: राम मंदिर के गर्भगृह में लग रहे पिंक स्टोन के खंभे
Sat, Nov 26, 2022
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जारी की नई तस्वीरें
अयोध्या। श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मन्दिर निर्माण प्रगति की ताजा तस्वीरें जारी की है जिसमें बताया गया है कि गर्भगृह की दीवार में पिंक सैंड स्टोन से बने नक्काशीदार स्तंभ लगने शुरू हो गए हैं। राम मंदिर का निर्माण पूरी गति से हो रहा है जिसमें रामलला 15 जनवरी 2024 को विराजमान हो जाएंगे। ट्रस्ट महासचिव चंपत राय का कहना है कि बैठक कर दिसंबर 2023 तक भूतल निर्माण का कार्य पूरा किए जाने के साथ ही जनवरी 2024 में भगवान श्री रामलला को विराजमान कराए जाने की घोषणा की गई थी। जिसको लेकर एलएंडटी व टाटा के इंजीनियर व वर्कर लगातार 24 घंटे कार्य में जुटे हैं। अब तक मंदिर निर्माण में कुल 60 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। ट्रस्ट सदस्य डॉ अनिल मिश्रा का कहना है कि गर्भगृह, गुड मंडप व रंग मंडप की दीवारों का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। साथ ही नीचे से पत्थरों की सिलाई भी लग चुकी है और अब ऊपरी हिस्से के पत्थर लगना प्रारंभ हो गया है। मंदिर के भूतल में लगने वाले कुल 166 पिलर के बेस में पत्थरों को लगाए जाने का 75 फीसदी कार्य पूरा हो गया है। अब ऊपर के पत्थर लगाए जा रहे हैं। इसके बाद 20 फुट ऊंचे भूतल के ऊपर छत लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित जन्मभूमि परिसर में भूतल पर पूर्व-पश्चिम दिशा में 380 फीट लंबा, उत्तर-दक्षिण में 250 फीट चौड़ा बन रहा है। मंदिर में राजस्थान के बलुआ पत्थर से बने कुल 392 स्तंभ लगाए जाएंगे।
: निष्काम भक्ति से परमात्मा की प्राप्ति जरूर होती है: देवाचार्य जी
Sat, Nov 26, 2022
रामनगरी में सोमवार को प्रतिष्ठित होगे राधा मोहन भगवान, राधा मोहन कुंज में चहुंओर उत्सव की धूम
251 वैदिक आचार्य कर रहें गीता का पाठ, नवनिर्मित भव्य श्री राधा मोहन कुंज सर्वेश्वर गीता मंदिर ट्रस्ट बह रही श्रीमद् भागवत कथा की रसधार
अयोध्या। श्री सर्वेश्वर गीता मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में नवनिर्मित भव्य श्री राधा मोहन कुंज का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का उल्लास चहुंओर छाया है। राधा मोहन कुंज में इन दिनों श्रीमद् भागवत कथा की रसधार बह रही है। व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर स्वभु द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी महाराज कर रहें है। साथ ही 251 वैदिक आचार्य गीता का मूल पाठ कर रहें है जो आकर्षण का केंद्र है। महोत्सव का मुख्य उत्सव सोमवार 28 नवंबर को होगा जिसमें भगवान राधा मोहन की भव्य प्राण प्रतिष्ठा होगी। ये रामनगरी अयोध्या का अलौकिक मंदिर होगा जिसमें भगवान राधा कृष्ण की भव्य मूर्ति प्राण प्रतिष्ठित होगी।
कथा के द्धितीय दिवस पर कथाव्यास द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी ने कहा कि सत्यं परमं धीमहि इस संसार में एक ईश्वर ही सत्य है जो दिख रहा है वह केवल वह प्रभु की माया है। भागवत की उत्पत्ति के बारे में बताया सुखदेव भगवान को श्री व्यास जी महाराज ने भागवत को प्रदान किया वही भागवत कथा आज हम सब को सुनने को मिल रही है। जगद्गुरु जी के बताया कि परमात्मा इस संसार में अपने भक्तों की रक्षा के लिए अनेक, अनेक अवतार लेकर आते भागवत में चौबीस अवतारो के माध्यम से बताया। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों के लिए सबकुछ करने के लिए तैयार रहते है। उदाहरण में पांडबो के लिए भगवान सारथी बने। महाभारत की कथा में के बारे में भी स्वामीजी ने कहा कि कोरव और पांडवों के युद्ध में विजय सत्य की ही होती है। जिसके रक्षक प्रभु होते हे उसे इस संसार में कोई नहीं हरा सकता। स्वामीजी ने पांडवों की कथा को बताया अपने कल्याण के लिए परमात्मा की भक्ति ही एक उपाय हे भक्ति को दो प्रकार की बताया निष्काम भक्ति और सकाम भक्ति। निष्काम भक्ति से परमात्मा की प्राप्ति जरूर होती है। कार्यक्रम के संयोजक श्रीमद् जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर स्वभु द्वाराचार्य श्री राधामोहन शरण देवाचार्य जी के कृपापात्र शिष्य महंत सनत कुमार शरण जी ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की इस पावन नगरी में श्रीसर्वेश्वर गीता ट्रस्ट द्वारा यह ऐतिहासिक व भव्य दिव्य भगवान राधा मोहन सरकार की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव हो रहा है। जिसमें पूरे देश से हजारों संत साधक शामिल हुए हैं।इस मंदिर के द्वारा भगवान की अष्टयाम सेवाएं होंगी अन्य क्षेत्र चलेगा साथ ही ऐसे तमाम सामाजिक कार्य किए जाएंगे।
: इच्छाओं की पूर्ति के साधन के रूप में धर्म करता हो वह पुण्यात्मा: राधेश्याम
Sat, Nov 26, 2022
अयोध्या। जिसके शील में अर्थात सहज स्वभाव में धर्म हो वह धर्मात्मा है। और जो अपनी अनन्त इच्छाओं की पूर्ति के साधन के रूप में धर्म करता हो वह पुण्यात्मा है।उक्त बातें प्रख्यात कथावाचक राधेश्याम शास्त्री जी ने कौशलपुरी कालोनी फेज 1 पानी टंकी के निकट आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के द्धितीय दिवस कही।राधेश्याम शास्त्री ने कहा कि धर्मात्मा और पुण्यात्मा में बडा़ अन्तर होता है। रावण ,कंस, दुर्योधन, प्रतापभानु , ये सब पुण्यात्मा तो हैं पर धर्मात्मा नही हैं। उन्होंने कहा कि दशरथ जी, नन्द यशोदा, देवकी वसुदेव, भीष्म, विदुर धर्मात्मा हैं। धार्मिक व्यक्ति का अर्थ है समर्पित व्यक्ति।उसकी अपनी कोई इच्छा नहीं है। अगर जीवन दुयोंधन के पक्ष में खड़ा कर दे, तो वह वहीं खड़ा हो जाएगा। कथाव्यास राधेश्याम जी ने कहा कि अगर जीवन अर्जुन के पक्ष में खड़ा कर दे, तो वह वहीं खड़ा हो जाएगा। धार्मिक व्यक्ति तो निमित्त—मात्र है। इसलिए जहां परमात्मा की इच्छा हो, वहीं खड़ा हो जाता है। उसने अपनी तरफ से निर्णय लेना छोड़ दिया है।