Thursday 21st of May 2026

ब्रेकिंग

रिश्तों और निवेश को लेकर उठे कई सवाल कारोबारी तनाव, साझेदारी विवाद और मानसिक दबाव की चर्चाओं के बीच निष्पक्ष जांच की

ज्येष्ठ के दूसरे मंगलवार पर विशाल भंडारे का आयोजन, हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

आईएमए की आड़ में बदनाम अस्पताल संचालक ने ओढ़ी ईमानदारी की चादर, सोशल मीडिया से पोस्ट गायब होते ही तेज हुई चर्चाएं

हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर भक्तों की सेवा में जुटे महंत संजय दास ने ORS व जूस का वितरण; श्रद्धा और भक्ति से सराबोर दिखी

बंगाल ने पहली बार खुलकर ली सांस, श्रेय अमित शाह को: बृजभूषण शरण सिंह

सुचना

Welcome to the DNA Live, for Advertisement call +91-9838302000

: श्री स्वामी करुणा सिंधु जी महाराज अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत थे: रसिक पीठाधीश्वर

बमबम यादव

Sun, Feb 18, 2024

रसिक उपासना का केंद्र जानकी घाट बड़ा स्थान के संस्थापक  स्वामी करुणा सिंधु महाराज के 49 वीं पुण्यतिथि पर संतों ने किया नमन

अयोध्या। धर्म नगरी अयोध्या भगवान राम की जन्म स्थली के रूप में जानी जाती है. यह अनेक रहस्यों और संस्कृतियों से भरा हैं, हर रहस्य और संस्कृति का एक ही आधार राम का प्रेम है। यदि श्रृंगार की बात होती है तो भगवान विष्णु के ही दूसरे अवतार कृष्ण का नाम पहले लिया जाता है। रासलीला, गोपलीला, राधा प्रेम जैसी कई कथाएं कृष्ण से सम्बन्धित हैं। भारत देश में एक संप्रदाय ऐसा भी है जो श्रीराम के लिए भी ऐसा ही प्रेम रखता है, यानी उन्हें अपना स्वामी मानता है, खुद को उनकी प्रेमिका। दुनिया इन्हें राम रसिक के नाम से जानती है. इनकी उपासना के कुछ अलग ही पद्धति होती है।

रसिक उपासना की मूलपीठ के संस्थापक आचार्य पूज्य श्री स्वामी करुणा सिंधु जी महाराज का आज 49वां पुण्यतिथि बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। संस्थापक आचार्य स्वामी करुणा सिंधु जी महाराज काे संताें ने श्रद्धापूर्वक याद किया। माैका था उनके 49 वें पुण्यतिथि महाेत्सव का। इस अवसर पर शनिवार को मंदिर प्रांगण में श्रद्धांजलि सभा का आयाेजन किया गया जिसमें रामनगरी के विशिष्ट संत-महंत और धर्माचार्याें ने पूर्वाचार्य की प्रतिमा पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। संताें ने संस्थापक आचार्य के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। जानकी घाट बड़ा स्थान के वर्तमान रसिक पीठाधीश्वर जन्मेजय शरण महाराज ने कहा कि उनके गुरूदेव अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत थे। उनकी गणना सिद्ध संताें में हाेती रही है। उनका व्यक्तित्व बड़ा ही उदार था। रामनगरी के सभी संत-महंत उनका आदरपूर्वक सम्मान करते थे। अपने जीवनकाल में उन्होंने आश्रम का सर्वांगीण विकास किया। जीवन पर्यंत मठ के उत्तराेत्तर समृद्धि में लगे रहे। पूज्य गुरुदेव भगवान जो ने मानस की प्रथम टीका किया था। आज उन्हीं की देन है कि आश्रम अयाेघ्यानगरी के प्रमुखतम पीठाें में से एक है। जहां गाै, संत, विद्यार्थी व आगंतुक सेवा सुचार रूप से चल रही है। इस माैके पर दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के बिंदुगद्यायाचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज,जगद्गुरु रामस्वरुपाचार्य, बड़ाभक्तमाल बड़े महंत कौशल किशोर दास,.महंत अवधेश दास, बड़े हनुमान के छविराम दास, नागा रामलखन दास व तीर्थ पुरोहित अध्यक्ष राजेश महराज, नागा सूरज दास, संतोष मिश्रा आदि संत-महंत व भक्तगण उपस्थित रहे।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें