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: हमारे व्यक्तित्व में जो भी श्रेष्ठता है वह परमात्मा का ही अनुग्रह है: पुंडरीक गोस्वामी

बमबम यादव

Tue, Jan 30, 2024

कहा- भय, कुंठा, तनाव एवं असुरक्षा के भाव मनुष्य मन की दुर्बलताएँ हैं

मृत वर्षा श्री मन्माधव गौड़ेश्वर वैष्णव आचार्य पुण्डरीक गोस्वामी जी के साथ जगद्गुरु माध्वाचार्य जी महाराज

उदासीन संगत ऋषि आश्रम में बह रही श्रीमद् भागवत कथा की रसधार,व्यासपीठ से कथा का रसास्वादन करा रहें आचार्य पुंडरीक 

श्रीमहंत डा भरत दास जी बैनर का दिखाते साथ में आचार्य श्री के शिष्य

अयोध्या। उदासीन संगत ऋषि आश्रम पर इन दिनों श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव की अमृत वर्षा हो रही है। जिसमें व्यासपीठ से भागवत कथा की अमृत वर्षा श्री मन्माधव गौड़ेश्वर वैष्णव आचार्य पुण्डरीक गोस्वामी जी कर रहे है। यह महोत्सव भगवान रामलला के भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के पावन अवसर पर हो रहा है। कथा के छटवें दिवस पर कथा में सुदामा व परमात्मा श्री कृष्ण की मित्रता की कथा सुनाते हुए आचार्य श्री ने कहा कि यदि मित्रता करना सीखना है तो हमें सुदामा की त्याग और परमात्मा के समर्पण की कथा अवश्य सुनना चाहिए। मित्रता निस्वार्थ व निष्काम भाव से करना चाहिए। मित्रता में जहां स्वार्थ आता है वहां मित्रता मित्रता नहीं रह जाती। बल्कि एक स्वार्थ से परिपूर्ण संबंध बन करके रह जाता है। पुंडरीक गोस्वामी जी ने बताया की कथा में बताते हुये कहा हमारे व्यक्तित्व में जो भी श्रेष्ठता है वह परमात्मा का ही अनुग्रह है। इस दृष्टि से हमें प्रत्येक कार्य को कुशलतापूर्ण ढंग से संपादित करना चाहिए। जीवन का प्रत्येक सूर्योदय हमें हमारे लक्ष्य और संकल्पनाओं की संपूर्ति के नवीन अवसर प्रदान करता है, इसलिए नव सृजन, नवोन्मेषी विचार एवं अवसरों का स्वागत करें। भय, कुंठा, तनाव एवं असुरक्षा के भाव मनुष्य मन की दुर्बलताएँ हैं। इनसे अप्रभावी रहकर ही जीवन की श्रेष्ठ संभावनाओं को साकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मित्रता में त्याग और समर्पण अत्यधिक आवश्यक है एक तरफ जहां सुदामा अत्यंत गरीब होते हुए भी परमात्मा श्री कृष्ण से स्वार्थ नहीं रखता है जबकि सुदामा परमात्मा श्री कृष्ण का बालसखा है। वहीं दूसरी ओर परमात्मा श्री कृष्ण जब सुदामा जी को अपने पास आया हुआ देखते हैं तो मित्र को किसी भी प्रकार की ग्लानि न हो यह ध्यान रखते हुए सुदामा के दिए हुए चावल अत्यंत प्रेम के साथ खाते हैं और अपना सर्वस्व सुदामा के लिए समर्पित कर देते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि जहां पर त्याग और समर्पण की भावना है मित्रता वही है और मित्रता का असली स्वरूप भी यही है। महोत्सव की अध्यक्षता उदासीन आश्रम के पीठाधीश्वर श्रीमहंत डा भरत दास जी महाराज कर रहें। व्यासपीठ का पूजन बड़े दिनेश जी विश्व हिंदू परिषद,डॉ महेंद्र सिंह, पूर्व कैबिनेट मंत्री, अयोध्या के उघोगपति समाजसेवी आईपी सिंह, अमेरिका से आये डा राम गर्ग, मिनी गर्ग ने किया कार्यक्रम का संचालन आईपीएस एस एन सिंह कर रहें।कार्यक्रम में आचार्य पुण्डरीक गोस्वामी जी से जुडे शिष्य परिकर मौजूद रहे।

विहिप के बड़े दिनेश जी व्यासपीठ का पूजन करते

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