: वाल्मीकीय रामायण सृष्टि का प्रथम महाकाव्य: रामानुजाचार्य
Sun, Aug 14, 2022
रामलला सदन देवस्थान मंदिर में श्रीमद्वावाल्मीकीय रामायण महोत्सव का हुआ भव्य शुभारंभ
भगवान राम व उनके भाइयों का गुरु वशिष्ठ ने किया था नामकरण संस्कार वही स्थान है रामलला सदन देवस्थान
अयोध्या। वाल्मीकीय रामायण सृष्टि का प्रथम महाकाव्य है। राम केवल व्यक्ति की संज्ञा नही अपितु एक जीवन-पद्धति की संज्ञा है।महर्षि वाल्मीकि ने राम के चरित्र को मानवीयता के धरातल पर चित्रित किया है।वाल्मीकीय रामायण का प्राण जानकी का चरित्र है। उक्त बातें रामलला सदन देवस्थान पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज ने रामलला सदन देवस्थान में श्रीमद्वावाल्मीकीय रामायण कथा महोत्सव के प्रथम दिवस में कथा शुभारंभ के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि जानकी जी की वेदना को महर्षि वाल्मीकि ने अभिव्यक्ति दी है।वेदना के विना हम मानव कहलाने के अधिकारी नहीं हैं।श्रीजानकी का चरित्र करूणा का चरित्र है।श्रीजानकी चरित्र श्रवण का फल यह है कि हृदय में करूणा का अवतरण हो जाये। जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि तब तक रामायण की रचना नहीं कर पाये जब तक श्रीजानकी वाल्मीकि के आश्रम पर नहीं गयी।काव्य विना पीड़ा के प्रकट नहीं होता।महर्षि वाल्मीकि के हृदय में इतनी करुणा का उदय हुआ कि एक बहेलिये के बाण से मरे क्रौंच पक्षी को देखकर उनका हृदय रो उठा और सहसा एक शोक प्रकट हुआ जो श्लोक बन गया।दुनिया की पहली कविता वाल्मीकि की पीड़ा से प्रकट हुयी।पर इतनी पीड़ा करूणामयी जानकी के चरित्र को लिखने में समर्थ नहीं हो पायी।अत: श्रीराम ने जानकी को महर्षि वाल्मीकि के आश्रम पर भेजा।जब महर्षि वाल्मीकि ने श्रीसीता की पीड़ा देखी तो हृदय में इतनी करूणा आयी कि वो रामायण लिखने में समर्थ हो गये। रामानुजाचार्य जी ने व्यास से श्रीमद्वावाल्मीकीय रामायण की कथा को समझाते हुए कहा कि प्रश्न है कि श्रेष्ठ चरित्र किसका है?या श्रेष्ठजन किसके चरित्र का गान करते हैं?यह हमारे और आपके मन में उठने वाला ही प्रश्न नहीं है महर्षि वाल्मीकि से लेकर गोस्वामी श्रीतुलसीदास जी तक सबके मन में यही प्रश्न था।इसका उत्तर आप ढूँढने चलेंगे तो सबसे पहले जो बात आपके मन में आयेगी वो ये कि किसी के चरित्र को श्रेष्ठ माना जाय इसकी कसौटी क्या है?श्रीराम के अवतार से पहले शास्त्रों ने श्रेष्ठ चरित्र किसका माना जाय इसकी बहुत सी कसौटियाँ रखी हैं। उन्होंने कहा कि चरित्र का बल व्यक्ति को प्रभावी बनाता है।संसार में बहुत सारे लोग शरीर और स्वभाव से सौन्दर्यवान् होते हैं लेकिन चरित्र से दुर्बल होते हैं।चरित्र की कमज़ोरी सौन्दर्य के सारे गौरव को नष्ट कर देती है।श्रीराम का चरित्रबल ही उन्हें समस्त सृष्टि-जीवन में विशिष्ट बनाता है। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन यजमान राम श्रृंगार पाण्डेय व उर्मिला पाण्डेय ने किया। कथा में राघवेंद्र मिश्रा अप्पू,मनोज जी, अवधेश शास्त्री सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: जगतगुरु परमहंस आचार्य के अगुवाई में निकली तिरंगा निकली यात्रा
Sun, Aug 14, 2022
हनुमानगढ़ी के महंत नंदराम दास व गद्दीनशीन के शिष्य मामा दास समेत सौकड़ों नागा साधु हुए शामिल
अयोध्या। तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य आश्रम से हनुमानगढ़ी के महंत नंदराम दास गद्दीनशीन के शिष्य मामा दास और श्री कृष्ण जन्मभूमि निर्माण न्यास के अध्यक्ष देव मुरारी के साथ तिरंगा यात्रा निकाली। यह यात्रा तपस्वी छावनी से प्रारंभ होकर के हनुमानगढ़ी होते हुए तपस्वी छावनी पर समाप्त हुई। इस अवसर पर जगत गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि सुबह ही तपस्वी छावनी पर ध्वज फहराया गया और अयोध्या में जागरूकता लाने के लिए संतों का एक दल तिरंगा यात्रा निकाला तिरंगा हमारे देश की शान है। इसके लिए हमारे पूर्वजों ने खुशी खुशी अपनी जान को निछावर किया था और 15 अगस्त को आजादी के 75 साल पूरे हो जाएंगे जिस के उपलक्ष में प्रधानमंत्री के आवाहन पर हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है जिसमें संतों की भी अहम भूमिका है।
हनुमानगढ़ी के महंत नंदराम दास ने कहा कि 1942 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा प्रारंभ अंग्रेजों भारत छोड़ो जन आंदोलन सत्याग्रह की शुरुआत की गई जिसमें हजारों क्रांतिकारियों ने देश की आजादी में अपना बलिदान दिया, देश को आजादी मिली हम सभी शहीदों की याद में देश के 75 वे वर्षगांठ अमृत महोत्सव मना रहें है। गद्दीनशीन के शिष्य मामा दास ने कहा कि देश की आजादी के लिए बहुत बड़ी संख्या में हमारे पूर्वजों ने बलिदान दिया है हमें उस बलिदान को भूलना नहीं चाहिए। हमें अपने देश को आगे बढ़ाना है और देश को मजबूत करना।
: हनुमानगढ़ी में बनेगा आधुनिक पंचायत भवन व भंडार गृह
Thu, Aug 11, 2022
30 हजार स्क्वायर फिट में रहेगा पंचायत भवन, जिसकी लागत होगी 4 करोड़ रुपये
अखिल भारतीय श्रीपंच रामानन्दीय निर्माणी अखाड़ा हनुमानगढ़ी के करायेगा भवन का निर्माण
अयोध्या। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के इमली बाग गौशाला में अखिल भारतीय श्रीपंच रामानन्दीय निर्माणी अखाड़ा हनुमानगढ़ी के सौजन्य से पंचायती भव्य पंचायत भवन और भंडार गृह का भूमि पूजन व शिलान्यास हनुमानगढ़ी के गद्दी नशीन महंत प्रेम दास जी महाराज के अध्यक्षता में सभी समस्त पंचान अखाड़ा हनुमानगढ़ी के उपस्थित में हुआ। यह बहुप्रतीक्षित भंडार गृह व पंचायत भवन का भूमि पूजन शिलान्यास वैदिक आचार्यों द्धारा विधिवत पूजन अर्चन से किया गया। इस भवन का निर्माण 30 हजार स्क्वायर फिट में होगा जो दो मंजिला की होगी। इसकी लागत लगभग 4 करोड़ रुपये बतायी गई है। इसका निर्माण अखाड़े के द्धारा हो रहा है।
श्री महंत गद्दी नशीन महंत प्रेम दास जी महाराज ने बताया कि पंचायत भवन और भंडार गृह बनने से हनुमानगढ़ी में होने वाले बृहद कार्यक्रमों में सहूलियत होगी और श्रद्धालुओं के लिए भी आसानी होगी कि बड़े हॉल में बिना किसी विघ्न बाधा के आसानी से धार्मिक आयोजन हो सकेंगे। श्री महंत गद्दी नशीन महंत प्रेम दास जी महाराज के शिष्य हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ महेश दास ने बताया कि अखिल भारतीय श्री पंचरामानंदी निर्वाणी अखाड़ा हनुमानगढ़ी की तरफ से बृहद भवन का निर्माण कराया जा रहा है। जिससे हनुमानगढ़ी में होने वाले सभी कार्यक्रम बड़ी ही सरलता से संपन्न होंगे और सभी लोग इसमें अपना कोई भी बड़ा कार्यक्रम कर सकेंगे। हनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत ज्ञान दास महाराज के उत्तराधिकारी संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास ने कहा कि वर्षों से जिस भवन की प्रतीक्षा व जरूरत थी आज उसका भव्य दिव्य भूमि पूजन गद्दीनशीन श्री महंत प्रेमदास महाराज के पावन अध्यक्षता में हुआ। इस पंचायत भवन व भंडार गृह के बनने से सभी संत नागा साधु एक साथ बैठ सकते है। बड़ा हाल होने से धार्मिक अनुष्ठान भी आसानी से हो सकेगा। आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत सत्कारमहंत डा महेश दास ने किया।
इस अवसर पर अनी अखाड़ा के महंत धर्मदास, हरिद्धारी पट्टी के महंत मुरली दास, महंत रामबरन दास, महंत गौरीशंकर दास, महंत रामकुमार दास, जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी डॉ राघवाचार्य महाराज, जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, जानकी घाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण, बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश दास, महंत रामानन्द दास, मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास, महंत माधव दास, महंत अवधेश दास, महंत बलराम दास, संकट मोचन सेना के कार्यवाहक अध्यक्ष वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, वशिष्ठ पीठाधीश्वर राघवेश दास वेदांती, गद्दीनशीन के शिष्य मामा दास, राजेश पहलवान, अंकित दास, सहित हनुमानगढ़ी के सभी नागा साधु समेत सैकड़ों संत महंत उपस्थित रहे।