: रामनगरी में खुला रमीला कुटीर होटल,आधुनिक सुविधाओं से है लैस
Mon, Nov 21, 2022
रमीला कुटीर में तीर्थयात्रियों का स्वागत सत्कार अतिथि भाव से किया जाएगा:राजकुमार सिंह
अयोध्या। श्री राम नगरी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अयोध्या बायपास रामघाट हाल्ट के निकट रमीला कुटीर का उद्घाटन श्री राम वल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास, डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ मनोज दीक्षित और अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय ने किया। इस अवसर पर संकट मोचन हनुमान किला के पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास सहित दर्जनों संत महंत एवं राजनीतिक से जुड़े लोग उपस्थित रहे। रमीला कुटीर के ओनर राजकुमार सिंह ने बताया कि मैं प्रभु श्री राम की जन्म स्थली में लोगों की सेवा के लिए यह छोटी सी कुटिया बनाई है जिसमें अयोध्या में आने वाले सभी तीर्थयात्रियों का स्वागत सत्कार अतिथि भाव से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी से मेरा लगाव है और मंदिर निर्माण के साथ यह इच्छा जागृत हुई कि एक कार्यपालक के रूप में अयोध्या नगरी में लोगों की सेवा की जाए इसके लिए यह छोटी सी कुटिया बनवाई गई है जिसमें अयोध्या वासियों के साथ साथ अयोध्या में आने वाले सभी श्रद्धालु नागरिकों की सेवा हम करेंगे। अरुण सिंह सहित अन्य लोगों ने आए हुए अतिथियों का स्वागत सत्कार किया।
: विशुद्ध चित्त ही वसुदेव है और देवकी निष्काम भक्ति: जगद्गुरु
Mon, Nov 21, 2022
गहोई मंदिर में व्यासपीठ से श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा कर रहे जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य
अयोध्या। आध्यात्मिक योग मोक्ष का साधन है। मन ही हमारे बंधन और मोक्ष का कारण है। जब संत पुरुषों का संग होता है तो मन सतोगुण संयुक्त होकर भगवत चिंतन करता है जो ही मुक्तिका कारण भी बन जाता है।
उक्ताशय के उद्गार रामनगरी के गहोई मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत महोत्सव के तृतीय दिवस जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने भागवत कथा में कपिल भगवान व माता देवहूति प्रसंग का वर्णन करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब कर्म अथवा यज्ञ का उद्देश्य परमेश्वर के लिए होता है तो वह सफल होता है। कर्मों के उपभोक्ता तो वास्तव में ईश्वर ही है वही हमें कर्म फल प्रदान करते हैं। मनुष्य को अपने माता पिता, गुरु व अपने श्रेष्ठ का अपमान नहीं करना चाहिए। गुरु ज्ञान का दाता है, जो जीवन को परम लक्ष्य परमात्मा से मिलाता है। जगद्गुरू जी ने कहा कि मनुष्य का जीवन अद्भुत है। एक बार ही मिलता है। मनुष्य ने जीवन को रसिकता के साथ जीना चाहिए। जीवन के प्रत्येक क्षण को अमूल्य मानकर उसका महत्तम आनंद उठाना, जीवन को सार्थक बनाता है। आनंद ईश्वरस्वरुप होता है। इसलिए दुखों को ज्यादा देर अपने मन में संजोये नहीं रखना चाहिए। यह महोत्सव गहोई मंदिर के महंत रामलखन शरण जी महाराज के पावन सानिध्य में हो रहा है।
श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में श्रीकृष्ण नंद महोत्सव प्रसंग पर जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि विशुद्ध चित्त ही वसुदेव है और देवकी निष्काम भक्ति। इन दोनों के मिलन होने पर भगवान कृष्ण का जन्म होता है। जब बुद्धि ईश्वर का अनुभव करती है, तब संसार के सारे विषय बंधन टूट जाते है। जो भगवान को अपने मष्तक पर विराजमान करता है, उसके लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते है। कथा के शुभांरभ पर व्यासपीठ का पूजन यजमान रामअवतार सीपोला आशीष शुक्ला ने व्यासपीठ का पूजन किया। इस मौके पर गौरव दास, शिवेन्द्र दास सहित बड़ी संख्या में कथा प्रेमी मौजूद रहें।
: भगवान के चरित्र चिंतन से हमारे चरित्र का निर्माण होता है: देशपांडे
Mon, Nov 21, 2022
हनुमान बाग मंदिर में श्रीराम कथा की हो रही अमृत वर्षा
महंत जगदीश दास महाराज के सानिध्य में कथा का उल्लास अपने चरम पर
संसार के लोग व्यवहार को देखते हैं, लेकिन भगवान भाव को देखते हैं: महंत जगदीश दास
अयोध्या। भगवान श्रीराम का चरित्र दर्पण के समान है, जिसमें अपने आपको देख सकते है रामायण महाकाव्य के माध्यम से भगवान श्रीराम के मंगलमयी चरित्र का वर्णन करते समर्थ भक्त राघवेंद्र बुआ देशपांडे ने कहा कि भगवान अनंत हैं, उनका चरित्र अनंत है, उनकी लीला अनंत है। उन्होंने कहा कि फिर भी भगवान के उन अनंत चरित्रों में जितना चरित्र चिंतन हम कर लें, उससे हमारे चरित्र का निर्माण होता है। भगवान के चरित्र का चिंतन करने का उद्देश्य यही है कि हमारा चरित्र सुधर जाए। भगवान का चरित्र वो दर्पण है, जिस दर्पण में हम अपना सुधार कर लें। दर्पण कभी झूठ नहीं बोलता। दर्पण के सामने खड़े होकर हम गड़गड़ को सुधार करते हैं, उसी प्रकार भगवान श्रीराम का चरित्र ऐसा निर्मल दर्पण है, जिस दर्पण में हम अपने चरित्र को देखें कि हमारी क्या गलतियां हैं, रामजी ने क्या किया वो हम करें, या उन्होंने क्या नहीं किया वो हम ना करें, यह देखकर रामचरित्र के दर्पण में हम अपने जीवन का सुधार कर लें, यही कथा सुनने का फल है। अपने आपको हम पवित्र कर लेंगे। श्री देशपांडे जी ये कथा मराठी भाषा में सुना रहें। कथा श्रवण करने के लिए महराष्ट्र से सौकड़ों भक्त आये है। इसी कथा को हिंदी में अनुवाद करके हनुमान बाग के श्रीमहंत जगदीश दास महाराज लोगों को समझा रहें और कथा का माहत्म्य बता रहें। महंत जगदीश दास जी ने कहा कि संसार के लोग व्यवहार को देखते हैं, लेकिन भगवान भाव को देखते हैं। आपका भाव बहुत अच्छा हो, लेकिन व्यवहार में आप चूक गए तो संसार में आप सफल नहीं हो सकते।महोत्सव की व्यवस्था में हनुमान बाग के सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितिश शास्त्री गोलू शास्त्री आदि लगे है। आज कथा महोत्सव में श्रृंगार कुंज के महंत हरिभजन दास, हनुमानगढ़ी के गद्दी नशीन के शिष्य संत मामा दास, केशव गलान्डे, सरयू गलान्डे, विजय कुमार कुलकर्णी, विनाया कुलकर्णी,माधव वालिंम्बे,मधुर वालिंम्बे सहित बड़ी संख्या से ठाणे महाराष्ट्र से भक्त मौजूद रहें।