: भागवत की कथा परीक्षित के मोक्ष की कथा है: रामदिनेशाचार्य
Sun, Nov 20, 2022
गहोई मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा की हो रही अमृत वर्षा
अयोध्या। स्वर्गद्वार स्थित गहोई मंदिर में चल रहे श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ में श्रीमद जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य महाराज ने बताया कि श्रीमद्भागवत का विषय सत्य है आदि, मध्य और अंत तीनों सत्य से संपुटित है। निश्चित रूप से जब जीवन की आस्था सत्य पर स्थापित हो जाती है तब सत्य स्वरूप परमात्मा आत्मा में उदित हो जाया करते है।उन्होंने कहा कि भागवत की कथा परीक्षित के मोक्ष की कथा है। जब जीवन में अपराध बन जाए तो उस अपराध की निवृत्ति शरणागति में ही संभव है और जब एक समर्थ सदगुरू की शरण या गति प्राप्त हो जाती है तब परीक्षित जैसे व्यक्ति मोक्ष के अधिकारी हो जाते है।
व्यासपीठ से जगतगुरु महाराज ने कहा कि ऋषि का श्राप परीक्षित को मोक्ष की राह पर अग्रसर करता है तब एक महात्मा साधक सिद्ध स्वयं आकर अपने साधना के बल पर भगवान के दिव्य कथाओं का अनुसंधान करके उनके मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त कराते हैं। परीक्षित का अर्थ ही है जिसने ग्राम दृष्टि से गर्भ में परमात्मा का दर्शन कर लिया हो वही परीक्षित है और संसार में आने के बाद उसी परमात्मा की खोज में लगा रहता है। कथा के पूर्व में यजमान रामअवतार सीपोला आशीष शुक्ला आदि ने व्यासपीठ की आरती उतारी।यह महोत्सव गहोई मंदिर के महंत रामलखन शरण महाराज के अध्यक्षता में हो रहा है। कथा श्रवण करने आए सभी भक्तों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर गौरव दास, शिवेंद्र दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: रामचरित मानस पाठ में हुआ सुंदर कांड
Sun, Nov 20, 2022
हनुमत निवास मंदिर में त्रिदिवसीय संगीतमय रामचरित मानस पाठ का छाया उल्लास
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या का प्रसिद्ध पीठ हनुमत निवास मंदिर में त्रिदिवसीय संगीतमय रामचरित मानस पाठ में भव्य सुंदर कांड उत्सव मनाया गया। शनिवार को देर शाम रामचरित मानस पाठ में सुंदर कांड पाठ किया गया पूरा मंदिर परिसर भक्ति मय हो गया। मंदिर में मानस की पंक्तियां गूंज रही हैं। त्रिदिवसीय पाठ को लेकर पूरे मंदिर को फूलों से सजाया गया है। चारों तरह संगीतमय पाठ लोगों को मंत्रमुग्ध कर रहा था। महंत मिथिलेश नंदनी शरण की अध्यक्षता में हो रहे मानस पाठ का आयोजन मुरादाबाद के सीएल गुप्ता परिवार कर रहा है। यह भव्य महोत्सव आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिला के महंत मैथलीरमण शरण महाराज के पावन सानिध्य में हो रहा है। मां अमृतानंद मानस परिवार की टीम संगीतमय पाठ कर रही है। इस संगीतमय पाठ टीम का नेतृत्व योगेश भसीन कहते है कि मानस ऐसा सागर है जिसमें जितना डूबोगे उतना ही आनंद व मधुर होगा। आगरा के राम प्रकाश पाठक व रायबरेली की मालती भार्गव ने सामुहिक मानस पाठ का आरंभ किया। हनुमत निवास के महंत प्रख्यात साहित्यकार मिथलेश नन्दनी शरण महाराज ने बताया कि शनिवार को मानस के सुंदर कांड का दिव्य पाठ किया जायेगा।इस मौके पर मौनी जी महाराज, रामकथा कुंज के महंत डा रामानन्द दास, हनुमत सदन के महंत अवधकिशोर शरण, प्रख्यात कथावाचक राधेश्याम शास्त्री, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, भाजपा नेता अवधेश पाण्डेय बादल सहित बड़ी संख्या में संत साधक व भक्त गण मौजूद रहे।
: निष्काम भाव से भक्ति करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं: राघवेंद्र बुआ
Sun, Nov 20, 2022
मराठी भाषा में हो रही राम कथा का हिंदी अनुवाद कर रहे हनुमान बाग के महंत जगदीश दास
व्यासपीठ से राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनाया देशपांडे ने
अयोध्या। रामनगरी के हनुमान बाग मंदिर में मराठी भाषा में चल रही संगीतमय रामकथा में राम वनवास भरत मिलाप और राम-केवट संवाद की कथा का प्रसंग व्यासपीठ से समर्थ भक्त राघवेंद्र बुआ देशपांडे ने सुनाया। देशपांडे ने कहा कि भरत जैसा भाई इस युग में मिलना मुश्किल है। राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर भक्त भाव-विभोर हो गए। उन्होंने कहा कि भगवान राम मर्यादा स्थापित करने को मानव शरीर में अवतरित हुए। पिता की आज्ञा पर वह वन चले गए। भगवान राम वन जाने के लिए गंगा घाट पर खड़े होकर केवट से नाव लाने को कहते हैं लेकिन केवट मना कर देता है और पहले पैर पखारने की बात कहता है। केवट भगवान का पैर धुले बगैर नाव में बैठाने को तैयार नहीं होता है। राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर श्रोता आनंदित हो गए। यह प्रसंग मराठी भाषा में हो रहा था। जिसका हिन्दी में अनुवाद करते हुए महंत जगदीश दास महाराज ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आदर्श समाज में आज भी कायम है। भगवान प्रेम भाव देने वाले का हमेशा कल्याण करते हैं। कहा कि भरत ने भगवान राम के वनवास जाने के बाद खड़ाऊं को सिर पर रखकर राजभोग की बजाय तपस्या की। कहा कि जीवन में भक्ति और उपासना का अलग महत्व है। निष्काम भाव से भक्ति करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा मनोरंजन का साधन नही हैं बल्कि मन के मैल को धोकर पवित्र करने व भगवत प्राप्ति की ओर अग्रसर होने का एकमात्र माध्यम है। महराज जी ने कहा कि भगवान का स्वभाव है कि वह पशु पक्षियों का भी सम्मान करते हैं। उनके उपकार को भी नहीं भूलते हैं। मौजूदा दौर में मनुष्य किसी भी उपकार को नहीं मानता है।यह महोत्सव हनुमान बाग मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास महाराज के पावन सानिध्य में हो रहा है।महोत्सव की व्यवस्था में हनुमान बाग के सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितिश शास्त्री गोलू शास्त्री आदि लगे है। आज कथा महोत्सव में श्रृंगार कुंज के महंत हरिभजन दास, हनुमानगढ़ी के गद्दी नशीन के शिष्य संत मामा दास, केशव गलान्डे, सरयू गलान्डे, विजय कुमार कुलकर्णी, विनाया कुलकर्णी,माधव वालिंम्बे,मधुर वालिंम्बे सहित बड़ी संख्या से ठाणे महाराष्ट्र से भक्त मौजूद रहें।