: हनुमान बाग मंदिर में राम कथा महोत्सव सोमवार से
Sun, Nov 13, 2022
समर्थ भक्त राघवेंद्र बुआ देशपांडे कहेंगे व्यासपीठ से रामकथा
महाराष्ट्र से सौकड़ों भक्त पहुंचे रामनगरी
श्री दत्त सत्संग मंडल पिछले 25 वर्षों से तीर्थों में रामकथा व भागवत कथा का दिव्य आयोजन करा रहा
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या में प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग मंदिर में सोमवार से भव्य राम कथा महोत्सव का शुभारंभ होगा। यह महोत्सव श्री दत्त सत्संग मंडल द्वारा आयोजित किया गया है जिसमें महाराष्ट्र से सैकड़ों भक्त कथा श्रवण करने रामनगरी पहुंच गए हैं। व्यासपीठ से श्रीराम कथा की अमृत वर्षा समर्थ भक्त राघवेंद्र बुआ देशपांडे करेंगे। रामकथा महोत्सव की अध्यक्षता हनुमान बाग के श्रीमहंत जगदीश दास महाराज करेंगे। कथा प्रतिदिन दो सत्र में होगी। प्रथम सत्र सुबह 9 से 12 तो सायंकाल 4 से 7 बजे तक होगी। महोत्सव का समापन 22 नवंबर को संत सम्मेलन व वृहद भंडारे के साथ होगा। रामकथा महोत्सव के आयोजक मंडल ने बताया कि श्री दत्ता सत्संग मंडल प्रतिवर्ष तीर्थों में रामकथा व भागवत कथा का दिव्य आयोजन कराते है। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों से लगातार तीर्थ में कथाओं का आयोजन हो रहा है। वाराणसी, नैमिषारण्य, चित्रकूट, सुखताल, हरिद्वार सहित सभी तीर्थों में सत्संग का दिव्य आयोजन मंडल द्धारा किया जाता है।महोत्सव की व्यवस्था में हनुमान बाग के सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितिश शास्त्री आदि लगे है। इस महोत्सव में केशव गलान्डे, सरयू गलान्डे, विजय कुमार कुलकर्णी, विनाया कुलकर्णी,माधव वालिंम्बे,मधुर वालिंम्बे सहित बड़ी संख्या से ठाणे महाराष्ट्र से भक्त आये है।
: शिद्दत से शिरोधार्य हुए महंत रामविलास दास महाराज
Sun, Nov 13, 2022
सातवी पुण्यतिथि महंत रामदास व महंत परशुराम दास महाराज के संयोजन में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई
महंत रामविलास दास बाबा संतो असहाय व गरीबों की सेवा में तत्पर रहते थे और सेवा को ही धर्म मानते थे: महंत परशुराम दास
अयोध्या। सिद्ध पीठ संकट मोचन हनुमान किला मंदिर के संस्थापक साकेतवासी श्री महंत रामविलास दास जी महाराज की सातवी पुण्यतिथि श्री महंत रामदास व महंत परशुराम दास महाराज के संयोजन में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। श्री महाराज जी के पुण्यतिथि के अवसर पर सुंदरकांड का पाठ और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। खाक चौक और संकट मोचन हनुमान किला मंदिर के महंत परशुराम दास जी महाराज ने बताया कि पूज्य महाराज जी बाईपास पर आश्रम बनाकर के संतो असहाय व गरीबों की सेवा में तत्पर रहते थे और सेवा को ही धर्म मानते थे। हमेशा अपने शिष्यों भक्तों को सेवा का ही धर्म मानने का उपदेश दिया करते थे। श्री महाराज जी भजन में तल्लीन रहते थे।
महंत परशुराम दास ने बताया कि सेवा धर्म मानते थे और हमेशा शिष्यों को बताते रहते थे कि परमात्मा के मिलने का सबसे सरल रास्ता परमार्थ निस्वार्थ भाव से सेवा ही है। श्री महाराज जी बाईपास के किनारे रहते थे जो भी गरीब असहाय भूला भटका आश्रम में पहुंचा था सब की सेवा निस्वार्थ भाव से करते थे। श्री महाराज जी के सातवीं पुण्यतिथि पर अयोध्या के संतो ने भाव रूपी श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री महाराज जी को खाकचौक के श्री मंहत बृजमोहन दास , दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्री महंत मुरली दास, हनुमान बाग के महंत जगदीश दास, श्रीराम वल्लभ कुंज के अधिकारी राजकुमार दास, जगतगुरु रामदिनेशाचार्य, महंत गौरी शंकर दास, महंत बलराम दास, महंत राम कुमार दास, राजेश पहलवान, महंत सनद कुमार दास, हरिद्वार से महंत ईश्वर दास, बाल योगी महंत रामदास, खाकचौक के पुजारी महंत रामचरण दास, श्रीराम कथा के मर्मज्ञ चंद्रांशु महाराज, महंत दामोदर दास, महंत विजय रामदास, समाजसेवी विकास सिंह, अमर सिंह, विनोद सिंह, भाजपा मंत्री विपिन सिंह बब्लू, डॉ एमपी यादव , श्री चंद्र यादव सहित सैकड़ो संतो महंतों श्रद्धांजलि अर्पित की।
: आनंद काेई भवन नही है, वो हमारे मन-मस्तिष्क में है: असंग देव
Fri, Nov 11, 2022
सप्त दिवसीय सुखद सत्संग कथा एवं ज्ञानयज्ञ महाेत्सव का हुआ समापन
कबीरमठ जियनपुर के महंत उमाशंकर दास व कार्यक्रम प्रभारी प्रवीन साहेब ने सांसद लल्लू सिंह समेत अन्य गणमान्य अतिथियों का माल्यार्पण-अंगवस्त्र ओढ़ाकर किया स्वागत
अयाेध्या। तीर्थनगरी की प्रतिष्ठित पीठ श्रीरामवल्लभाकुंज, जानकीघाट के प्रांगण में चल रहे सप्त दिवसीय सुखद सत्संग कथा एवं ज्ञानयज्ञ महाेत्सव का शुक्रवार को समापन हुआ। सत्संग कथा के अंतिम दिवस राष्ट्रीय संत व प्रख्यात वक्ता असंग देव महाराज ने भक्तगणों काे रसास्वादन कराते हुए कहा कि अयाेध्या भगवान श्रीराम की पावन नगरी है। जहां पवित्र सरयू का तट है और मां सरयू कल-कल कर प्रवाहित हाे रही हैं। जिस घर में गृह-क्लेश व मनमुटाव नही हाेता है। ऐसा गृहस्थ आश्रम धन्य हाेता है। जब हम तादात से ज्यादा गलती करते हैं और गलतियों पर गलतियां करते चले जाते हैं। धीरे-धीरे हमारा मन दूर हाेता चला जाता है। इसलिए गलतियों एवं क्षमा करने की एक सीमा हाेती है। अवगुण सम्मान काे, कुसंग उत्थान काे और क्राेध परस्पर प्रेम काे नष्ट कर देता है। इसलिए इन चीजों का हमें सुधार करना चाहिए। क्राेध पर काबू करें। जरा-जरा सी बातों पर लाेग रूठ जाते हैं। जाे बड़ी कमजाेरी है। रिश्ता जुड़ा है। ताे निभाना सीखाे। रिश्ता निभाने साधना करें। किसी से प्रेम शुरू करना बहुत आसान है। लेकिन उसकाे अंतिम तक निभाना बहुत कठित है। यह एक साधना के समान है। उन्होंने कहा कि प्रेम का पूरा सागर है। अगर हम पूरी दुनिया काे प्रेम दे देंगे। ताे भी हमारे पास प्रेम भरा रहेगा। माता-पिता काे प्रेम दाे। प्रेम ही रिश्ताें काे निभाने की आनंद के भवन की चाभी है। आनंद काेई भवन नही है। आनंद हमारे मन-मस्तिष्क में है। जाे मिलेगा उससे प्रेम कराेगे। पैसा, वाहन या अन्य वस्तुएं हम सभी खुश नही कर सकती हैं। बस वह थाेड़ी देर के लिए हमारे मनाेरंजन का साधन बन सकता है। विवेक सिर्फ सत्संग से जन्म लेता है। वीतरागी संताें के श्रीमुख से सत्संग प्रवाहित हाेता है, जिसका पान करने हमारा सदा-सदा के लिए कल्याण हाे जाता है। वहीं सत्संग में उपस्थित सांसद लल्लू सिंह ने कहा कि सद्गुरु कबीर के सत्संग से लाेगाें का कल्याण हाेगा। इसका श्रवण सभी काे करना चाहिए। जाे हमारे अंदर उपस्थित सभी विकाराें काे दूर करता है। उन्होंने कहा कि अयाेध्यानगरी में यह बहुत बड़ा आयाेजन रहा, जिसमें बड़ी संख्या में देश के विभिन्न प्रांताें संत व भक्तगण उपस्थित हुए। जिन्हाेंने सप्त दिवसीय सुखद सत्संग कथा का लाभ उठाया। इसके लिए मैं राष्ट्रीय संत असंग देव महाराज और पूरी टीम का आभार ज्ञापित करता हूं। इससे पहले कबीरमठ जियनपुर के महंत उमाशंकर दास व कार्यक्रम प्रभारी प्रवीन साहेब ने सांसद लल्लू सिंह समेत अन्य गणमान्य अतिथियों का माल्यार्पण-अंगवस्त्र ओढ़ाकर स्वागत किया। इस माैके पर श्रीरामवल्लभाकुंज अधिकारी राजकुमार दास, वैदेही भवन महंत रामजी शरण, कबीर मठ जियनपुर के महंत उमाशंकर दास, महंत रामकृष्ण दास रामायणी, रामप्रकाश दास, शील दास, शीलकर साहेब, नवीन दास, अनुभव दास, सत्कर साहेब, आदित्य साहेब, शैलेष साहेब, रवींद्र साहेब रमाकांत, चंद्रेश समेत बड़ी संख्या में भक्तगण सुखद सत्संग कथा का रसपान कर रहे थे।