: दोबारा सर्वे कर उचित मुवाअजा का दिलाया भरोसा
Tue, Nov 29, 2022
व्यापारियों से डोर-टू-डोर सम्पर्क कर रहा प्रशासनिक अमला
अयोध्या।रामपथ कार्ययोजना मे प्रशासन द्वारा मनमानी के विरोध वा विभिन्न मागो को लेकर चल रहे आन्दोलन मे लगातार दो दिन की बंदी व धरने की घोषणा से प्रशासन दबाव में आया। सुबह 10बजे जिलाधिकारी स्वयं मय प्रशासनिक अमला एव व्यापारी प्रतिनिधियो के साथ नयाघाट अयोध्या में सैकड़ो व्यापारी से डोर टू डोर मिलकर समस्याओं को समझा। व्यापारीयों को कम मुवाअजे की बात पर एवं न्यूनतम 5 लाख से अधिकतम 20 लाख की माग पर दोबारा सर्वे कर व्यापारियों की उचित मुवाअजा का भरोसा दिया। साथ ही एक सिरे बुलडोजर से तोड़ने के बजाय व्यापारियों द्वारा स्वयं तोड़ने की वा कुछ दिन और समय की मांग पर जिलाधिकारी महोदय दोनो मांग को मानते हुए 15दिसबंर तक स्वयं तोड़ लेने का मौका दिया,रामगुलैला के 16व्यापारी भी मिले उनको संतुष्ट करने के लिए एडीएम प्रशासन से बोले। फसाड/डिजाइन आदि मे एकरूपता का आश्वासन दिया बताते चले भक्ति पथ पर बार बार डिजाइन बदल जा रही जिससे फसाड आदि को तोड़कर नया डिजाइन बनवाना पड़ रहा है।मकानमालिको/किरायेदार से विवाद को निपटाने के प्रशासन व्यापारी प्रतिनिधियो एव मकानमालिको की कमेटी एक दो दिन मे बनाने का आश्वासन दिया। रामपथ की चौड़ाई 20 मीटर लिखित मांग को मौखिक ही दिया। नन्द कुमार गुप्ता नंदू के कहा रामपथ निर्माण मे आज जिलाधिकारी द्वारा डोर टू डोर समस्याओं को जानकर अधिकतर गतिरोध को दूर किया गया किये गये वादे के लिखित मांग,5-20 लाख मुवाअजे की मांग आदि कुछ मुद्दो पर गतिरोध अभी बना है यदि उपरोक्त मुद्दे पर जल्द ही निराकरण नही किया गया तो व्यापार मंडल फिर से आन्दोलन के लिए बाध्य होगा जिसकी सारी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। पंकज गुप्ता ने कहा प्रशासन के सकारात्मक पहल का स्वागत है हमे पूर्ण विश्वास है कि अब प्रशासन मनमानी के बजाय हम लोगो की हितो को देखते सहानुभूति के कार्ययोजना को बढायेगी। प्रशासन के साथ मे प्रमुख रूप से नन्द कुमार गुप्ता“ नंदू“ पंकज गुप्ता नन्द लाल गुप्ता,विनोद श्रीवास्तव, बृजकिशोर पांडेय,शोयब खान,विनोद पाठक,अवधेश यादव,श्याम सुन्दर, अनिल मोर्या ,आनद कसौधन,अश्वनी गुप्ता आदि शामिल रहे।
: श्री सीताराम विवाह जगत को एक नया आयाम प्रदान करता है: देवेंद्र प्रसादाचार्य
Tue, Nov 29, 2022
चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राजमहल बड़ा स्थान में रामकलेवा के साथ सीताराम विवाह महोत्सव का हुआ समापन
अयोध्या। रामनगरी में चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ महल यानी भगवान श्रीराम के पिता दशरथ का महल स्थित है, जिसे आज एक सिद्धपीठ माना जाता है। मान्यता के अनुसार, राजा दशरथ ने इस महल की स्थापना की थी। यहां पर श्रीराम और उनके भाइयों ने बाललीलाएं की थीं।इस स्थान पर श्री वैष्णव परंपरा की प्रसिद्ध पीठ एवं बिन्दुगादी की सर्वोच्च पीठ भी स्थित है। सिद्ध संत बाबा श्री रामप्रसादाचार्य जी महाराज ने यहां पुनः मंदिर की स्थापना की और वर्तमान स्वरूप प्रदान किया। सीताराम महोत्सव में आयोजित रामकथा के समापन दिवस पर व्यासपीठ से कथा का महत्व बताते हुए तन तुलसी मिथिला पीठाधीश्वर स्वामी श्री विष्णुदेवाचार्य जी महाराज कहते है कि अनंत गुणों से युक्त भगवान और दिव्य गुणों से युक्त मैया किशोरी का विवाह हुआ। एक भारतीय संस्कृति परंपरा दोनों के मिलने से अक्षर हुई और उस समस्त मानवीय मूल्यों की स्थापना हुई। कथा की अध्यक्षता करते हुए दशरथ राजमहल बड़ास्थान के बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य जी ने कहा कि श्री सीताराम विवाह जगत को एक नया आयाम प्रदान करता है और बेटी के विदाई के समय पिता की सीख कि पति को देवता मानकर उसकी पूजा करना यही भारतीय संस्कृति को पूरी तरह से पुष्ट बनाती है। उन्होंने कहा कि ने कहा कि आज पूरे विश्व में एक दिव्य आदर्श विवाह के रूप में यह किसी को माना जा सकता है तो वह श्री सीताराम विवाह। इसके बाद मंदिर में चल रहे विवाह महोत्सव का भी भव्य समापन रामकलेवा के साथ हुआ। जिसमें दशरथमहल बड़ास्थान के बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य जी ने भगवान को कलेवा कराया। कार्यक्रम के संयोजक बिंदुगाद्याचार्य के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन व सुंदर सदन पीठाधीश्वर महंत कृपालु राम भूषण दास जी महाराज ने भी भगवान के स्वरुपों को कलेवा कराया। यह सारा आयोजन दशरथमहल बड़ास्थान के बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य की अध्यक्षता और श्री महाराज जी के कृपा पात्र शिष्य महंत कृपालु राम भूषण दास जी महाराज के संयोजन में हुआ। इस मौके पर दशरथ राज महल परिवार के संत साधक व शिष्य परिकर सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहे।इस मौके पर सांसद बृजभूषण शरण सिंह, सुदीप भूषण सिंह, महंत बलराम दास, अयोध्या प्रभारी महेंद्र त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में संत साधक व शिष्य मौजूद रहें।
: श्रीमद् भागवत कथा है ज्ञान गंगा : राधामोहन शरण देवाचार्य
Tue, Nov 29, 2022
जिस स्वरूप में देखना चाहते हो उसी में दर्शन देते हैं भगवान, बस आपमें आस्था हो: अधिकारी राजकुमार दास
श्री सर्वेश्वर गीता मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान मेंराधा मोहन कुंज मंदिर में हो रही अष्टोत्तरशत श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव
अयोध्या। भगवान की कोई आकृति नहीं होती है। भक्त जिस भाव से प्रभु में अपनी आस्था रखता है भगवान उसी स्वरूप में भक्त के समक्ष प्रकट होते हैं।यह बात मंगलवार को श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर स्वभु द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के पंचम दिवस की कथा में कही।देवाचार्य जी ने कहा कि मनुष्य को प्रतिदिन ईश्वर के भजन करना चाहिए। इससे मनुष्य को आत्मिक शांति व शुद्धता मिलती है। जगद्गुरू जी ने भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया तथा भजनों की प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि मां सरयू पावन पवित्र नदी है। सरयू में स्नान से मनुष्य को पापकर्मों से मुक्ति मिलती है। भगवान कृष्ण ने भी यमुना का उद्धार किया था जो कि बाद में चलकर जन-जन की आस्था का केन्द्र बनी।
जानकी घाट स्थित नवनिर्मित भव्य श्री राधा मोहन कुंज मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा के पंचम दिवस पर जगद्गुरू जी ने कहा कि सच्चा धन भगवान का नाममात्र है। कलियुग में नाम और दान का बहुत अधिक महत्व है। अधिक से अधिक भगवान के नाम का स्मरण करे और दान करके घमंड़ न करे। जीवन में अच्छे संकल्प के साथ कार्य करें। स्वामी जी कहते है कि मानव को जीवन में हमेशा गौ माता की सेवा करनी चाहिए। गौ माता के शरीर में 36 करोड़ देवी देवताओं का निवास करते हैं। गाय का संरक्षण करने से मनुष्य का कल्याण हो जाता है। कथाव्यास जगद्गुरू जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान गंगा है। इसे सुनने के लिए देव भी आतुर रहते हैं।उन्होंने बताया कि सुनीति के मार्ग को जो मनुष्य छोड़कर सुरुचि के मार्ग पर चलता है निश्चित ही उसको अंत में पछताना पड़ता है। इसलिए हर मनुष्य को हर स्थिति में सुनीति के मार्ग पर अवश्य चलना चाहिए।
आज की कथा में प्रसिद्ध पीठ श्री रामबल्लाभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास महाराज पहुंचे और उन्होंने राधामोहन शरण देवाचार्य का आशीर्वाद लिया। अपने सम्बोधन में अधिकारी राजकुमार दास ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास महाराज ने रामचरित मानस में स्पष्ट किया है कि जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी अर्थात भगवान को पिता तुल्य मानने वाले को पिता-माता के समान मानने वाले को माता भाई व सखा के रूप में मानने वाले को भाई व सखा के सहित जैसे स्वरूप में देखना चाहता है उसी स्वरूप में भगवान के भक्त को दर्शन होते हैं। आये हुए अतिथियों का स्वागत राधामोहन शरण देवाचार्य जी के शिष्य महंत सनत कुमार शरण ने परम्परागत तरीकें से किया। कथा में तुलसीदास जी की छावनी के महंत जनार्दन दास, वैदेही भवन के महंत रामजीशरण, राम हर्षण कुंज से जुड़े संत राघव दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक व भक्त मौजूद रहें।