: भागवत कथा ऐसा शास्त्र है जिसके प्रत्येक पद से रस की वर्षा होती है: रामानन्दाचार्य
Wed, Nov 23, 2022
भागवत कथा में छठवें दिन हुआ कृष्ण और रुक्मिणी का विवाह, कृष्ण-रुक्मिणी की आकर्षक झांकी बनाई गई जिनके दर्शन करने भक्तजन भाव विभोर हो गए
अयोध्या। स्वर्गद्वार के गहोई मंदिर में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के छठवें दिन व्यासपीठ से जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य ने कृष्ण और रुक्मिणी का विवाह प्रसंग सुनाते हुए कहा कि महाराज भीष्म अपनी पुत्री रुक्मिणी का विवाह श्रीकृष्ण से करना चाहते थे, परन्तु उनका पुत्र रुक्मणी राजी नहीं था। वह रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल से करना चाहता था। रुक्मिणी इसके लिए जारी नहीं थीं। विवाह की रस्म के अनुसार जब रुक्मिणी माता पूजन के लिए आईं तब श्रीकृष्णजी उन्हें अपने रथ में बिठा कर ले गए। तत्पश्चात रुक्मिणी का विवाह श्रीकृष्ण के साथ हुआ। ऐसी लीला भगवान के सिवाय दुनिया में कोई नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि भागवत कथा ऐसा शास्त्र है। जिसके प्रत्येक पद से रस की वर्षा होती है। इस शास्त्र को शुकदेव मुनि राजा परीक्षित को सुनाते हैं। राजा परीक्षित इसे सुनकर मरते नहीं बल्कि अमर हो जाते हैं। प्रभु की प्रत्येक लीला रास है। हमारे अंदर प्रति क्षण रास हो रहा है, सांस चल रही है तो रास भी चल रहा है, यही रास महारास है इसके द्वारा रस स्वरूप परमात्मा को नचाने के लिए एवं स्वयं नाचने के लिए प्रस्तुत करना पड़ेगा, उसके लिए परीक्षित होना पड़ेगा। जैसे गोपियां परीक्षित हो गईं। इस दौरान कृष्ण-रुक्मिणी की आकर्षक झांकी बनाई गई। जिनके दर्शन करने भक्तजन भाव विभोर हो गए। इस अवसर पर भक्तजन शामिल रहे। आज की कथा में श्रीरामबल्लाभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास, हनुमत सदन के महंत अवध किशोर शरण ने व्यासपीठ का पूजन किया। आये हुए अतिथियों का स्वागत गहोई मंदिर के महंत रामलखन शरण ने किया। इस मौके पर यजमान रामअवतार सीपोला आशीष शुक्ला , गौरव दास, शिवेंद्र दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: दुल्हा सरकार के विवाह महोत्सव के लिए सजा जानकी महल
Wed, Nov 23, 2022
सीताराम विवाह महोत्सव में मिथिलांचल से उत्सव में सराबोर होगा श्री जानकी महल ट्रस्ट
सीता-राम विवाहोत्सव हमारे लिए अतीत का घटनाक्रम ही नहीं, बल्कि जीवन में प्रतिपल प्रेरित होने का दिव्य सूत्र है: आदित्य सुल्तानिया
28 नवंबर अगहन पंचमी पर निकलेगी दुल्हा सरकार की बारात
अयोध्या। श्रीसीता-राम विवाहोत्सव का मुख्य उत्सव 28 नवंबर को है। उत्सव की तैयारी चरम की ओर उन्मुख है। रामनगरी के चुनिंदा मंदिरों में राम विवाहोत्सव पूरे भाव-चाव से मनाया जाता है। रामनगरी के श्री जानकी महल ट्रस्ट में मिथिला पद्धति से विवाहोत्सव मनाया जाता है। यहां पर भगवान राम को दुल्हा सरकार और किशोरी जी को बेटी माना जाता है। श्री जानकी महल ट्रस्ट का सीताराम विवाहोत्सव देखने के लिए दूर दूर से लोग आते है। यहां की विवाहोत्सव सुप्रसिद्ध है। जो अपने आप में अद्वितीय है। रामनगरी के कनक भवन, लक्ष्मणकिला, हनुमान बाग, दशरथ राजमहल बड़ा स्थान रसमोद कुंज रंग महल विअहुती भवन आदि का विवाहोत्सव देखने के लिए लोग आतुर रहते है।जानकी महल ट्रस्ट में सीता के बिना श्रीराम की कल्पना तक नहीं की जाती है और ऐसे में श्रीराम एवं सीता के मिलन के महापर्व पर यहां उत्सव का चरम परिलक्षित होता है।
विवाहोत्सव का केंद्र जानकीमहल ट्रस्ट भी तैयारियों के साथ ही उत्सव के आगोश में डूबता जा रहा है। यहां उत्सव का आगाज शुक्रवार की प्रथम बेला में रामार्चा महायज्ञ एवं सायं रामलीला की प्रस्तुति तथा गणेश पूजन से शुरु हो गया। शनिवार को फुलवारी सायं विवाहगीत एवं रामलीला की प्रस्तुति संयोजित है। जानकीमहल में राम विवाहोत्सव की रस्म किस प्रामाणिकता से मनायी जाती है। इसे हल्दात तिलक मेंहदी बिनौरी नेग न्यौछावरी नेग घुड़चढ़ी बरात प्रस्थान वैवाहिक कार्यक्रम और विवाहोत्सव के अगले दिन छप्पन भोग तथा कुंवर कलेवा के आयोजनों से समझा जा सकता है। उत्सव को लेकर निमंत्रण पत्रिका छापी है जो विशिष्ट लोगों को वितरण की जा रही है। जिसमें विनीत पक्ष ओम प्रकाश डोकानिया व मीरा डोकानिया कोलकाता है तो स्वागताकांक्षी श्री जानकी महल ट्रस्ट एवं भक्त गण है। जानकीमहल के ट्रस्टी समाजसेवी आदित्य सुल्तानिया के अनुसार सीता-राम विवाह हमारे लिए अतीत का घटनाक्रम ही नहीं बल्कि जीवन में प्रतिपल प्रेरित होने का दिव्य सूत्र है और इस आयोजन में हम कोई कसर नहीं छोड़े रखना चाहते। राम विवाहोत्सव के दौरान जानकीमहल में फुलवारी की प्रस्तुति आकर्षण की सबब होती है। जानकीमहल के मुख्य आगार के सम्मुख स्थापित मनोहारी फुलवारी को जनकपुर की उस फुलवारी के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। जहां त्रेता में श्रीराम और सीता का पहली बार आमना-सामना हुआ था। इस मौके पर रामनगरी के प्रतिनिधि चुनिंदा संत धर्माचार्य भी आमंत्रित होते हैं जो श्रीराम के प्रसंग का आस्वाद ही नहीं लेते बल्कि अपनी वेश-भूषा और ध्यानियों जैसी भाव-भंगिमा से श्रीराम के गुरु तथा संरक्षक-मार्गदर्शक के रूप में ऋषि विश्वामित्र की याद भी दिलाते हैं।जानकी महल के ट्रस्टी आदित्य सुल्तानियां बताते हैं कि यह स्थान किशोरी जी का मायका माना जाता है। राम जी को दूल्हा और किशोरी जी को बेटी मानकर वर्ष में एक बार जानकी महल की दहलीज विग्रह को पार कराया जाता है। बता दें कि गणेश भगवान को न्योता भेजकर विवाह उत्सव शुरू हो गया है।कार्यक्रम को सफल बनाने में ट्रस्टी दिलीप सुल्तानिया, नीता सुल्तानिया, अरुण सुल्तानिया समेत पूरा जानकी महल परिवार लगा हुआ है।
: अष्टोत्तरशत श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव शुक्रवार से
Wed, Nov 23, 2022
राधा सर्वेश्वर भगवान की भव्य प्राण प्रतिष्ठा 28 को, 251 वैदिक आचार्य करेंगे भागवत जी के मूल पाठ का पारायण
नवनिर्मित श्री राधा मोहन कुंज
श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी महाराज
महंत सनत कुमार शरण जी
सोमवार को राधामोहन कुंज में होगा महंताई समारोह, रामनगरी समेत पूरे देश से आये संत धर्माचार्यों का होगा अभिनन्दन
महोत्सव में जुटेंगे हजारों लोग, वैदिक आचार्य करेंगे पूजन
अयोध्या। राम नगरी अयोध्या के जानकी घाट स्थित नवनिर्मित भव्य श्री राधा मोहन कुंज सर्वेश्वर गीता मंदिर ट्रस्ट का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव 25 नवंबर शुक्रवार से समारोह पूर्वक शुभारंभ होगा। जिसमें अष्टोत्तरशत श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान महायज्ञ का दिव्य आयोजन होगा। व्यासपीठ से श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी महाराज करेंगे।कथा सुबह 10 बजे से 1 बजे तक चलेगी। इसके बाद 251 वैदिक आचार्यों द्धारा भागवत जी के मूल पाठ का पारायण होगा। कार्यक्रम का मुख्य उत्सव राधा सर्वेश्वर भगवान की भव्य प्राण प्रतिष्ठा 28 नवंबर सोमवार को होगा जिसमें राधामोहन कुंज की महंताई समारोह भी होगा। जिसमें रामनगरी समेत पूरे भारत से संत धर्माचार्य शामिल होगे। आये हुए अतिथियों का अभिनन्दन श्री राधा मोहन कुंज सर्वेश्वर गीता मंदिर ट्रस्ट करेगा। मंदिर के महंत सनत कुमार शरण जी ने बताया कि यह सारा आयोजन पूज्य गुरुदेव श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य में होगा। उन्होंने कहा कि नवनिर्मित श्रीराधा मोहन कुंज में पूज्य गुरुदेव भगवान की महंताई भी होगी। इस ऐतिहासिक दिव्य आयोजन में पूरे देश से हजारों शिष्य परिकर आयेंगे। महंत सनत कुमार शरण जी ने बताया कि नवनिर्मित मंदिर में एक दिव्य कथा मंडप 50 आधुनिक कमरे बनें है। उन्होंने कहा कि श्री राधा मोहन कुंज सर्वेश्वर गीता मंदिर ट्रस्ट द्धारा आये हुए सभी भक्तों को नित्य प्रति दिन भोजन प्रसाद कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि हमारे वृंदावन आश्रम में जैसे अन्न क्षेत्र चलता है उससे भी भव्य अन्न क्षेत्र श्री अयोध्या जी में चलायेंगे। कार्यक्रम के व्यवस्थापक मंडल में हनुमानगढ़ी के महंत गौरीशंकर दास, जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, तुलसीदास जी की छावनी के महंत जनार्दन दास, मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास, राम महल वैदेही भवन के महंत रामजीशरण, राम हर्षण कुंज से जुड़े संत राघव दास है।