: छयलवा को दैहों चुनि चुनि गारी…
Wed, Nov 30, 2022
आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला में विवाह महोत्सव का हुआ समापन, रसिकेंद्र बिहारी सरकार को लगा छप्पन भोग
विवाह के बाद मनाया गया कलेवा, मिथिला की सखियों के गीतों पर झूमते रहे संत साधक
कुवर कलेवा छप्पन भोग के साथ श्रीसीताराम विवाह महोत्सव का हुआ समापन
श्रीरामचरित मानस का पारायण भी विवाह प्रसंग तक करने की परम्परा कोहबर में ही विराजते हैं प्रेम में बंधे दूल्हा सरकार
अयोध्या। वैष्णव नगरी अयोध्या में उपासना की दो अलग-अलग शाखाएं हैं। इन शाखाओं में दास परम्परा और सख्य परम्परा शामिल है। मिथिला धाम से अपना रिश्ता जोड़ने वाले मधुरोपासक कहलाते हैं और सख्य भाव से राम व सीता के रूप में दूल्हा-दुलहिन सरकार की उपासना करते हैं। इन दोनों ही परम्पराओं के उपासक संत रामानंद सम्प्रदाय के प्रथम आचार्य के रूप में देवी सीता जी को ही स्वीकारते हैं। गुरु वंदना में सीतानाथ समारम्भाम् रामानंदार्य मध्यमाम अस्मादचार्य पर्यन्ताम वंदे श्रीगुरु परम्पराम् इसी श्लोक का वाचन किया जाता है। फिर भी दास परम्परा के उपासक राजा राम व हनुमान जी की उपासना दास यानी कि सेवक भाव से करते हैं। इसके समानान्तर सख्य भाव के उपासक सखी भाव की गुप्त उपासना करते हैं। इन संतों की मान्यता है कि जनकपुर में विवाह के बाद भगवान दुलहिन सरकार के साथ दूल्हा सरकार के रूप में ही विराजते हैं। यही कारण है कि ये उपासक श्रीरामचरित मानस के पारायण के दौरान विवाह प्रसंग तक का ही पारायण करते हैं। पूजन-अर्चन के दौरान सिर पर पल्लू रखकर त्रिरयोचित भाव से ही आराध्य को रिझाते हुए उनसे अनुनय-विनयपूर्वक प्रत्येक क्रिया करते हैं।
रामनगरी में पिछले पांच दिनों से चल रहे राम विवाह महोत्सव में आज आखरी दिन कलेवा का कार्यक्रम किया गया। जिसमे भगवान राम और तीनो भाइयो को उपहार देकर विदाई के समय गाली देकर विदा किए जाने का कार्यक्रम किया गया। भगवान की जनक पूरी से विदाई के लिए महिलाएं भगवान राम के अचर धराई किया गया जिसमें दूरदराज से अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान राम सभी भाइयो को विभिन्न प्रकार के उपहार दिया गया। इसके साथ ही विदाई कार्यक्रम के दौरान भगवान के भजनों पर श्रद्धालुु झूमते नाचते रहे।
इस परम्परा को पुष्पित और पल्लवित करने का श्रेय आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किला के संस्थापक आचार्य स्वामी युगलानन्य शरण महाराज जी को दिया जाता है। उसी परम्परा का आज भी निर्वहन बड़े श्रद्धा भाव के साथ किया जा रहा है। आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किला में श्री सीताराम विवाह महोत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया। पूरे रस्म रिवाजों के बीच मिथिला पद्धति में मिथिला की सखियों ने गायन वादन कर पूरे उत्सव में चार चांद लगा दिया। महोत्सव का संयोजन कर रहे किलाधीश श्री महंत मैथिली रमण शरण ने किया। प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमत निवास से महंत मिथिलेश नंदनी शरण की अगुवाई में भव्य श्री राम बारात निकली जो लक्ष्मण किला गई जहां पर विवाह महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। अगले दिन कुंवर कलेवा का आयोजन किया गया। जिसमें भगवान को छप्पन भोग लगाकर स्वरूप सरकार को कलेवा कराया गया, कलेवा के मध्य मिथिला की सखियों की रसभरी गाली पूरे उत्सव को और भी चटक कर दिया।
किलाधीश श्री महंत मैथिली रमण शरण ने बताया कि अयोध्या में वैदिक विधि द्वारा विवाह उत्सव सम्पन हुआ और आज सुबह से कलेवा का कार्यक्रम किया गया। जिसमे विभिन्न प्रकार के व्यंजनों से भगवान को भोग लगाया गया। अयोध्या में वैदिक विधि व लौकिक विधि द्वारा विवाह उत्सव हुआ और इसी क्रम में आज सुबह से कलेवा का कार्यक्रम किया गया।इस कार्यक्रम में कई प्रान्तों से श्रद्धालु आज अयोध्या आए है। तथा बताया कि भगवान को हम लोग कुछ नहीं दे सकते हैं। वो तो सबका भरन पोषण करते हैं। लेकिन आज यह कार्य एक उपासना के रूप में हम लोग करते हैं।
मिथिला की सखियों ने छयलवा को दैहों चुनि चुनि गारी... आदि गीतों ने पूरे परिसर में रसभर दिया। इसी क्रम में कलेवा का कार्यक्रम किया गया।और हजारों श्रद्धालु इस महोत्सव के दौरान झूमते रहे। परे कार्यक्रम की देखरेख किलाधीश के शिष्य सूर्य प्रकाश शरण ने किया। कार्यक्रम में सांसद बृजभूषण शरण सिंह सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम से संभव: द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य
Wed, Nov 30, 2022
कहा, गौ माता की सेवा, गायत्री का जाप और गीता का पाठ सभी को अवश्य करना चाहिए
अतिथियों का स्वागत राधामोहन शरण देवाचार्य जी के शिष्य महंत सनत कुमार शरण ने परम्परागत तरीकें से किया
अयोध्या। जानकी घाट स्थित नवनिर्मित भव्य श्री राधा मोहन कुंज मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में श्रीमद् भागवत कथा का उल्लास अपने चरम पर है। कथा के छटवें दिवस श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर स्वभु द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि धनवान व्यक्ति वही है जो अपने तन, मन, धन से सेवा भक्ति करे वही आज के समय में धनवान व्यक्ति है। परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम के द्वारा ही संभव हो सकती है। पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए जगद्गुरु जी ने कहा कि पूतना राक्षसी ने बालकृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी। श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पुतना का वध कर उसका कल्याण किया। माता यशोदा जब भगवान श्री कृष्ण को पूतना के वक्षस्थल से उठाकर लाती है उसके बाद पंचगव्य गाय के गोब, गोमूत्र से भगवान को स्नान कराती है। राधामोहन शरण जी ने कहा सभी को गौ माता की सेवा, गायत्री का जाप और गीता का पाठ अवश्य करना चाहिए। गाय की सेवा से 33 करोड़ देवी देवताओं की सेवा हो जाती है। भगवान व्रजरज का सेवन करके यह दिखला रहे हैं कि जिन भक्तों ने मुझे अपनी सारी भावनाएं व कर्म समर्पित कर रखें हैं वे मेरे कितने प्रिय हैं। भगवान स्वयं अपने भक्तों की चरणरज मुख के द्वारा हृदय में धारण करते हैं। उन्होंने कहा कि पृथ्वी ने गाय का रूप धारण करके श्रीकृष्ण को पुकारा तब श्रीकृष्ण पृथ्वी पर आये हैं। इसलिए वह मिट्टी में नहाते, खेलते और खाते हैं ताकि पृथ्वी का उद्धार कर सकें। गोपबालकों ने जाकर यशोदामाता से शिकायत कर दी मां तेरे लाला ने माटी खाई है यशोदामाता हाथ में छड़ी लेकर दौड़ी आयीं। अच्छा खोल मुख। माता के ऐसा कहने पर श्रीकृष्ण ने अपना मुख खोल दिया। श्रीकृष्ण के मुख खोलते ही यशोदाजी ने देखा कि मुख में चर-अचर सम्पूर्ण जगत विद्यमान है। आकाश, दिशाएं, पहाड़, द्वीप, समुद्रों के सहित सारी पृथ्वी, बहने वाली वायु, वैद्युत, अग्नि, चन्द्रमा और तारों के साथ सम्पूर्णज्योतिर्मण्डल, जल, तेज अर्थात प्रकृति, महतत्त्व, अहंकार, देवगण, इन्द्रियां, मन, बुद्धि, त्रिगुण, जीव, काल, कर्म, प्रारब्ध आदि तत्त्व भी मूर्त दीखने लगे। पूरा त्रिभुवन है, उसमें जम्बूद्वीप है, उसमें भारतवर्ष है, और उसमें यहब्रज, ब्रज में नन्दबाबा का घर, घर में भी यशोदा और वह भी श्री कृष्ण का हाथ पकड़े। बड़ा विस्मय हुआ माता को। श्री कृष्ण ने देखा कि मैया ने तो मेरा असली तत्त्व ही पहचान लिया है। श्री कृष्ण ने सोचा यदि मैया को यह ज्ञान बना रहता है तो हो चुकी बाललीला, फिर तो वह मेरी नारायण के रूप में पूजा करेगी। न तो अपनी गोद में बैठायेगी, न दूध पिलायेगी और न मारेगी। जिस उद्देश्य के लिए मैं बालक बना वह तो पूरा होगा ही नहीं। जगद्गुरु जी ने कहा कि यशोदा माता तुरन्त उस घटना को भूल गयीं। वृंदावन की लीला का और कलयुग के प्रत्यक्ष देवता श्री गिर्राज भगवान की महिमा में बताया जो एक बार दर्शन करता गोवर्धन नाथ उसकी सभी मनोकामना पूर्ण करते है। कथा से पूर्व व्यासपीठ की पूजा यजमान ने की। आये हुए अतिथियों का स्वागत राधामोहन शरण देवाचार्य जी के शिष्य महंत सनत कुमार शरण ने परम्परागत तरीकें से किया। कथा में तुलसीदास जी की छावनी के महंत जनार्दन दास, वैदेही भवन के महंत रामजीशरण, राम हर्षण कुंज से जुड़े संत राघव दास, नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, संजय शुक्ला सहित बड़ी संख्या में संत साधक व भक्त मौजूद रहें।
: कबड्डी के महिला वर्ग में शारीरिक शिक्षा विभाग विजयी
Wed, Nov 30, 2022
अवध विश्वविद्यालय की एथलेटिक्स प्रतियोगिता का शुभारम्भ गुरुवार
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद द्वारा आयोजित अन्तरविभागीय खेलकूद प्रतियोगिता के दूसरे दिन छात्र-छात्राओं के बीच कबड्डी प्रतियोगिता कराई गई। जिसमें विभिन्न टीमों ने हिस्सा लिया। महिला वर्ग में शारीरिक शिक्षा विभाग व बीटेक के बीच फाइनल मैच हुआ। इसमें शारीरिक शिक्षा विभाग 27 पॉइंट अर्जित कर विजयी रहा। वहीं बीटेक की टीम 19 पॉइंट पाकर दूसरे स्थान पर रही। इस प्रतियोगिता के पुरूष वर्ग में आठ व महिला वर्ग में चार टीमों ने हिस्सा लिया। जिसमें शारीरिक शिक्षा विभाग 27 पॉइंट से विजयी रहा। वहीं कबड्डी पुरूष वर्ग की प्रतियोगिता जारी है। दूसरी ओर की्रड़ा परिषद द्वारा आयोजित अन्तर महाविद्यालयीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता का शुभारम्भ 01 दिसम्बर को दोपहर 12 बजे डॉ. भीमराव अम्बेडकर इंटरनेशनल स्टेडियम ढाभा सेमर में होगा। प्रतियोगिता का उद्घाटन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल द्वारा किया जायेगा। विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद सचिव प्रो. आशीष प्रताप सिंह ने बताया कि अन्तर महाविद्यालयीय एथलेटिक्स पुरूष व महिला वर्ग की प्रतियोगिता 01 दिसम्बर से प्रारम्भ होकर 03 दिसम्बर तक चलेगी। इसमें विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों के प्रतिभागी हिस्सा लेंगे।