: बड़ाभक्तमाल मंदिर में भगवान को लगा छप्पन भोग
Mon, Nov 7, 2022
बड़ा भक्तमाल जी की छावनी में श्री राम शरण दास महाराज का चल रहा है 47 वां वार्षिकोत्सव, विशाल भंडारा आज
अयोध्या। श्री राम नगरी अयोध्या के सिद्ध पीठ श्री बड़ा भक्तमाल जी की छावनी के पूर्वाचार्य महंत रामशरण दास महाराज का 47 वां नौ दिवसीय वार्षिकोत्सव समारोह में रविवार को मंदिर में संचालित रामकथा का शनिवार को भव्य समापन हुआ। शाम को मंदिर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भजन संध्या का आयोजन किया गया। साथ ही साथ मंदिर में विराजमान भगवान को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग भी लगाया गया। पूरे मंदिर को फूलों से सजाया गया। भगवान फूल बंगलें में विराजमान रहें। यह महोत्सव श्री महंत कौशल किशोर दास महाराज के सानिध्य और आशीर्वाद के साथ मंदिर की उत्तराधिकारी महंत अवधेश कुमार दास महाराज के संयोजन में हो रहा है। महोत्सव में सोमवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है। इस मौके पर बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य, जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी बल्लभाचार्य जी महाराज, महंत सुरेश दास, रामलला सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य महाराज, रसिक पीठाधीश्वर महंत जनमेजय शरण, महंत रामशरण दास, मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास, महंत मनीष दास,नागा लखन दास, पूर्व विधायक पवन पाण्डेय सहित बड़ी संख्या संत महंत और भक्तगण और अधिकारी मौजूद रहे।
: जाे रामरस पियेगा, वह युग-युग जियेगा: संत असंग देव
Mon, Nov 7, 2022
सुखद सत्संग में हजारों-हजार भक्तगण रामरस में लगा रहें गाेता
अयाेध्या। तीर्थ नगरी अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है। जहां मां सरयू का पावन तट व हजारों मंदिराें की श्रृंखला है। जाे तीर्थ नगरी अयोध्या की पहचान है। अयोध्या की पवित्र धरा पर सुखद सत्संग का दूसरा दिन है, जिसमें हजारों-हजार भक्तगण गाेता लगा रहे हैं। उक्त बातें राष्ट्रीय संत असंग देव महाराज ने रामवल्लभाकुंज जानकीघाट प्रांगण में चल रहे सुखद सत्संग कथा में कही। उन्होंने कहा कि जाे रामरस पियेगा। वह युग-युग जियेगा। संसार में दाे प्रकार का रामरस है। पहला रामरस व दूसरा माया रस है। वर्तमान में ज्यादातर जीव माया रस में डूबा हुआ है। रामरस की ओर उन्मुख नही हाे पा रहा है। वह माया रस में लीन हाेकर अपनी पूरी जिंदगी खाे देता है। जैसे भूख लगने पर भाेजन करने के लिए हम समय निकाल लेते हैं। उसी प्रकार से सत्संग और भक्ति के लिए भी समय निकालें। प्रवचन सुनने की आदत बनायें। क्याेंकि सत्संग काे अमृत कहा गया है। इसलिए सत्संग रूपी अमृत का पान अवश्य करें। सत्संग की एक-एक बातें अपने हृदय में उतारें एवं दुर्गुणाें का नाश करें। दूसराें हम बहुत कमियां निकालते हैं। लेकिन अपनी कमी हमें नही दिखाई देती। राष्ट्रीय संत ने कहा कि जब तक हमारी बुद्धि नही शुद्ध हाेगी। तब तक रिद्धि-सिद्धि नही आयेगी। अगर हमारी बुद्धि शुद्ध नही है। ताे हमें रावण, कंस, सुर्पणखा बना सकती है। यदि हमारे अंदर थाेड़ी भी बुद्धि है। ताे वह हम सबकाे शबरी, मीराबाई आदि बना सकती है। भगवान भाषा काे नही बल्कि भावाें काे देखता है। उन्होंने कहा कि यहां सत्संग में माैजूद श्रद्धालुओं की श्रद्धा शबरी, ध्रुव, प्रहलाद से कम नही है। श्रद्धा संबल है और प्रेम अध्यात्म का पथ है। करूणा भरा दिल भक्ति का धन है। सरल बनाे व प्रसन्न रहाे। इस माैके पर श्रीरामवल्लभाकुंज अधिकारी राजकुमार दास, वैदेही भवन महामंडलेश्वर महंत रामजी शरण, कार्यक्रम प्रभारी प्रवीन साहेब, कबीर मठ महंत उमाशंकर दास, संत ईश्वर दास शास्त्री, हरीश साहेब, रवींद्र साहेब, शील साहेब समेत महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, झारखंड आदि प्रांताें से पधारे भक्तगण सुखद सत्संग का श्रवण कर रहे थे।
: मां सरयू को समर्पित हुई 750 मीटर की चुनरी
Sat, Nov 5, 2022
बड़ा भक्तमाल जी की छावनी में श्री राम शरण दास महाराज का चल रहा है 47 वां वार्षिकोत्सव
आज सजेगी भव्य फूल बंगला की झांकी,भगवान को लगेगा छप्पन भोग
अयोध्या। श्री राम नगरी अयोध्या के सिद्ध पीठ श्री बड़ा भक्तमाल जी की छावनी के पूर्वाचार्य महंत रामशरण दास महाराज का 47 वां नौ दिवसीय वार्षिकोत्सव समारोह में आज शनिवार को मां सरयू को 750 मीटर की चुनरी श्री महंत कौशल किशोर दास महाराज के सानिध्य और आशीर्वाद के साथ मंदिर की उत्तराधिकारी महंत अवधेश कुमार दास महाराज के संयोजन में चढ़ाई गई। बड़ा भक्त मल मंदिर परिसर से बैण्ड बजे के साथ भव्य शोभायात्रा मां सरयू के तट तक निकली। जिसमें भगवान के स्वरूप के साथ अयोध्या के रामलला सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य महाराज, रसिक पीठाधीश्वर महंत जनमेजय शरण, नागा लखन दास सहित बड़ी संख्या संत महंत और भक्तगण मौजूद रहे।मां सरयू का दूध से अभिषेक व पूजन किया गया और वैदिक मंत्रोचर के साथ मां सरयू को चुनरी अर्पित की गई।
महंत अवधेश कुमार दास महाराज ने बताया कि पूज्य गुरुदेव जी के सानिध्य में प्रतिवर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मां सरयू को चुनरी अर्पित की जाती है और इसी अवसर पर मंदिर परिसर में कथा का भी आयोजन होता है।उन्होंने बताया कि मां सरयू सभी का कल्याण करें इस उद्देश्य से प्रतिवर्ष चुनरी चढ़ाया जाता है और माता का दुग्ध अभिषेक किया जाता है और इसी कार्यक्रम के तहत श्री ठाकुर जी का छप्पन भोग फूल बंगला झांकी व भगवान को छप्पन भोग के साथ भंडारा आयोजित किया गया है। मंदिर परिसर में कथा महायज्ञ भी चल रहा है। चुनरी महोत्सव में महंत जन्मेजय शरण, महंत शशिकांत दास, नागा रामलखन दास, कृपालु राम भूषण दास, विहिप मीडिया प्रभारी शरद शर्मा सहित हजारों की संख्या में साधु संत धर्माचार्य एवं भक्तगण मौजूद रहे।