: महालक्ष्मी मंत्र से हनुमान बाग में हो रहा महायज्ञ, पड़ रही आहुतियां
Sun, Nov 12, 2023
माता सीता भक्ति और शक्ति का रूप है और शिव धनुष अंहकार का प्रतीक: शक्तिपीठाधीश्वर
अयोध्या। भगवान श्री राम की नगरी में पहली बार दीपावली के अवसर पर महालक्ष्मी का हो रहा है कुमकुम पूजा अर्चना और साथ में महालक्ष्मी मंत्र से प्रतिदिन हवन कुंड में डाली जा रही हैं आहुतियां जो 15 दिनों में वैदिक आचार्य द्वारा सम्पादित होगा।
दक्षिण भारत की सुरम्य पहाड़ियों के बीच बसा हुआ नगर कृष्णगिरी कर्नाटक में स्थित पद्मावती शक्तिपीठ तीर्थधाम के पीठाधीश्वर वसंत विजय महाराज सानिध्य में वैदिक विद्वान कर रहे हैं पूजन। राम राज्याभिषेक कथा के छटवें दिवस शक्तिपीठ तीर्थधाम के पीठाधीश्वर वसंत विजय महाराज ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में नियम का होना अति आवश्यक है। जिनके जीवन का कोई नियम नही होता उनका जीवन उमर भर भटकता रहता है। जीवन के अच्छे कर्मों को यज्ञ कहा गया है। राम राज्याभिषेक कथा में संत साधक रसमयी आनंदमयी सागर में गोता लगा रहे है। कार्यक्रम में प्रतिदिन 10 वैदिक आचार्य हजारों मंत्र के जाप के महालक्ष्मी के महायज्ञ में आहुतियां डाल रहें है। कथा के छटवें दिवस श्री सीताराम विवाहोत्सव का बहुत ही सुंदर वर्णन करते हुए महाराज जी ने यज्ञ के महत्व को बताते हुए कहा कि जब जीवन में यज्ञ समाप्त को जाता है तो जीव का तेज और बल दोनो की समाप्त हो जाते हैं। राम विवाह के प्रसंग में उन्होंने बताया कि माता सीता भक्ति और शक्ति का रूप है और शिव धनुष अंहकार का प्रतीक है। कथा में भगवान श्रीराम के विवाह प्रसंग पर व्यास पीठ से मंगल गीत गाए गए। भगवान श्री राम सीता लक्ष्मण के स्वरूप की आरती उतारी गई। शक्तिपीठाधीश्वर जी ने कथा के मर्म का संदेश दिया कि जीवन में बिना त्याग तपस्या संतोष के किसी भी प्रकार का सुख और आनंद प्राप्त नही किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि संसार में गुरु तत्व ही इन सभी साधनों के दाता है। इस महोत्सव में हजारों भक्त व संता साधक मौजूद रहें।
: निष्काम भक्ति की पराकाष्ठा है प्रभु के प्रति केवट का प्रेम: बसंत विजय
Sat, Nov 11, 2023
महंत जगदीश दास महाराज की अध्यक्षता में बह रही राम राज्याभिषेक की कथा का रसधार, हनुमान बाग में छाया रामकथा का उल्लास
अयोध्या। श्रीराम चरणों की कृपा पाने वाले सरल सहज भक्तों की श्रेणी में प्रभु श्री राम के अत्यंत प्रिय भक्त जिनकी भक्ति में कुछ भी पाने की कामना नहीं है ऐसे भक्त की भक्ति से ही भगवान प्रसन्न होते हैं भक्त और भगवान एक दूसरे के पूरक हैं। भक्त से ही भक्ति का प्रचार प्रसार होते आया है इसीलिए कभी कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े यह उक्ति चरितार्थ होती है।राम राज्याभिषेक की कथा के पंचम दिवस श्री सिद्ध हनुमान बाग में अपार जन समूह को भगवान के भक्त का जीवंत उदाहरण देते हुए कर्नाटक के कृष्णा गिरि स्थित श्री पार्श्व पद्मावती शक्ति पीठ तीर्थ धाम के पीठाधीश्वर स्वामी वसंत विजय महाराज ने भक्त और भगवान के बीच के मर्म को सुनाया। कथा प्रसंग की विशद व्याख्या करते हुए पूज्य श्री ने केवट के पावन चरित्र को सुनाते हुए कहा कि वास्तव में सच्चा भक्त तो वही है जिसे भगवान से कुछ पाने की इच्छा न हो क्योंकि स्वार्थ सिद्ध करने के लिए की हुई भक्ति तो सौदा हो गया। निः स्वार्थ भक्ति कर भगवान को पाने का सहज साधन है ऐसे ही कुछ सत्कर्मों से पूरित केवट हुए। प्रभु श्रीसीताराम पिता के वचन को मान वनगमन करते हैं। मार्ग में चलते हुए गंगा पार उतरने के लिए केवट से नाव की याचना करते हैं। भगवान के वचन सुन केवट ने उनके मर्म को अन्तर्मन में सोच विचार कर कहा की चरणों की रज मिल जाए तो मै आपको गंगा पार उतार दूं। सौरभ जी ने राम केवट प्रसंग का बड़ा ही मार्मिक भजन सुनो रघुनाथ तुमको पार अब कैसे उतारूं मैं सुना अपार जन समूह को भावविभोर व अश्रुपूरित किया। भगवान ने केवट के प्रेम से भरे वचनों को सुन प्रसन्न हो चरण पखारने की स्वीकृति दी मानो प्रभु ने उसके सम्पूर्ण जीवन की भक्ति को धन्य कर दिया हो। बड़ी उत्सुकता से चरण रज पा कर मानो जगत की अनमोल सम्पदा पा ली हो। करकमल और चरणकमल पाने के अतिरिक्त केवट की कोई कामना नहीं रह गई।
भगवान की इच्छा में ही अपना कल्याण मानकर भक्ति मार्ग पर चलने से ही भगवान प्रसन्न होकर भक्त के आधीन हो जाते हैं।
प्रतिष्ठित पीठ हनुमान बाग में दीपावली के पावन अवसर पर श्रीराम राज्याभिषेक महाकथा एवं देवी पद्मावती की कुमकुम अर्चना महालक्ष्मी मंत्र का दिव्य भव्य अनुष्ठान अपने पूरे चरम पर है। इस महोत्सव की अध्यक्षता हनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज कर रहें है। व्यवस्था में सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री लगें है।
: दीपोत्सव के साथ हनुमान जयंती का छाया उल्लास
Sat, Nov 11, 2023
प्रसिद्ध पीठ हनुमान बाग का मुख्य उत्सव हनुमान जयंती पर जश्न का माहौल
पूरे हनुमान बाग में मंगल ध्वनि गूज रही, हर कोई भक्ति की रस में दिख रहा सराबोर, अन्नकूट महोत्सव के साथ उत्सव का होगा समापन
अयोध्या।दीपोत्सव की पावन बेला में रामनगरी में हनुमान जयंती का उल्लास छलकने लगा। प्रधानतम पीठ हनुमानगढ़ी समेत प्रसिद्ध पीठ हनुमान बाग का मुख्य उत्सव हनुमान जयंती का अनुष्ठान शुरु हो गया है। पूरे हनुमान बाग को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। अपने आराध्य के प्राकट्य उत्सव का आनंद लेने के लिए हनुमान बाग सेवा संस्थान कोई कोर कसर नही छोड़ना चाहता है। महंत जगदीश दास के सानिध्य में उत्सव में चार चांद लग जाता है। चारों तरह मंगल ध्वनि गूज रही है। हर कोई भक्ति की रस में सराबोर दिख रहा है। ये आनंद अन्नकूट महोत्सव तक चलेगा। व्यवस्था में कोई कोर कसर न रह जायें इसको लेकर हनुमान बाग के शिष्य परिकर दिन रात लगे हुए है। सुनील दास व रोहित शास्त्री कार्यक्रम की बागडोर अपने हाथ में ले रखें है। साधना शुचिता और वैराग्य के अमृतपुंज भगवान महाबीर की आध्यात्मिक स्थली श्रीअयोध्याजी के मर्यादित आश्रमों में सिद्धपीठ श्रीहनुमानबाग गरीबों मजलूमों की सेवा कर अपने परिकल्पना को परिलक्षित कर रहा है।
हनुमान बाग रामनगरी के प्रतिष्ठित मंदिरों में शुमार है। वर्तमान परम्परावाहक म. श्रीजगदीशदासजी महाराज उक्त विरासत को समेटे हुए गौसेवा सन्तसेवा एवं आश्रम संचालन से सम्पूर्ण विश्व में सनातन ध्वजा लहरा रहे हैं। भजनानन्दी सन्तो में महान्त श्री जयरामदासजी महाराज भगवान श्रीरामनाम का स्मरण करते हुए श्रीहनुमत् आराधना में अपने जीवन को समर्पित करते हुए महान्त श्रीरामगोपालदास जी महाराज को उत्तराधिकारी बनाते हुए इस साधना परम्परा को आगे बढ़ाया। ईश्वरीय शक्ति ही इनकी परमनिधि एवं श्रीराम एवं श्रीहनुमान का भजन ही इनकी आराधना एवं रामनाम परमनिधि को संजोते हुए समाज के हित के लिए बिखेरते रहे। भजनानन्दी सन्त श्री महान्त श्रीरामगोपालदास जी महाराज के परमकृपापात्र महान्त जगदीशदासजी महाराज इस परम्परा में एक अद्भुत प्रतिभा के परिचायक सिद्ध हुए। कहा जाता है कि प्रतिभा किसी का मोहताज नहीं होता सुगन्ध बिखरने वाला पुष्प सहज ही सनातन सभ्यता और प्रकृति की आध्यात्मिकता को स्वयंमेव समर्पित हो जाता है। परमार्थ परायण जीवन के निमित्त महाराज श्री ने भव्य कथामण्डप पूजागृह आवास गौशाला का निर्माण श्रीहनुमानबाग सेवा संस्थान के तत्त्वावधान में कराया। श्रीमहाराज जी के विनम्र स्वभाव एवं लोक कल्याणभद्र भावना को दृष्टिगत रखते हुए भारत ही नहीं वरन् विदेशों के हनुमत भक्त भी महाराज श्री के अनुयायी बनकर दरिद्रनारायण और अयोध्याधाम की सेवा करने लगे। महाराज श्री ने अयोध्या में संस्कृत के पठन-पाठन की महती आवश्यकता समझकर भोजन प्रसाद सहित छात्रावास एवं शिक्षण संस्थान का निर्माण कराया।