: श्रीकृष्ण में अनुराग और वैराग्य उनमें दोनों घटित हैं: राधेश्याम शास्त्री
Tue, Nov 22, 2022
भागवत कथा का छठा दिवस मणिराम दास छावनी में
अयोध्या। रामनगरी के मणिराम छावनी के योग एवं प्राकृतिक चिकित्सालय में इन दिनों भागवत कथा की अमृत वर्षा हो रही है। व्यासपीठ से कथा की रसमयी वर्षा प्रख्यात कथावाचक राधेश्याम शास्त्री जी कर रहें है। कथा के छठवें दिवस कथाव्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण में भगवत्ता की अभिव्यक्ति बहुत अनूठी है। अभिव्यंजक स्थल के अनूरूप ही अभिव्यक्ति भी होती है। द्वापर युग में अभिव्यंजक स्थल की अनुकूलता के कारण ही ऐसी भगवत्ता की अभिव्यक्ति हो सकी है। श्री कृष्ण हुए तो अतीत में, लेकिन हैं भविष्य के। अभी भी कृष्ण मनुष्य की समझ से बाहर हैं। भविष्य में ही यह संभव हो पाएगा कि कृष्ण को हम समझ पाएं। राधेश्याम शास्त्री जी ने कहा कि सबसे बड़ा कारण तो यह है कि कृष्ण अकेले ही ऐसे हैं जो धर्म की परम गहराइयों और ऊंचाइयों पर होकर भी मुस्कुरा रहे हैं परम प्रसन्न हैं। अनुराग और वैराग्य उनमें दोनों घटित हैं। उन्होंने कहा कि कृष्ण नृत्यमय और संगीत मय हैं। हंसते हुए, गीत गाते हुए। अतीत का सारा धर्म दुखवादी था। कृष्ण को छोड़ दें तो अतीत का सारा धर्म उदास, आंसुओं से भरा हुआ था। हंसता हुआ धर्म विमार और उदास था। उन्होंने कहा कि दुखी-चित्त लोगों के लोगों के लिए उदास, उदास लोग आकर्षण का कारण बन जाते हैं। बहुत से लोग गहरे अर्थों में इस जीवन के विरोधी हैं। कोई और जीवन है परलोक में, कोई मोक्ष है, उसके पक्षपाती हैं। लोगों ने दो हिस्से कर रखे हैं जीवन के-एक वह जो स्वीकार योग्य है और एक वह जो इनकार के योग्य है।श्रीकृष्ण समग्र जीवन को आधे अधूरे में नही वल्कि पूर्णता में स्वीकार करते हैं। जीवन की समग्रता की स्वीकृति उनकी लीलाओं में फलित हुई है। इसलिए इस देश ने और सभी अवतारों को आंशिक अवतार कहा है, कृष्ण को पूर्ण अवतार कहा है। श्री कृष्ण पूर्ण परमात्मा है।
: रामनगरी में खुला रमीला कुटीर होटल,आधुनिक सुविधाओं से है लैस
Mon, Nov 21, 2022
रमीला कुटीर में तीर्थयात्रियों का स्वागत सत्कार अतिथि भाव से किया जाएगा:राजकुमार सिंह
अयोध्या। श्री राम नगरी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अयोध्या बायपास रामघाट हाल्ट के निकट रमीला कुटीर का उद्घाटन श्री राम वल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास, डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ मनोज दीक्षित और अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय ने किया। इस अवसर पर संकट मोचन हनुमान किला के पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास सहित दर्जनों संत महंत एवं राजनीतिक से जुड़े लोग उपस्थित रहे। रमीला कुटीर के ओनर राजकुमार सिंह ने बताया कि मैं प्रभु श्री राम की जन्म स्थली में लोगों की सेवा के लिए यह छोटी सी कुटिया बनाई है जिसमें अयोध्या में आने वाले सभी तीर्थयात्रियों का स्वागत सत्कार अतिथि भाव से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी से मेरा लगाव है और मंदिर निर्माण के साथ यह इच्छा जागृत हुई कि एक कार्यपालक के रूप में अयोध्या नगरी में लोगों की सेवा की जाए इसके लिए यह छोटी सी कुटिया बनवाई गई है जिसमें अयोध्या वासियों के साथ साथ अयोध्या में आने वाले सभी श्रद्धालु नागरिकों की सेवा हम करेंगे। अरुण सिंह सहित अन्य लोगों ने आए हुए अतिथियों का स्वागत सत्कार किया।
: विशुद्ध चित्त ही वसुदेव है और देवकी निष्काम भक्ति: जगद्गुरु
Mon, Nov 21, 2022
गहोई मंदिर में व्यासपीठ से श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा कर रहे जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य
अयोध्या। आध्यात्मिक योग मोक्ष का साधन है। मन ही हमारे बंधन और मोक्ष का कारण है। जब संत पुरुषों का संग होता है तो मन सतोगुण संयुक्त होकर भगवत चिंतन करता है जो ही मुक्तिका कारण भी बन जाता है।
उक्ताशय के उद्गार रामनगरी के गहोई मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत महोत्सव के तृतीय दिवस जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने भागवत कथा में कपिल भगवान व माता देवहूति प्रसंग का वर्णन करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब कर्म अथवा यज्ञ का उद्देश्य परमेश्वर के लिए होता है तो वह सफल होता है। कर्मों के उपभोक्ता तो वास्तव में ईश्वर ही है वही हमें कर्म फल प्रदान करते हैं। मनुष्य को अपने माता पिता, गुरु व अपने श्रेष्ठ का अपमान नहीं करना चाहिए। गुरु ज्ञान का दाता है, जो जीवन को परम लक्ष्य परमात्मा से मिलाता है। जगद्गुरू जी ने कहा कि मनुष्य का जीवन अद्भुत है। एक बार ही मिलता है। मनुष्य ने जीवन को रसिकता के साथ जीना चाहिए। जीवन के प्रत्येक क्षण को अमूल्य मानकर उसका महत्तम आनंद उठाना, जीवन को सार्थक बनाता है। आनंद ईश्वरस्वरुप होता है। इसलिए दुखों को ज्यादा देर अपने मन में संजोये नहीं रखना चाहिए। यह महोत्सव गहोई मंदिर के महंत रामलखन शरण जी महाराज के पावन सानिध्य में हो रहा है।
श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में श्रीकृष्ण नंद महोत्सव प्रसंग पर जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि विशुद्ध चित्त ही वसुदेव है और देवकी निष्काम भक्ति। इन दोनों के मिलन होने पर भगवान कृष्ण का जन्म होता है। जब बुद्धि ईश्वर का अनुभव करती है, तब संसार के सारे विषय बंधन टूट जाते है। जो भगवान को अपने मष्तक पर विराजमान करता है, उसके लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते है। कथा के शुभांरभ पर व्यासपीठ का पूजन यजमान रामअवतार सीपोला आशीष शुक्ला ने व्यासपीठ का पूजन किया। इस मौके पर गौरव दास, शिवेन्द्र दास सहित बड़ी संख्या में कथा प्रेमी मौजूद रहें।