: चारों दुलहा में बड़का कमाल सखियां…
Tue, Nov 29, 2022
श्रीराम बारात की अगुवाई महंत मिथलेश नन्दनी शरण जी महाराज ने किया तो बारातियों का स्वागत आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के महंत मैथलीरमण शरण जी महाराज ने
लक्ष्मणकिला में मिथिला की सखियों ने गाये मंगल गीत, जनकनन्दिनी के हुए भगवान राम
अयोध्या। अगहन शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को मनाए जाने वाले सीता-राम विवाहोत्सव के साथ रामनगरी की आस्था सोमवार को फलक पर पहुंची। रामनगरी में बैंड-बाजे, सजे-धजे हाथी, घोड़े व सतरंगी आतिशबाजी से रामविवाह की अलौकिक छटा मनोहारी रही।
रामनगरी के मंदिरों से सोमवार को जब राम बरात निकली तो वहां का दृश्य कुछ इसी तरह का रहा। रामायण स्वरूपों से सजी-धजी बरात का दर्शन करने के लिए लोग उमड़ पड़े। संत-धर्माचार्यों के साथ संत-श्रद्धालु श्रीराम के जयकारे लगा रहे थे तो बरात में शामिल लोग राम जी की निकली सवारी..., दूलह श्री रघुनाथ बने, दुलही सिय सुंदर मंदिर माही...चारों दुलहा में बड़का कमाल सखियां... जैसे पदों को लयबद्ध कर गाते रहे।
सिद्ध पीठ हनुमत निवास से भव्य राम बारात निकली जो गोला बाजार होते आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला गई। जहां पर भगवान राम का विवाह महोत्सव मिथिला परम्परा के अनुसार हुआ। बारात की अगुवाई महंत मिथलेश नन्दनी शरण जी महाराज कर रहे थे तो बारातियों का स्वागत आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के महंत मैथलीरमण शरण जी महाराज कर रहे थे।
प्रभु श्री राम माता जानकी के विवाह का उत्सव के आनंद में पूरी राम नगरी झूम उठी। ऐसी भव्य और अलौकिक बारात कभी-कभी देखने को मिलती है ऐसा लग रहा था कि मानो अयोध्या त्रेता युग में वापस लौट चुकी है हाथी घोड़े बैंड बाजे के साथ जहां प्रभु श्री राम की भव्य बारात निकली वही देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालु अपने आराध्य प्रभु श्री राम और माता जानकी के विवाह में मग्न होकर नाचते हुए नजर आए ऐसी अलौकिक छटा अयोध्या के अलावा और कहीं भी देखने को नहीं मिलती है।
प्रभु श्री राम की बारात में हाथी घोड़े बैंड बाजे रोड लाइट रथ पर प्रभु श्री राम की विग्रह और स्वरूप की अनुपम छटा देखते ही बनती थी। श्रद्धालुओं ने बारात का जगह-जगह पुष्प वर्षा व आरती उतारकर स्वागत किया। रामनगरी में इस दौरान जय श्री राम व हर-हर महादेव के नारे गूंजते रहे। हनुमत निवास की राम बारात में सांसद बृजभूषण शरण सिंह, पार्षद आलोक मिश्रा, संत सूर्य प्रकाश शरण समेत बड़ी संख्या में भक्त रहें।
: खूब सजा जानकी महल ट्रस्ट सीता जी के हुए प्रभु श्रीराम
Tue, Nov 29, 2022
जमकर थिरके भक्त, भगवान की बारात का दर्शन पाने को आतुर दिखे लोग
अयोध्या। जानकी महल का रामविवाह बहुत ही बेजोड़ रहा। पूरे जानकी महल में उत्साह है। उमंग है। मेले जैसा माहौल है। आकाश से पुष्प वर्षा हो रही है। महिलाएं मंगल गीत गा रही हैं। गीतों की आवाज से पूरा वातावरण गुंजायमान हो रहा है। यहां के अयोध्या के गलियां जहां भगवान राम की बारात जिस ओर जा रही थी उस ओर हजारों श्रद्धालुओं के बीच माता सीता व प्रभु राम का स्वयंवर हुआ। विवाह पंचमी के अवसर पर जानकी महल से डोला यात्रा निकली और हंसी-ठिठोली के बीच स्वयंवर संपन्न हुआ। इस मौके पर भारत से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।
‘आज मिथिला नगरिया निहाल सखियां, चारों दूल्हा में ई बड़का कमाल सखिया। माथे मढ़ि मोतिया.. कुंडल सोहे मथिया...’। विवाह पंचमी महोत्सव पर सोमवार को जानकी महल के प्रधान मंदिर परिसर सहित पूरा अयोध्या धाम विवाह गीतों से सराबोर हो रहा हैं। मिथिला विधि-विधान से स्वयंवर हुआ। इस दौरान सीता जी की सखियों ने हंसी-ठिठोली की। सखियों ने ‘जयमाला पहनाओ श्री रघुवर कोमल कमल नयन को...’ गीत गाते हुए सीता से माला पहनाने की अपील की। प्रभु श्रीराम व सीता ने एक-दूसरे को माला पहनायी। बारात की अगुवाई ट्रस्टी आदित्य सुल्तानिया खुद कर रहे थे। एक एक चीजों पर नजर जमाये आदित्य कहते है कोई कमी न रह जाये बाराती के स्वागत में बारात जाने से लेकर देर रात तक विवाह की रस्में होने तक आदित्य बारातियों के आवाभगत में लगे रहें। विवाह महोत्सव में दिलीप सुल्तानिया, नीता सुल्तानिया, अरुण बाबू सहित पूरा जानकी महल परिवार लगा रहा।
: राधा मोहन भगवान की हुई भव्य प्राण प्रतिष्ठा, हुआ विधिवत पूजन अर्चन
Mon, Nov 28, 2022
हनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज ने भगवान की आरती उतारी
श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर स्वभु द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी महाराज का हुआ कंठी चदर,जुटें संत धर्माचार्य
राधा मोहन कुंज मंदिर में मना श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, कथा के चतुर्थ दिवस पर व्यासपीठ से गजेन्द्र मोछ स्तोत्र व कृष्ण जन्म की सुनाई कथा
अयोध्या। श्री सर्वेश्वर गीता मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में नवनिर्मित भव्य श्री राधा मोहन कुंज में भगवान राधा मोहन की मूर्ति का भव्य प्राण प्रतिष्ठा किया गया। वैदिक रीति रिवाज के अनुसार विधिवत पूजन अर्चन के साथ भगवान को प्रतिष्ठित किया गया। इस मौके पर धर्म सम्राट हनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत ज्ञान दास महाराज राधा मोहन मंदिर पहुंचे जहां पर उन्होंने भगवान राधा मोहन की आरती उतार पूजन किया। इसके बाद श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर स्वभु द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी महाराज के शिष्य महंत सनत कुमार शरण ने उनका अभिनंदन किया। महंत ज्ञान दास महाराज के साथ निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्री महंत मुरली दास पूर्व प्रधानमंत्री माधव दास व संकट मोचन सेना के अध्यक्ष महंत संजय दास के साथ सैकड़ों नागा साधु मौजूद रहे। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में विशाल भंडारे का आयोजन किया जिसमें आये हुए अतिथियों का स्वागत हनुमानगढ़ी के महंत गौरीशंकर दास, तुलसी दास छावनी के महंत जनार्दन दास, वैदेही भवन के महंत रामजीशरण व राम हर्षण कुंज के संत राघव दास ने किया। महोत्सव में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें महंत डा रामानंद दास, रसिक पीठाधीश्वर महंत जनमेजय शरण, महंत वैदेही बल्लभ शरण,महंत अजुर्न दास, महंत नंदरामदास, महंत रामकुमार दास, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
राधा मोहन कुंज में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस व्यासपीठ से श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर स्वभु द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी महाराज ने भगवान कृष्ण के जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने गजेन्द्र मोछ की कथा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि गजेन्द्र मोछ स्तोत्र के पहले श्लोक से हमे यह शिक्षा मिलती है कि प्रभु का स्मरण, भक्ती कभी व्यर्थ नहीं जाती। क्योंकि गजेन्द्र ने जो प्रार्थना पिछले जन्म में सीखी उसी के कारण उसका कल्याण हुआ। वह भी जब उसका देह अहंकर मिट गया। जो मनुष्य अहंकर रहित हो जाता है उसे भगवत प्राप्ती हो जाती है। व्यासपीठ से जगद्गुरु जी ने वामन अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि जब मानव दान में पूर्णता आ जाती है, तब भगवान स्वयं याचक बन कर आ जाते हैं और चरण कमल से कल्याण करते हैं। द्वारपाल बन कर उसकी रछा करते हैंं। कथा में भक्त पहले दिन से ही आनंद में डूबकर भजनो में झूमते एवं नाचते नजर आ रहे हैं।जैसे ही कथा के दौरान भगवान कृष्ण का जन्म हुआ पूरा मंदिर जयकारों से गूंज गया। जगद्गुरु जी ने कहा कि प्रभू के आते ही माया मोह के बन्धन टूट जाते हैं और संसार रूपी कारागार से मुक्त हो जाता है। भक्ती रूप जमना में आकंठ निमग्न हो जाता है। कथा के दौरान कृष्ण जन्म उत्सव और भजनों पर श्रद्धालु जमकर नाचे। भगवान को माखन मिश्री का भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया। एक दूसरे को कृष्ण जन्म की बधाईयां दीं।