैसा भ्रातृत्व प्रेम इस घोर कलयुग में हो जाए तो इस कलयुग में भी रामराज्य आ जाएगा।

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