: श्री लालसाहब दरबार के पूर्वाचार्यों को संतों ने किया नमन
Tue, Nov 22, 2022
मंदिर में श्रद्धांजलि सभा व विशाल भंडारे का हुआ आयोजन, आये हुए अतिथियों का स्वागत महन्त रामनरेश शरण ने किया
अयोध्या। कनक भवन परिसर स्थित प्रसिद्ध पीठ श्री लालसाहब दरबार के पूर्वाचार्य महंत महंत जानकी जीवन शरण जी महराज की 24 वीं पुण्यतिथि पर मंहत श्रीरामकृपाल शरण जी महराज, मंहत श्री जानकी शरण जी महराज की द्वितीय पुण्यतिथि पर संतो महंतों ने श्रद्धांजलि अर्पित की और शिद्दत से याद किए। इस अवसर पर मन्दिर परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयाेजन हुआ, जिसमें अयाेध्यानगरी के सन्त-धर्माचार्याें ने साकेतवासी महन्ताें के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। साथ ही साथ उनके कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। इस माैके पर लालसाहब दरबार के वर्तमान महन्त रामनरेश शरण महराज ने कहा कि पूर्वाचार्य महन्ताें का रामनगरी में अपना एक विशिष्ट स्थान था। सभी लोग उनका आदरपूर्वक सम्मान करते रहे हैं। विद्वता में उनकाे महारथ हासिल था। वह भजनानंदी संत रहे, हमेशा भजन-साधना में तल्लीन रहा करते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में मन्दिर सर्वांगीण विकास किया। यहां पर गाै, सन्त, विद्यार्थी व आगन्तुकाें की सेवा प्रारम्भ से ही हाेते हुए चली आ रही। मैं अपने पूर्वाचार्याें की कही बाताें और बतलाए हुए मार्ग का बराबर अनुसरण कर रहा हूं।पुण्यतिथि पर विशाल भण्डारा प्रस्तावित रहा, जिसमें हजाराें की संख्या में सन्त-धर्माचार्याें व भक्तगणाें ने प्रसाद पाया और श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सन्त-धर्माचार्याें का श्रीं महराज जी ने स्वागत-सम्मान किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से वेद मन्दिर के महन्त रामनरेश दास, महन्त रामकुमार, महन्त उद्धव शरण, महन्त ज्ञानदास महाराज के शिष्य हेमन्त दास, नागा राम लखन दास,महन्त गिरीश दास, महन्त राजबहादुर शरण, श्रीरामाश्रम महन्त जयराम दास, महन्त रामेश्वर दास, राष्ट्रीय पहलवान केशव दास, महन्त सच्चिदानंद दास, महन्त उत्तम दास त्यागी, संत नारायण दास, संतदास आदि सन्त-महन्त व भक्तगण उपस्थित रहे।
: जिनके कर्म श्रेष्ट होते है वो संसार को सुंदर बनाते है: रामानन्दाचार्य
Tue, Nov 22, 2022
अयोध्या। भगवान श्री राम की जन्म स्थली अयोध्या के स्वर्गद्वार स्थित गहोई मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के अमृत वर्षा के चौथे दिन व्यासपीठ से जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य महाराज के सानिध्य में गहोई मंदिर में भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव बड़ी ही दिव्यता के साथ मनाया गया। व्यासपीठ से कथा कहते जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य महाराज ने कहा कि बिना भगवान श्री राम की मर्यादा के भगवान कृष्ण की कथा को मनुष्य आत्मसात नहीं कर सकता है। यदि भगवान श्री कृष्ण की कथा समुद्र है तो भगवान श्री राम की कथा समुद्र को पार करने के लिए राम की मर्यादा का सेतु जीवन में निश्चित ही बनाना पड़ेगा तब कृष्ण कथा रूपी समुद्र का हम पार पा सकते है। उन्होंने कहा कि एक मर्यादा के उत्कृष्ट मूर्तिमान स्वरूप भगवान श्रीराम दूसरे सृष्टि के मूर्तिमान स्वरूप भगवान श्री कृष्ण की एक वाणी जीवन के शाश्वत मूल्यों की स्थापना करती है तो दूसरे का चरित्र जीवन में निर्माण में भूमिका अदा करती है। भारतीय संस्कृति परंपरा और धर्म भगवान श्री कृष्ण और राम से ही अनुप्राणित है। हमारा राष्ट्र इन दोनों संस्कृतियों के संरक्षण में ही आज अपनी आध्यात्मिक वैभव की पराकाष्ठा को प्राप्त कर रहा है भगवान श्रीराम का जन्म जग मंगल , राष्ट्र रक्षा और धर्म की उपासना के लिए होता है। भगवान श्री राम की कथा कलयुग में अमृत के समान है उनके पद चिन्हों पर चलकर मनुष्य परम पद पा सकता है। आज की कथा में रंग महल के पीठाधीश्वर महंत रामशरण दास शामिल हुए। कथा के पूर्व में यजमान रामअवतार सीपोला आशीष शुक्ला आदि ने व्यासपीठ की आरती उतारी।यह महोत्सव गहोई मंदिर के महंत रामलखन शरण महाराज के अध्यक्षता में हो रहा है। कथा श्रवण करने आए सभी भक्तों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर गौरव दास, शिवेंद्र दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: भरत जैसा चरित्र व आचरण हमें जीवन में उतारना चाहिए : देशपांडे
Tue, Nov 22, 2022
भगवान की कथा हमारे समाज को अनुशासन और प्रेम, सद्भाव का संदेश देती है: श्रीमहंत जगदीश दास
प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में राज्याभिषेक के साथ श्री रामकथा का समापन आज, होगा विशिष्ट संत धर्माचार्यों का सम्मान समारोह
अयोध्या। रामनगरी के हनुमान बाग में श्री रामकथा की अमृत वर्षा में संत साधक गोता लगा रहे है। व्यासपीठ से रामकथा की रसधार समर्थ भक्त राघवेंद्र बुआ देशपांडे के श्री मुख से मराठी भाषा में हो रही है। आज रामकथा के समापन सत्र में भरत चरित्र व राम राज्याभिषेक की कथा सुनाते हुए देशपांडे जी ने बताया कि भरत ने बड़े भाई भगवान श्रीराम की चरणपादुका को चौदह वर्षों तक उनकी पूजा अर्चना उनका दास बनकर अयोध्या की प्रजा की सेवा की। कथाव्यास ने बताया कि यदि हमारे समाज के लोग श्रीराम चरित मानस का अनुकरण करते हुए जीवन निर्वाह करने की कला सीख ले तो समाज की सभी प्रकार की समस्याओं का निस्तारण अपने आप हो जाएगा। मराठी भाषा से हिंदी में कथा का अनुवाद हनुमान बाग के श्रीमहंत जगदीश दास महाराज कर रहें है।
श्रीमहंत जगदीश दास ने कहा कि भगवान की कथा हमारे समाज को अनुशासन और प्रेम तथा सद्भाव का संदेश देती है। जिन घरों में भगवान श्रीराम एवं श्रीकृष्ण सहित हमारे देवी देवताओं एवं महापुरुषों की कथाओं का गुणगान होता है उन परिवारों में हमेशा सुख शांति बरसती है। राम लक्ष्मण भरत शत्रु जैसे भाई से हमे सभी गुण सीखना चाहिए और जिस तरह भरत ने अपने चरित्र आचरण और सादगी के साथ राज्य चलाया और प्रजा को सब कुछ दिया उससे हमे सीख लेने की जरूरत है। यह महोत्सव हनुमान बाग मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास महाराज के पावन सानिध्य में हो रहा है।महोत्सव की व्यवस्था में हनुमान बाग के सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितिश शास्त्री गोलू शास्त्री आदि लगे है। आज कथा महोत्सव में श्रृंगार कुंज के महंत हरिभजन दास, हनुमानगढ़ी के गद्दी नशीन के शिष्य संत मामा दास, केशव गलान्डे, सरयू गलान्डे, विजय कुमार कुलकर्णी, विनाया कुलकर्णी,माधव वालिंम्बे,मधुर वालिंम्बे सहित बड़ी संख्या से ठाणे महाराष्ट्र से भक्त मौजूद रहें।