: पूर्व राष्ट्रपति ने किये भगवान ऋषभदेव के दर्शन
Sun, May 19, 2024
श्री ज्ञानमती माताजी से आशीर्वाद प्राप्त करके किया आध्यात्मिक चर्चा
अयोध्या। भगवान श्री ऋषभदेव दिगम्बर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, रायगंज, अयोध्या में भगवान ऋषभदेव के दर्शन एवं पूजन करने के पश्चात् रत्नवृष्टि की एवं जैन संत प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के आचार्य पदारोहण शताब्दी वर्ष के अन्तर्गत रथ का प्रवर्तन शुभारंभ पवित्र भूमि अयोध्या से हरी झण्डी दिखाकर किया। गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माताजी के समक्ष कोविन्द जी ने आध्यात्मिक चर्चा करते हुए कहा कि अयोध्या पावन एवं पवित्र भूमि है। यहाँ पर आने वाला हर व्यक्ति आत्मिक अनुभूति प्राप्त करता है। ज्ञान और ध्यान की यह पवित्र धरती आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत है। जहाँ पर भगवान ऋषभदेव सहित पाँच जैन तीर्थंकर भगवन्तों ने जन्म लिया एवं प्रभु राम जहाँ के कण-कण के समाए हैं। देश और दुनिया के कोने-कोने से यहाँ पर हर व्यक्ति राम भक्त के रूप में पहुँच रहा है। जहाँ जैन साध्वी ज्ञानमती माताजी का प्रवास चल रहा है। माताजी ने चर्चा के अन्तर्गत अहिंसा एवं शाकाहार पर बल देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में शाकाहार, सदाचार, व्यसन मुक्त, स्वयं एवं समाज के निर्माण में सहयोग देना चाहिए।
समिति के मंत्री विजय कुमा ने बताया कि रामनाथ जी कोविन्द का सम्मान समिति के पीठाधीश एवं अध्यक्ष कर्मयोगी स्वस्ति रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने प्रतीक चिन्ह देकर किया एवं प्रशस्ति पत्र वैलाशचंद जैन सर्राफ-लखनऊ, विजय कुमार जैन, डॉ. जीवन प्रकाश जैन, आदीश कुमार जैन ने प्रदान किया। पूज्य गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माताजी ने जैन ग्रंथ प्रदान किया एवं आर्यिका चंदनामती माताजी ने श्रीमती सविता कोविन्द जी को एवं स्वाति कोविन्द को जप माला प्रदान की एवं समिति के द्वारा आये हुए अतिथियों का भाव-भीना सम्मान किया गया, जिसमें राष्ट्रपति भवन के पूर्व एवं वर्तमान उच्च स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे एवं माननीय रामनाथ जी कोविन्द जी के मित्र तथा सगे संंबंधियों के साथ में अयोध्या दर्शन एवं भ्रमण का कार्यक्रम सम्पन्न किया। इस यात्रा के मध्य पूर्व राष्ट्रपति जी की माताजी के चर्चा के मध्य माताजी ने कहा कि दिल्ली से अयोध्या एवं अन्य स्थानों से अयोध्या आने वाली ट्रेनों में मांसाहार बंद होना चाहिए क्योंकि तीर्थयात्रा पर आने वाले यात्रियों के लिए सात्विक भोजन के अलावा अन्य तामसिक एवं मांसाहारी भोजन नहीं देना चाहिए। इस पर सरकार को विचार करना चाहिए। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों के साथ एक ग्रुफ चित्र भी कराया गया।
ज्ञातव्य है कि पूर्व राष्ट्रपति दिनाँक 17 मई को अयोध्या पधारे थे तथा रात्रि विश्राम दिगम्बर जैन मंदिर बड़ी मूर्ति, रायगंज गेस्ट हाउस में किया। 18 मई को प्रात:काल सर्वप्रथम भगवान श्री राम मंदिर, कनक भवन एवं दशरथ महल आदि का भ्रमण करते हुए जैन मंदिर वापस पहुँचे। एवं मध्यान्ह में राजधानी दिल्ली के लिए वंदे भारत ट्रेन से प्रस्थान किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से अमरचंद जैन, ऋषभ जैन-तहसील फतेहपुर, मनोज जैन, पंकज जैन, योगेश जैन, जितेन्द्र जैन, अनिल जैन, अतुल जैन, मुकुल जैन, आदीश जैन, शैंकी जैन आदि महानुभाव उपस्थित थे।
: राम के सद्गुणों का आदर्श प्रस्तुत करना वाल्मीकि रामायण का उद्देश्य: राम प्रसाद
Fri, May 17, 2024
हनुमान बाग में बह रही रामकथा की रसधार,महोत्सव का विश्राम शनिवार को
महंत जगदीश दास के अध्यक्षता में हो रहा महोत्सव, चहुंओर उत्सव का माहौल
अयोध्या। राम के सद्गुणों का उच्चतम आदर्श समाज के सम्मुख प्रस्तुत करना रामकथा का प्रमुख उद्देश्य है। एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, भ्राता एवं आदर्श राजा एक वचन, एक पत्नी, एक बाण जैसे व्रतों का निष्ठापूर्वक पालन करने वाले राम का चरित्र उकेरकर अहिंसा, दया, अध्ययन, सुस्वभाव, इंद्रिय दमन, मनोनिग्रह जैसे षट्गुणों से युक्त आदर्श चरित्र की स्थापना रामकथा का मुख्य प्रयोजन है। उक्त बातें राम सनेही संप्रदाय से बड़ा रामद्वारा सूरसागर जोधपुर (राजस्थान) के गादीपति संत डॉ. श्री राम प्रसाद जी महाराज ने हनुमान बाग मंदिर में आयोजित राम कथा के सातवें दिवस में कही। उन्होंने कहा कि राम परिवार के वैचारिक, भाषिक एवं क्रियात्मक पराक्रम का वर्णन करना ही वाल्मीकि रामायण का प्रधान हेतु रहा है। स्वामीजी ने कहा कि रामचरित्र के महासागर में डूबे, राम जल से आकंठ भीगे, करुणा-प्रेम, भक्ति जैसे सकारात्मक रसों से आप्लावित वाल्मीकि तमसा नदी के तट पर स्नान की इच्छा से आए। उनके हृदय में रामभक्ति का समुद्र लहरा रहा था। सारी सृष्टि ही मानो राममय हो गई थी। राम के दैविक गुण, मानवीय वृत्तियाँ, दया, उदारता, अहिंसा, अक्रोध, परदुःख, कातरता अभी भी उनके मन-मस्तिष्क पर छाई हुई थी कि शांत रस का सामना वीभत्स एवं हिंसा वृत्ति से हुआ। शीतल भूमि पर एकाएक दग्धता का अनुभव हुआ, जब सामने ही एक बहेलिए ने हिंसक भावों को प्रकट करते हुए निरपराध, मूक, प्रेमालाप करते हुये क्रौंच पक्षी को स्वार्थवश बाण से आहत कर दिया। अभी-अभी तो नारद से राम बाण, राम के शर संधान की कथा सुनी थी कि राम ने शौर्य, पराक्रम, दयालुता, उदारता आदि भावों का संरक्षण करते हुए दुष्टों के नाश एवं सज्जनों के परित्राण हेतु शस्त्र उठाए थे। महोत्सव की अध्यक्षता हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज कर रहें है।कथा में श्रृंगार कुंज के महंत हरिभजन दास, हनुमानगढ़ी के संत मामा दास, लवकुश दास सहित बड़ी संख्या में रामनगरी के संत धर्माचार्यो ने शिरकत कर अपने अपने विचारों से श्रीरामकथा में भगवान राम के चरित्र का गुणगान किया। आये हुए संतो का विशेष अभिनन्दन हनुमान बाग के सुनील दास व रोहित शास्त्री ने किया। कथा में सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।
: श्री जानकी महल ट्रस्ट में श्रीराम की चिरसंगिनी का मना भव्य प्राकट्योत्सव
Fri, May 17, 2024
माता जानकी का वैदिक मंत्रोच्चारण संग पंचामृत एवं सुगंधित औषधियों से हुआ अभिषेक-पूजन
अयोध्या। आस्था सच्ची हो, तो पत्थर भी पिघल सकता है। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ श्री जानकी महल ट्रस्ट में मां जानकी का प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया गया।जानकी महल किशोरी जी का महल है यहा पर माता सीता जी का बेटी के रुप सेवा सत्कार पूजा होती है। सीता जी व भगवान राम जी को दुल्हा सरकार मान अष्टयाम सेवा होती है। गुरुवार को जानकी जन्मोत्सव के परिप्रेक्ष्य में जब रामनगरी श्रीराम की चिरसंगिनी को भक्ति में डूब रही। प्राकट्योत्सव पर सर्वप्रथम मंदिर के गर्भगृह में विराजमान माता जानकी का सुबह वैदिक मंत्रोच्चारण संग पंचामृत एवं सुगंधित औषधियों से अभिषेक-पूजन हुआ। तदुपरांत उन्हें नूतन वस्त्र धारण कराया गया। दूसरी बेला में 12 बजे घंटे, घड़यालों और शंख की करतलध्वनि बीच मां जानकी का प्राकट्य हुआ और भव्य आरती उतारी गई। अंत में मां जानकी के प्राकट्योत्सव का प्रसाद वितरण किया गया। माता के जन्मोत्सव में सम्मिलित होकर भक्तगणों ने अपना जीवन धन्य बनाया। श्री जानकी महल ट्रस्ट के ट्रस्टी समाजसेवी आदित्य सुल्तानिया ने बताया कि प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी महल में वैशाख शुक्ल नवमी तिथि पर मां जानकी का प्राकट्योत्सव हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। जिसे हम सब जानकी नवमी के नाम से भी जानते हैं। जानकी नवमी पर सुबह से लेकर देररात्रि तक उत्सव का सिलसिला चलता रहा। रामनगरी के कलाकारों ने अपने गायन-वादन से उत्सव की महफिल को सजाया। उन्होंने कहा कि हमारे यहां का मुख्य उत्सव जानकी नवमी, राम नवमी व राम विवाहोत्सव है।उन्होंने कहा कि किशोरी जी के छ्ठोत्सव पर 56 भोग लगेगा। इस अवसर पर पूरा महल उत्सव से पुलकित रहा। भक्तजनों ने जानकी नवमी पर मां सीता का दर्शन कर अपना जीवन कृतार्थ किया।