: अवध विश्वविद्यालय पहली महिला कुलपति बनी प्रो. प्रतिभा गोयल
Tue, Nov 22, 2022
कौटिल्य प्रशासनिक भवन में ग्रहण किया कार्यभार
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार महिला कुलपति को कमान मिली। मंगलवार को विश्वविद्यालय के कौटिल्य प्रशासनिक भवन में पूर्वाह्न पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, पटियाला के स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज की प्रो. प्रतिभा गोयल ने कुलपति का कार्यभार ग्रहण किया। प्रो. गोयल ने विश्वविद्यालय की 17 वीं पूर्णकालिक कुलपति के रूप में निवर्तमान कुलपति प्रो0 अखिलेश कुमार सिंह से चार्ज लिया। इसके पूर्व निवर्तमान कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह के इस्तीफा देने के बाद 01 जून, 2022 को रज्जू भईया विश्वविद्यालय प्रयागराज के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह को विश्वविद्यालय को कार्यवाहक कुलपति के रूप में नियुक्त किया गया था। साढ़े पांच माह बाद प्रदेश की राज्यपाल व कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने प्रो. गोयल को विश्वविद्यालय का पूर्णकालिक कुलपति नियुक्त किया। कुलपति प्रो0 प्रतिभा ने 1987 में बीए आनर्स की उपाधि पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला से प्राप्त की है। 1989 में गुरूनानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर से एमबीए की उपाधि प्राप्त की है। वही 1993 में पंजाबी विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की। प्रो0 गोयल ने 1994 में पंजाबी विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद से शुरूआत की। 2003 से 2009 तक एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर रही। वहीं वर्ष 2009 से लेकर अबतक प्रोफेसर के पद पर विद्यमान रही। विश्वविद्यालय में प्रो. प्रतिभा गोयल के कुलपति का पदभार ग्रहण करने से पहले परिसर स्थित डॉ. लोहिया, सरदार वल्लभभाई पटेल, महात्मा गांधी व विवेकानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। प्रो. गोयल के कार्यभार के वक्त मुख्य नियंता प्रो. अजय प्रताप सिंह, कुलसचिव उमानाथ, वित्त अधिकारी पूर्णेन्दु शुक्ल, प्रो. चयन कुमार मिश्र, प्रो. एसएन शुक्ल, प्रो. एसएस मिश्र, प्रो. एसके रायजादा, प्रो. एमपी सिंह, प्रो. आशुतोष सिन्हा, प्रो. राजीव गौड़, प्रो. नीलम पाठक, प्रो. फारूख जमाल, प्रो. तुहिना वर्मा, प्रो. विनोद श्रीवास्तव, प्रो. शैलेन्द्र वर्मा, प्रो. शैलेन्द्र कुमार, डॉ. राजेश कुमार सिंह, सहायक कुलसचिव डॉ. रीमा श्रीवास्तव, मो. सहील सहित बड़ी संख्या में शिक्षक व कर्मचारी संघ के अध्यक्ष व महामंत्री उपस्थित रहे।
: गहोई मंदिर में सप्ताहिक श्रीमद्भागवत ज्ञान महायज्ञ का उल्लास चरम पर
Tue, Nov 22, 2022
परमात्मा भक्तों के पराभूत होकर धरा धाम पर आते है: रामदिनेशाचार्य
अयोध्या। सप्ताहिक श्रीमद्भागवत ज्ञान महायज्ञ के अंतर्गत गहोई मंदिर में जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य महाराज ने भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान श्री कृष्ण विपरीत परिस्थितियों में जन्म लेते है और संपूर्ण कार्य मानवता को समर्पित करते है। जीवन में कभी भी कृष्ण उदास नहीं होते सबसे बड़ा शत्रु घर में है मामा कंस मारना चाहता है बड़े-बड़े उत्पात होते हैं और भगवान की प्रसन्नता कभी दूर नहीं होती है जीव को यह बड़ा संदेश है कि परिस्थितियां कैसी भी हो जीव को अपनी सहज स्थिति बनाकर रखना चाहिए।
उन्होंने बताया कि परमात्मा भक्तों के पराभूत होकर धरा धाम पर आते है इसी परिपेक्ष में भगवान मैया देवकी के गर्भ से प्रकट हुए संपूर्ण समर्थ अपने आप में स्थापित करके और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मन पर विजय प्राप्त करके सर्वेश्वर कृष्ण कहलाए। जैसे ही मंदिर परिसर में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ पूरा परिसर नंद घर आनंद भयो के जयकारे से गुंजायमान होता और यही आनंद परमात्मा का पूर्ण रूप है। मनुष्य को किसी भी परिस्थितियों में धैर्य को नहीं खोना चाहिए हमेशा मुस्कुराते हुए परिस्थितियों से लड़ना चाहिए यही योग योगेश्वर भगवान कृष्ण ने अपने जन्म की लीला में सभी को संदेश दिए और पूरा जीवन संघर्ष करते रहे लेकिन मुस्कुराहट और धैर्य को कभी नहीं त्यागा। यजमान रामअवतार सीपोला आशीष शुक्ला ने कथा के समापन पर व्यासपीठ की आरती उतारी। यह महोत्सव गहोई मंदिर के महंत रामलखन शरण महाराज के अध्यक्षता में हो रहा है। कथा श्रवण करने आए सभी भक्तों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर गौरव दास, शिवेंद्र दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: गुरू पूर्णिमा शिष्य का गुरू के प्रति समीक्षा का महापर्व है: राधेश्याम शास्त्री
Tue, Nov 22, 2022
अयोध्या। रामनगरी के मणिराम छावनी के योग एवं प्राकृतिक चिकित्सालय में चल रहें भागवत कथा के सातवे दिन व्यासपीठ से प्रख्यात कथावाचक राधेश्याम शास्त्री जी ने दत्तात्रेय द्वारा बनाये गये 24 गुरुओं की चर्चा करते हुए गुरू तत्व पर स विस्तार चर्चा की। उन्होंने बताया कि गुरू पूर्णिमा शिष्य का गुरू के प्रति समीक्षा का महापर्व है।गुरु की ऊर्जा, उसका प्रकाश, उसका प्रेम, उसका मुस्कराना, उसकी उपस्थिति मात्र से शिष्य इतना पोषित हो जाता है और बदले में वह कुछ दे नहीं सकता। ऐसा कुछ है ही नहीं जो वह दे सके। एक क्षण आता है जब वह गुरु के प्रति इतना अनुग्रहित होता है कि वह अपना सिर गुरु के चरणों में झुका देता है। उन्होंने कहा कि सद्गुरु तुम्हें कंप्यूटर बना देने में उत्सुक नहीं है। उसकी उत्सुकता है कि तुम स्वयं प्रकाश बनो, तुम्हारा अस्तित्व प्रामाणिक बने, एक अमर अस्तित्व- मात्र जानकारी नहीं, दूसरों ने जो कहा है वह नहीं, बल्कि तुम्हारा स्वयं का अनुभव।
जैसे-जैसे शिष्य सदगुरु के निकट और निकट आता है, रूपांतरण का एक बिंदु और आता है जब शिष्य भक्त बन जाता है।
और इन सभी सोपानों में एक सौंदर्य है।
शिष्य हो जाना एक महान क्रांति है, लेकिन भक्त होने की तुलना में कुछ भी नहीं। कथाव्यास राधेश्याम शास्त्री जी ने कहा कि किस क्षण शिष्य परिवर्तित होकर भक्त बनता है? गुरु की ऊर्जा, उसका प्रकाश, उसका प्रेम, उसका मुस्कराना, उसकी उपस्थिति मात्र से शिष्य इतना पोषित हो जाता है और बदले में वह कुछ दे नहीं सकता। ऐसा कुछ है ही नहीं जो वह दे सके। एक क्षण आता है जब वह गुरु के प्रति इतना अनुग्रहित होता है कि वह अपना सिर गुरु के चरणों में झुका देता है।