: सीताराम विवाहोत्सव के रंग में रंगने को तैयार रामनगरी
Tue, Nov 22, 2022
चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राजमहल में तैयारी जोरों पर, श्रीराम कथा के मध्य होगा अद्वितीय राम विवाहोत्सव
प्रभु श्रीराम के स्मरण में हर दिन उत्सव जैसा है : देवेंद्रप्रसादाचार्य
हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा विवाह महोत्सव : महंत कृपालु
अयोध्या। भगवान श्री राम की जन्म स्थली अयोध्या में प्रतिदिन उत्साह और आनंद का माहौल रहता है। लेकिन विशेष पर्व पर यह उल्लास व उत्साह कई गुना बढ़ जाता है और भी क्यो न। प्रभु श्री राम के जन्मोत्सव के बाद उनके विवाहोत्सव का पर्व भी बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह उत्सव अगहन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। रामनगरी के जिन चुनिंदा मंदिरों में राम विवाहोत्सव पूरे भाव-चाव से मनाया जाता है इनमें रामकोट स्थित चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राज महल बड़ा स्थान जो बाबा राम प्रसादाचार्य जी महाराज की तपोस्थली के रुप में सुविख्यात है। पुण्यसलिला सरयू के तट पर स्थित लक्ष्मणकिला स्वर्गद्वारी स्थित विअहुती भवन, रंग महल, जानकी महल , कनक भवन व हनुमान बाग जैसे प्रमुख रूप से शामिल हैं वैसे तो अयोध्या के सभी मंदिरों में विवाह महोत्सव मनाया जाता है।
पिछले लगभग 2 वर्षों से कोरोना महामारी के कारण अयोध्या के सभी उत्सव औपचारिकता मात्र के रूप में मनाए जाते थे लेकिन इस वर्ष जब पूरे देश में कोरोना महामारी का प्रकोप कम हुआ है तो अयोध्या में भी उत्सव का रंग चटक हो गया है। रामनगरी के सभी मठ मंदिरों में विवाह महोत्सव मनाने की तैयारियां प्रारंभ हो गई है। यह उत्सव 28 नवंबर को विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाएगा। जिसमें अयोध्या के प्रमुख मंदिरों से ठाकुर जी की भव्य बारात निकाली जाएगी। तिलक उत्सव का कार्यक्रम होगा और प्रभु श्री राम और माता जानकी का विवाह भी हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा।
चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राजमहल बड़ास्थान के बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज ने बताया कि हमारे आराध्य प्रभु श्री राम के स्मरण में हर दिन उत्सव जैसा होता है। विभिन्न उत्सवों का रंग ही अलग हो जाता है। देश-विदेश से लोग अयोध्या में आकर ठाकुर जी के उत्सव में शामिल होते है। प्रभु श्रीराम ने त्रेता युग में जिन मर्यादाओं को स्थापित किया था उनका अनुसरण करते हैं व अपने जीवन में आत्मसात करते का प्रयास करते है। इसलिए भी सकल ब्रह्मांड में मर्यादा को स्थापित करने वाले प्रभु श्रीराम के प्रत्येक उत्सव का रंग अयोध्या में अनंत गुना बढ़ जाता है। उन्होंने बताया की मंदिर में सीताराम विवाह महोत्सव की तैयारी प्रारंभ हो गई है और बड़े ही हर्षोल्लास के साथ प्रभु श्रीराम और माता जानकी का विवाह उत्सव मनाया जाएगा।
चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राजमहल बड़ास्थान में बिंदुगाद्याचार्य स्वामी श्री देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन व सुंदर सदन पीठाधीश्वर महंत कृपालु राम भूषण दास जी महाराज ने बताया कि पूज्य गुरुदेव भगवान के आशीर्वाद से मंदिर में विवाह महोत्सव की तैयारी प्रारंभ हो गई है। बड़े ही हर्षोल्लास के साथ इस वर्ष विवाह महोत्सव मनाया जाएगा क्योंकि पिछले 2 वर्षों से कोरोना महामारी ने अयोध्या के उत्सव पर भी असर डाला था लेकिन ठाकुर जी की कृपा से इस बार कोरोना का प्रकोप ना के बराबर है। विवाह महोत्सव के अवसर पर मंदिर प्रांगण में तन तुलसी मिथिला पीठाधीश्वर स्वामी श्री विष्णुदेवाचार्य जी महाराज के श्री मुख से अमृतमयी दिव्य भव्य श्रीरामकथा हो रही है जो 23 नवंबर से 29 नवंबर तक चलेगी। भव्य श्री रामबारात निकाली जाएगी और ठाकुर जी का विवाह हर्षोल्लास के साथ संपन्न होगा।
: श्री लालसाहब दरबार के पूर्वाचार्यों को संतों ने किया नमन
Tue, Nov 22, 2022
मंदिर में श्रद्धांजलि सभा व विशाल भंडारे का हुआ आयोजन, आये हुए अतिथियों का स्वागत महन्त रामनरेश शरण ने किया
अयोध्या। कनक भवन परिसर स्थित प्रसिद्ध पीठ श्री लालसाहब दरबार के पूर्वाचार्य महंत महंत जानकी जीवन शरण जी महराज की 24 वीं पुण्यतिथि पर मंहत श्रीरामकृपाल शरण जी महराज, मंहत श्री जानकी शरण जी महराज की द्वितीय पुण्यतिथि पर संतो महंतों ने श्रद्धांजलि अर्पित की और शिद्दत से याद किए। इस अवसर पर मन्दिर परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयाेजन हुआ, जिसमें अयाेध्यानगरी के सन्त-धर्माचार्याें ने साकेतवासी महन्ताें के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। साथ ही साथ उनके कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। इस माैके पर लालसाहब दरबार के वर्तमान महन्त रामनरेश शरण महराज ने कहा कि पूर्वाचार्य महन्ताें का रामनगरी में अपना एक विशिष्ट स्थान था। सभी लोग उनका आदरपूर्वक सम्मान करते रहे हैं। विद्वता में उनकाे महारथ हासिल था। वह भजनानंदी संत रहे, हमेशा भजन-साधना में तल्लीन रहा करते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में मन्दिर सर्वांगीण विकास किया। यहां पर गाै, सन्त, विद्यार्थी व आगन्तुकाें की सेवा प्रारम्भ से ही हाेते हुए चली आ रही। मैं अपने पूर्वाचार्याें की कही बाताें और बतलाए हुए मार्ग का बराबर अनुसरण कर रहा हूं।पुण्यतिथि पर विशाल भण्डारा प्रस्तावित रहा, जिसमें हजाराें की संख्या में सन्त-धर्माचार्याें व भक्तगणाें ने प्रसाद पाया और श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सन्त-धर्माचार्याें का श्रीं महराज जी ने स्वागत-सम्मान किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से वेद मन्दिर के महन्त रामनरेश दास, महन्त रामकुमार, महन्त उद्धव शरण, महन्त ज्ञानदास महाराज के शिष्य हेमन्त दास, नागा राम लखन दास,महन्त गिरीश दास, महन्त राजबहादुर शरण, श्रीरामाश्रम महन्त जयराम दास, महन्त रामेश्वर दास, राष्ट्रीय पहलवान केशव दास, महन्त सच्चिदानंद दास, महन्त उत्तम दास त्यागी, संत नारायण दास, संतदास आदि सन्त-महन्त व भक्तगण उपस्थित रहे।
: जिनके कर्म श्रेष्ट होते है वो संसार को सुंदर बनाते है: रामानन्दाचार्य
Tue, Nov 22, 2022
अयोध्या। भगवान श्री राम की जन्म स्थली अयोध्या के स्वर्गद्वार स्थित गहोई मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के अमृत वर्षा के चौथे दिन व्यासपीठ से जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य महाराज के सानिध्य में गहोई मंदिर में भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव बड़ी ही दिव्यता के साथ मनाया गया। व्यासपीठ से कथा कहते जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य महाराज ने कहा कि बिना भगवान श्री राम की मर्यादा के भगवान कृष्ण की कथा को मनुष्य आत्मसात नहीं कर सकता है। यदि भगवान श्री कृष्ण की कथा समुद्र है तो भगवान श्री राम की कथा समुद्र को पार करने के लिए राम की मर्यादा का सेतु जीवन में निश्चित ही बनाना पड़ेगा तब कृष्ण कथा रूपी समुद्र का हम पार पा सकते है। उन्होंने कहा कि एक मर्यादा के उत्कृष्ट मूर्तिमान स्वरूप भगवान श्रीराम दूसरे सृष्टि के मूर्तिमान स्वरूप भगवान श्री कृष्ण की एक वाणी जीवन के शाश्वत मूल्यों की स्थापना करती है तो दूसरे का चरित्र जीवन में निर्माण में भूमिका अदा करती है। भारतीय संस्कृति परंपरा और धर्म भगवान श्री कृष्ण और राम से ही अनुप्राणित है। हमारा राष्ट्र इन दोनों संस्कृतियों के संरक्षण में ही आज अपनी आध्यात्मिक वैभव की पराकाष्ठा को प्राप्त कर रहा है भगवान श्रीराम का जन्म जग मंगल , राष्ट्र रक्षा और धर्म की उपासना के लिए होता है। भगवान श्री राम की कथा कलयुग में अमृत के समान है उनके पद चिन्हों पर चलकर मनुष्य परम पद पा सकता है। आज की कथा में रंग महल के पीठाधीश्वर महंत रामशरण दास शामिल हुए। कथा के पूर्व में यजमान रामअवतार सीपोला आशीष शुक्ला आदि ने व्यासपीठ की आरती उतारी।यह महोत्सव गहोई मंदिर के महंत रामलखन शरण महाराज के अध्यक्षता में हो रहा है। कथा श्रवण करने आए सभी भक्तों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर गौरव दास, शिवेंद्र दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।