: रामकथा राष्ट्र व्यथा का समाधान है: राघवेंद्र बुआ
Fri, Nov 18, 2022
राघवेंद्र बुआ देशपांडे ने श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस पर बड़े ही धूमधाम के साथ श्री राम जन्म उत्सव व भगवान राम की बाललीलाओं का बड़ा सुंदर प्रसंग सुनाकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया
अयोध्या। श्रीराम का चरित्र मानव जीवन की कसौटी है।एक पूर्ण मानव का चरित्र कैसा होना चाहिये?इसका मानदण्ड श्रीराम का आदर्श चरित्र ही है।व्यक्ति का चरित्र ही समाज के चरित्र को आकार देता है।जब कोई राम जैसा व्यक्तित्व अवतरित होता है तो चरित्र की ख़ुशबू चारों ओर फैलने लगती है। उक्त बातें मराठी भाषा में प्रख्यात कथावाचक समर्थ भक्त राघवेंद्र बुआ देशपांडे जी ने हनुमान बाग मंदिर में राम कथा के चतुर्थ दिवस में कही। श्रीराम कथा की अमृत वर्षा करते हुए देशपांडे ने कहा कि हर मनुष्य अपने चरित्र को सँवारने की होड़ में लग जाता है। क्षुद्रताओं को छोड़ श्रेष्ठता की ओर दौड़ने लगता है।जीवन का एक कटु सत्य यह है कि श्रेष्ठ आदर्शों से प्रेरित लोग ही श्रेष्ठ जनों की राह पर चलते हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में क्षुद्रताओं का बोलबाला है। हर क़दम पर लूट और घोटाला है।इसका कारण यह है कि आज का आदमी क्षुद्र आदर्शों से प्रेरित है।असत्य कितना भी लुभावना क्यों न हो वो सत्य की कभी बराबरी नहीं कर सकता। व्यासजी ने कहा कि इन्द्र भी जिस वैभव सम्पन्न अयोध्या की राजसम्पदा के लिये तरसते थे श्रीराम को उसे छोड़ने में एक क्षण भी नही लगे।लोभ के विरूद्ध त्याग का युद्ध होता है।श्रीराम पैदल यात्रा करते हुये वन की ओर प्रस्थान करते है और समाज के आख़िरी व्यक्ति तक को हृदय से लगाते है।श्रीराम की बडप्पनता यह थी कि उन्होनें केवट को बड़ा बना दिया।चित्रकूट में कोल-भील को हृदय से लगाते है।सारी दुनिया को देने वाले राम शबरी से माँगकर फल खाते है।तब समाज में राम राज्य की स्थापना हुयी थी।वर्तमान समय में जब मानव दिशाहीन हो गया है,क्षुद्र स्वार्थों मे जी रहा है ऐसे में श्रीराम का चरित्र समाज के लिये अत्यावश्यक है। देशपांडे जी ने कहा कि रामचरितमानस में दो वाटिकाओ का वर्णन है एक जोगी की वाटिका जो पुष्प वाटिका है और एक भोगी की वाटिका जो अशोक वाटिका है। विदेह नगर की वाटिका पुष्प वाटिका है। देह नगर की वाटिका है अशोक वाटिका।दोनों वाटिकाओं का केन्द्र बिन्दु जगज्जननी जानकी जी है।पुष्प-वाटिका में शब्दों की सुन्दर चित्रकारी द्वारा राम और सीता के मनोभावों का मनोरम वर्णन किया है। मानव रूप में जन्मे राम मानव मन के किसी भी कोमल भाव से अछूते नहीं रहे। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था में भावी जीवनसंगिनी को निरखते श्रीराम के मन में प्रेम और क्षोभ एक साथ हिलोरे मारता है। वहीँ सीता भी भावी जीवनसाथी के रूप में राम की कामना के साथ पिता जनक के प्रण का स्मरण कर दुखी होती हैं। प्रभु श्रीराम के दिव्य रूप और गुणों पर चिंतन और मनन करने से अन्तःकरण में पवित्रता शुभता उदारता की भावनायें आती हैं और दिव्यता का प्रस्फुटन होता है। हनुमान बाग के श्रीमहंत जगदीश दास महाराज कथा का मराठी से हिंदी में अनुवाद करके लोगों को समझा रहें थे। यह महोत्सव हनुमान बाग मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास महाराज के पावन सानिध्य में हो रहा है।महोत्सव की व्यवस्था में हनुमान बाग के सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितिश शास्त्री गोलू शास्त्री आदि लगे है। इस महोत्सव में केशव गलान्डे, सरयू गलान्डे, विजय कुमार कुलकर्णी, विनाया कुलकर्णी,माधव वालिंम्बे,मधुर वालिंम्बे सहित बड़ी संख्या से ठाणे महाराष्ट्र से भक्त मौजूद रहें।
: त्याग तपस्या साधना का केंद्र बिंदु श्यामासदन मंदिर
Wed, Nov 16, 2022
श्यामा सदन मंदिर में भगवान की हो रही अष्टयाम सेवा
बालयोगी महंत श्रीधर दास मंदिर का विकास, गौ सेवा, साधु सेवा तनमयता से कर रहे
अयोध्या। संतो की सराय कही जाने वाली रामनगरी अयोध्या जहां अनेक भजनानंदी संत हुए है जिनके त्याग तपस्या के बलबूते न सिर्फ अयोध्या बल्कि पूरे भारत में संत समाज की गरिमा वैभव को स्थापित किया है। ऐसा ही प्रसिद्ध मंदिर श्यामासदन है। जहां पर सच्ची साधना संतो की जगजाहिर है। श्यामासदन के प्रथम हुए महंत रामकिंकर महाराज, द्धितीय लाल जी महाराज व तृतीय महंत संत गोपाल दास महाराज जिनकी त्याग तपस्या साधना की चर्चा आज भी अयोध्या ही नही आसपास के कई जिलों के लोग करते है। इन पूज्य आचार्यों के यशगाथा आज भी अयोध्या के संत समाज व आमजन करते है। इनकी त्याग तपस्या साधना की केंद्र बिंदु श्यामासदन मंदिर अपने विकास के ओर अग्रसर है। महंत संत गोपाल दास महाराज की स्मृति में बुधवार को मंदिर में विशाल भंडारे का दिव्य आयोजन किया गया। जिसमें रामनगरी के विशिष्ट संतों का सम्मान किया गया।
श्यामासदन मंदिर की बागडोर आज युवा हाथों में है। महंत संतगोपाल दास जी महाराज के सुयोग्य शिष्य बालयोगी महंत श्रीधर दास आज श्यामासदन के पीठाधीश्वर है। अपने गुरु के बतायें मार्गों का अनुसरण करते हुए बालयोगी महंत श्रीधर दास मंदिर के विकास, गौ सेवा, साधु सेवा के तनमयता से लीन होकर करते है। श्यामा सदन मंदिर में भगवान की अष्टयाम सेवा लगातार हो रही है। साधु सेवा, गौ सेवा बहुत ही बड़े पैमाने पर होता है। श्यामासदन पीठाधीश्वर महंत बालयोगी श्रीधर दास महाराज ने बताया कि आज जो भी कुछ हूँ पूज्य गुरुदेव जी की कृपा है। गुरुदेव भगवान के स्मृति में भंडारा हुआ। जिसमें रामनगरी के विशिष्ट संत महंत मंदिर के शिष्य परिकर शामिल हुए। इस मौके पर मणिराम दास छावनी के महंत कमलनयन दास, जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, महंत डा रामानन्द दास, महंत जनार्दन दास, महंत रामकरन दास,नागा रामलखन दास, संत आनंद दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहे।
: मन की व्यथा भुलाकर प्रभु की कथा में लगाए मन तो दु:ख होगे दूर: देशपांडे
Wed, Nov 16, 2022
हनुमान बाग मंदिर में श्रीराम कथा का उल्लास चरम पर, मराठी भाषा में हो रहा रामकथा
अयोध्या। भगवान के दिव्य गुणानुवादों के श्रवण, मनन और चिंतन से जीवन में शुभता, श्रेष्ठता और दिव्यता का आरोहण होता है। अतः इहलौकिक एवं पारलौकिक अनुकूलताओं के लिए भगवान का स्मरण प्रतिपल करते रहें। उक्त बातें उक्त बातें मराठी भाषा में प्रख्यात कथावाचक समर्थ भक्त राघवेंद्र बुआ देशपांडे जी ने हनुमान बाग मंदिर में राम कथा के तृतीय दिवस में कही। प्रख्यात कथावाचक राघवेंद्र बुआ देशपांडे जी ने कहा कि मनुष्य को हमेशा भगवान का चिंतन करना चाहिए। भगवान का चिंतन करने से धीरे-धीरे उनके गुण हममें आने लगते हैं। यदि मनुष्य वास्तविक शांति चाहता है, तो उसके चिंता को घटाकर चिंतन को बढ़ाना होगा। चिंता और चिता में कोई अंतर नहीं हैं। चिंता मनुष्य को जिंदा जलाती है और चिता मरे हुए को। जीव चिंता छोड़कर भगवान का चिंतन करे। चिंतन, भजन और मनन करने से काम, क्रोध, लोभ और मोह से मुक्ति मिलती है।उन्होंने कहा कि तब ही प्रभु की भक्ति में मन लगता है। मन की व्यथा भुलाकर प्रभु की कथा में मानव मन लगाए तो उसके दु:ख दूर होते हैं। परमात्मा का कोई आदि है न कोई अंत, वे तो निराकार स्वरूप हैं। भक्त उनका जिस रूप में स्मरण करता है वे उसे उसी रूप में दर्शन देते हैं। आत्मा-परमात्मा का सीधा संबंध है। जब तक मनुष्य अपनी आत्मा के विकार और मन को शुद्ध नहीं करता है, उसे परमात्मा की प्राप्ति नहीं हो सकती। राघवेंद्र बुआ देशपांडे ने कहा कि ईश्वर के गुणों का ज्ञान प्राप्त करने का प्राचीन उपाय तो वेद व उपनिषद आदि ग्रन्थ ही हैं। वेद व वेदभाष्य का अध्ययन कर के अनन्त गुणों वाले ईश्वर के अनेकानेक गुणों का ज्ञान प्राप्त होता है। ईश्वर के स्वरूप पर दृष्टि डालें तो ज्ञान हो जाता है।कथा के अंत में धूमधाम से श्रीराम जन्मोत्सव मनाया गया। मराठी भाषा में हो रही राम कथा का हिंदी अनुवाद कर रहे हनुमान बाग के श्रीमहंत जगदीश दास महाराज। यह महोत्सव हनुमान बाग मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास महाराज के पावन सानिध्य में हो रहा है।महोत्सव की व्यवस्था में हनुमान बाग के सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितिश शास्त्री गोलू शास्त्री आदि लगे है। इस महोत्सव में केशव गलान्डे, सरयू गलान्डे, विजय कुमार कुलकर्णी, विनाया कुलकर्णी,माधव वालिंम्बे,मधुर वालिंम्बे सहित बड़ी संख्या से ठाणे महाराष्ट्र से भक्त मौजूद रहें।