: प्रेरक है स्वामी विश्वनाथ प्रसादाचार्य की सरलता: देवेंद्रप्रसादाचार्य
Sat, Dec 3, 2022
दशरथ राज महल बड़ा स्थान के पूर्वाचार्य विश्वनाथ प्रसादाचार्य की 25वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके व्यक्तित्व-कृतित्व के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की गई
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राज महल बड़ा स्थान के पूर्वाचार्य विश्वनाथ प्रसादाचार्य जी की 25वीं पुण्यतिथि विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मनाई गई। मंदिर के वर्तमान पीठाधिपति बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य की अध्यक्षता में विश्वनाथ प्रसादाचार्य की प्रतिमा का पूजन-अर्चन किया गया। श्रद्घांजलि समारोह में संत-धर्माचार्यों ने विश्वनाथ प्रसादाचार्य को नमन करते हुए उन्हें बिंदु संप्रदाय का गौरव बताया। पुण्यतिथि पर श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। दशथ राज महल के वर्तमान महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य के संयोजन में पूर्वाह्न पूर्वाचार्य को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके व्यक्तित्व-कृतित्व के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की गई। देवेंद्रप्रसादाचार्य ने अपने गुरु एवं पूर्वाचार्य को याद करते हुए कहा, उनकी सरलता-साफगोई आज भी प्रेरित करती है और उनसे मिला वात्सल्य अविस्मरणीय है। इस दौरान साकेतवासी आचार्य को निकट से जानने वाले बड़ी संख्या में संत-महंत मौजूद रहे और उन्होंने अनेक संस्मरण सुनाकर महंत विश्वनाथप्रसादाचार्य के व्यक्तित्व में निहित उदारता और सच्चाई बयां की। महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य ने कहा कि सद्गुरुदेव द्वारा स्थापित परंपराओं का सम्यक निवर्हन कर मंदिर में सतत धर्म ध्वजा फहराती रहे इसके लिए हम प्रतिबद्घ रहते हैं। आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के महंत मैथलीरमण शरण ने कहा कि वे बिंदु संप्रदाय के गौरव थे। संत समाज सदैव उनसे प्रेरणा लेता रहेगा। जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी राम दिनेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि उनकी स्मृति सदैव धर्म के मार्ग पर अग्रसर रहने के लिए प्रेरित करती है।बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन व सुंदर सदन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास महाराज ने श्रद्घांजलि में पहुंचे संतों का स्वागत सम्मान किया।श्रद्धांजलि समारोह का दूसरा चरण भंडारा के नाम रहा। इस मौके पर बड़ी संख्या में संत साधक व शिष्य मौजूद रहें।
: श्रीरामजन्मभूमि के उद्धारक बाबा अभिराम दास काे संताें ने किया नमन
Sat, Dec 3, 2022
41वीं पुण्यतिथि श्रीरामजन्मभूमि समर्पित बाबा अभिराम दास वेद वेदांग शिक्षण-प्रशिक्षण विद्यापीठम, राजघाट पर मनाई गई
अयाेध्या। श्रीरामजन्मभूमि के उद्धारक बाबा अभिराम दास महाराज काे संताें ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। शनिवार को उनकी 41वीं पुण्यतिथि श्रीरामजन्मभूमि समर्पित बाबा अभिराम दास वेद वेदांग शिक्षण-प्रशिक्षण विद्यापीठम, राजघाट उद्यान के पीछे मनाई गई। इस माैके पर एक श्रद्धांजलि सभा आयाेजित हुई, जिसमें संताें ने पूर्वाचार्य के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किया और उनके कृतित्व पर प्रकाश भी डाला। साकेतवासी महंत के शिष्य महंत धर्मदास हनुमानगढ़ी ने कहा कि बाबा अभिराम दास महाराज भजनानंदी संत थे। उनका व्यक्तित्व बड़ा ही उदार रहा। सरलता ताे उनमें देखते ही झलकती थी। वह गाै, संत सेवी रहे। रामनगरी के सभी संत-महंत उनका आदरपूर्वक सम्मान करते थे। वह विलक्षण प्रतिभा के धनी संत रहे। उन्हें श्रीरामजन्मभूमि उद्धारक के रूप में जाना जाता है। राममंदिर आंदोलन में उनकी अग्रणी भूमिका रही। रामजन्मभूमि के लिए उन्होंने अपना सर्वस्य न्याैछावर कर दिया। राममंदिर के प्रति उनके द्वारा किए गए त्याग काे कभी भुलाया नही जा सकता है। राममंदिर आंदोलन में उनका नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज हाे गया है। आज उन्हीं की त्याग, तपस्या का प्रतिफल है कि श्रीरामजन्मभूमि पर दिव्य मंदिर का निर्माण हाे रहा है। जल्द ही रामलला भव्य भवन में विराजमान हाेंगे। जहां हम सभी संत-महंत, रामभक्त उनका दर्शन-पूजन व आरती कर सकेंगे। इस अवसर पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी व निर्माेही अखाड़ा महंत दिनेंद्र दास, खड़ेश्वरी मंदिर महंत रामप्रकाश दास, इकबाल अंसारी, रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट अध्यक्ष स्वामी दिलीप दास त्यागी, याेगाचार्य महेश याेगी, समाजसेवी विकास श्रीवास्तव, विदुर, बाबा सुखदेव दास, रवि नागा, नीरज शास्त्री, बाबा सुखदेव दास, रामरतन साहनी आदि उपस्थित रहे।
: प्रथम पुण्यतिथि पर महंत कन्हैयादास रामायणी को संतों ने किया नमन
Sat, Dec 3, 2022
श्रीरामजन्मभूमि पर रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण हाे रहा है, भव्य राममंदिर निर्माण ही महाराजश्री काे सच्ची श्रद्धांजलि है: महंत डॉ. संताेष दास
अयाेध्या। गुरूदेव महंगुरूदेव महंत कन्हैयादास रामायणी महाराजत कन्हैयादास रामायणी महाराज युग पुरूष थे। उनका आशीर्वाद हम लोग निरंतर प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने अपनी प्रतिभा, विद्वता, वाणी, त्याग, समर्पण व साधना के माध्यम से सम्पूर्ण भारतवर्ष में अलख जगाया और श्रीरामजन्मभूमि निर्वाण आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। आज उनका सपना पूरा हो रहा है। उन्हीं महापुरूषों की देन है कि श्रीरामजन्मभूमि पर रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण हाे रहा है। भव्य राममंदिर निर्माण ही महाराजश्री काे सच्ची श्रद्धांजलि है। उक्त बातें सनकादिक आश्रम देवराहा बाबा स्थान, रामकाेट के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत डॉ. संताेष दास महाराज ने कही। उन्होंने बताया कि शनिवार को आश्रम में गुरूदेव महंत कन्हैया दास रामायणी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि मनाई गई। संताें ने उन्हें शिद्दत से याद किया। इस माैके पर मंदिर प्रांगण में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा में अयाेध्यानगरी के विशिष्ट संत-महंत एवं धर्माचार्यों ने साकेतवासी महंत के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। संताें ने उनके कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। महंत संतोष दास ने कहा कि गुरूदेव अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष रहे। वह गाै तथा संत सेवी थे। उन्होंने गरीब, निर्धन व असहायों की हमेशा मदद किया। सेवा काे ही अपना धर्म माना। सदैव सेवा प्रकल्पाें से जुड़े रहे। उनके नेतृत्व में कई सेवा प्रकल्प के कार्य संचालित हुए। उन्होंने पूरे भारत देश में श्रीराम भाव का प्रचार-प्रसार किया। सभी काे रामभाव सुनाया। गुरूदेव हम सबके बीच में नही हैं। लेकिन उनकी यश और कीर्ति हम लाेगाें के साथ हमेशा रहेगी। अंत में वर्तमान महंत ने आए हुए संत-महंत व विशिष्टजनाें काे अंगवस्त्र भेंटकर उनका स्वागत-सम्मान किया। इस अवसर पर काफी संख्या संत-महंत एवं भक्तगणों ने प्रसाद पाया। पुण्यतिथि पर जगन्नाथ मंदिर के महंत राघव दास, अंजनी गुफा महंत राममंगल दास रामायणी, रामचरित मानस भवन महंत अर्जुन दास, श्रीरामाश्रम पीठाधीश्वर महंत जयराम दास, लालसाहेब दरबार महंत रामनरेश शरण, रामदास व अमर दास, अधिकारी मनीष दास, छत्तीसगढ़ आश्रम महंत रामेश्वर दास, चतुर्भुजी मंदिर महंत शैलेष दास, पहलवान अवधेश दास हनुमानगढ़ी, रवि नागा, गाेवर्धन दास, नागा विजय दास, गाैरव श्रीवास्तव, संतदास, पीयूष श्रीवास्तव आदि माैजूद रहे।