Saturday 22nd of August 2026

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हनुमानगढ़ी के पूर्व गद्दीनशीन श्रीमहंत दीनबंधु दास के नाती शिष्य पुजारी राजन दास ने संतों का किया सम्मान

गुरुदेव की पुण्यतिथि केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात करने का भी अवसर -महंत

जानकी घाट  स्थित चारुशिला मंदिर में संतों ने की बैठक, अध्यक्षता चारुशिला मंदिर पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम-सीता, लक्ष्मण व हनुमानजी का पंचामृत से अभिषेक; दक्षिण भारतीय वाद्य और मशालों ने मोहा मन

स्वतंत्रता दिवस पर रायगंज स्थित स्वामी नारायण मंदिर में भगवान राधाकृष्ण व स्वामी नारायण का विशेष श्रृंगार,दर्शन को उमड़े

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: संत हमेशा परोपकार के लिए जीवन जीते हैं और परोपकार के लिए कार्य करते हैं: देवमुरारी

बमबम यादव

Fri, Feb 16, 2024

कहा, यज्ञ सम्राट कनक बिहारी महाराज का संकल्प दृढ़ व व्यक्तित्व कृतित्व अनोखा था

रघुवंशी समाज द्धारा ऐतिहासिक 2121 कुंडली श्री राम महायज्ञ महोत्सव अपने चरम पर

अयोध्या। रामनगरी में रघुवंशी समाज द्धारा ऐतिहासिक 2121 कुंडली श्री राम महायज्ञ महोत्सव अपने चरम पर है। हजारों रामभक्त राममंत्र से यज्ञ कुंड में आहुतियां डाल रहें है। भगवान श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के उपलक्ष में हो रहे दिव्य अनुष्ठान में प्रतिदिन महायज्ञ के साथ रामकथा की अमृत वर्षा हो रही है। कथा मंच पर आचार्य देवमुरारी बापू ने साकेत वासी कनक बिहारी जी यज्ञ सम्राट जी को मंच से श्रद्धांजलि के रूप में उनके कृतित्व उनके और उनके दृढ़ संकल्प को बताया, कि जो मध्य प्रदेश के समस्त रघुवंशी समाज को जोड़कर अयोध्या में ऐतिहासिक यज्ञ करने का कार्य किए हैं। उन्हीं के शिष्य यज्ञ करता श्याम दास लखन दास छोटे बाबा परिश्रम कार्य यज्ञ को सफल बनाने में लगे हुए हैं। आचार्य जी ने कहा कि यदि संत दृड संकल्प ले तो कोई भी कार्य ऐसा नहीं है जो संभव हो, योगी का संकल्प संसार में सबसे प्रसिद्ध है, संत हमेशा परोपकार के लिए जीवन जीते हैं और परोपकार के लिए कार्य करते हैं। संतों की ऐसी मान्यता है कि 18 पुराण और व्यास जी का वचन है संत की मन वचन कर्म से परोपकार के लिए कार्य करते हैं। पृथ्वी पर पांच परोपकारी माने जाते हैं।संत बिटप सरिता गिरी धरनी, पर हितलाग सबन्ह करनी।। चौपाई रामचरितमानस की उदाहरण देते हुए विश्वामित्र जी का भी दृड संकल्प सुनाया जिन विश्वामित्र जी ने विश्व की मित्र की भावना को रखते हुए यज्ञ में सुवाहु मारीच जब परेशान करने लगे तो भगवान श्री राम लक्ष्मण को बक्सर अपने आश्रम पर ले आए आताताइयों को दंडित कराया और यज्ञ को संपन्न कराया। रामकथा की महिमा बताते हुए देव मुरारी जी कहते है कि संत केवल यज्ञ करते ही नहीं है दूसरे के यज्ञ को भी संपन्न करते हैं रामचरितमानस में छह प्रकार के यज्ञ का वर्णन किया गया है जिसमें तीन यज्ञ पूरे हुए हैं और तीन यज्ञ पूरे नहीं हुई, क्योंकि उन यज्ञ की भावनाएं और हवन सामग्री दूषित थी रावण का मेघनाथ का और दक्ष का यज्ञ सफल नहीं हुआ यज्ञ से सतयुग त्रेता युग, द्वापर और कलयुग तक की महिमा बताई कि यदि सच्चे मन से यज्ञ में आहुती दी जाए तो सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं। इसी का एक उदाहरण है इसी अयोध्या के पास मखौड़ा नाम से एक यज्ञ को जाना जाता है जहां वशिष्ठ जी महाराज ने पवन यज्ञ कराया और पृथ्वी का उद्धार करने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का उसे यज्ञ से जन्म हुआ जिसको पुत्रेष्टि यज्ञ के नाम से जानते हैं। यज्ञ की महिमा समस्त श्रोताओं और यजमानों को सुनाई तो यजमान लोग भाव विभोर हुए और दृड संकल्प लिया कि जब कभी ऐसा मौका मिलेगा तो यज्ञ और सत्संग में भाग जरूर लेंगे। कथा में प्रमुख यजमान मुनिराज पटेल, मंच संचालक रामनरेश, देवेंद्र सिंह, जीवन सिंह, निरंजन सिंह, दान सिंह ,चक्रपाल सिंह, कपिल रघुवंशी, वीर सिंह, घनश्याम सिंह आदि मौजूद रहे।

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