: भारतीय कुश्ती संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का अयोध्या में हुआ जोरदार स्वागत
Wed, Aug 24, 2022
पूरे विश्व में भारत का बज रहा डंका, सर्वाधिक मेडल कुश्ती में: बृजभूषण शरण सिंह
सांसद बृजभूषण शरण सिंह के स्वागत समारोह का नेतृत्व संकट मोचन सेना के कार्यवाहक अध्यक्ष वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने किया
अयोध्या। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ट्वीट कर भारतीय कुश्ती संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष की प्रशंसा पर अयोध्या के संतो ने राष्ट्रीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह का अयोध्या नगरी में किया स्वागत। आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला पर किलाधीश महंत मैथली रमण शरण ने अशर्फी भवन पर महंत पहलवान घनश्याम पहलवान रंग महल में महंत रामशरण दास के नेतृत्व में कुश्ती संघ के अध्यक्ष लोकप्रिय सांसद बृजभूषण शरण सिंह का जोरदार स्वागत किया गया। इस स्वागत समारोह का नेतृत्व संकट मोचन सेना के कार्यवाहक अध्यक्ष वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने किया। किलाधीश महंत मैथली रमण शरण ने कहा की बृजभूषण सिंह का अयोध्या से बचपन का नाता है क्योंकि उनकी शिक्षा दीक्षा यही से हुई। छात्र राजनीति उन्होंने यही से प्रारंभ की। उन्होंने बताया कि बृजभूषण सिंह को जब से राष्ट्रीय कुश्ती संघ का अध्यक्ष बनाया गया तब से भारत की कुश्ती विश्व पटल पर अपना छाप छोड़ रही है, क्योंकि वह स्वयं कुश्ती के कुशल खिलाड़ी रहे हैं और अयोध्या में संतों के संरक्षण में कुश्ती लड़ी है। संकट मोचन सेना के कार्यवाहक अध्यक्ष वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने बताया कि लोकप्रिय जननेता सांसद बृजभूषण सिंह जी का कैरियर अयोध्या से प्रारंभ हुआ और निरंतर ऊंचाइयों को छू रहा है और वह अयोध्या के लिए हमेशा कुछ ना कुछ करते रहते हैं क्योंकि अयोध्या और अयोध्या के संतो के प्रति उनका अनुराग है।
राष्ट्रीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि 100 से अधिक देशों में कुश्ती प्रतियोगिता होती है जिसमें हमारे देश के बच्चे सेकंड और थर्ड पोजिशन ला रहे हैं यह हनुमान जी की कृपा है और बहुत जल्द हम चैंपियन बनेंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या से मेरा बचपन का नाता है बीच में कुछ कम हो गया था लेकिन फिर मैंने दौरा प्रारंभ किया तो अयोध्या की पीड़ा को देखा कि वह बैरीकेडिंग के जाल में फंसी हुई है जिसको मैंने मुख्यमंत्री जी से कहा मुख्यमंत्री जी ने मेरी बातों को समझा और अयोध्या को इस जाल से मुक्त किया। जिसके लिए अयोध्या के संतो के बीच में मै उनको बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि अयोध्या में विकास कार्य हो रहे हैं लेकिन प्रगति धीमी है जिसके लिए मैं मुख्यमंत्री जी से बात करूंगा और निश्चित ही इसका भी समाधान निकलेगा। इस मौके पर वेद मंदिर के महंत राम नरेश दास, हनुमानगढ़ी के महंत बलराम दास, परमहंस आश्रम के उत्तराधिकारी महंत गोविंद दास, महंत उद्धव शरण, सीताकांत सदन के महंत रामानुज शरण,पार्षद प्रतिनिधि घनश्याम दास पहलवान, पुजारी हेमंत दास, लक्ष्मणकिला के संत सूर्य नारायण शरण, महंत उत्तम दास, नजरबाग गुरुद्वारा के सेवादार नवनीत सिंह, सांसद जी के करीबी सोनू सिंह सहित उपस्थित सभी संतों का स्वागत बृजभूषण शरण सिंह ने किया और सांसद जी का स्वागत प्रियस दास ने किया। सांसद बृजभूषण शरण सिंह के पूरे कार्यक्रम की अगुवानी महेंद्र त्रिपाठी कर रहे थे ।
: भगवान की लीला अपने भक्तों के कल्याण के लिए होती है: महंत गणेश दास
Tue, Aug 23, 2022
काठिया मंदिर में ठाकुर जी के पाटोत्सव का उल्लास चरम पर
हनुमानगढ़ी के श्रीमहंत ज्ञान दास महाराज के उत्तराधिकारी संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास व वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास का महंत रामरतनदेवाचार्य ने किया स्वागत
अयोध्या। आपके दुख का कारण दुनिया से आपका बंधन है। पूरे संसार में सुख केवल आपको ठाकुर जी श्रीकृष्ण भगवान ही दे सकते है बंधनों से मुक्त करके श्री अवध धाम के वासुदेव घाट स्थित काठिया मंदिर में ठाकुर जी के पाटोत्सव पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा में महंत गणेश दास जी महाराज नहीं कही। श्री महाराज जी ने जीव जगत के बंधन और सुख-दुख के रहस्य को बताया। व्यासपीठ से गणेश दास महाराज ने पुतना उद्धार एवं श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।
कथा के दौरान महाराज जी ने कहा कि भगवान जो भी लीला करते हैं वह अपने भक्तों के कल्याण या उनकी इच्छापूर्ति के लिए करते हैं। श्रीकृष्ण ने विचार किया कि मुझमें शुद्ध सत्वगुण ही रहता है, पर आगे अनेक राक्षसों का संहार करना है। इसलिए ब्रज की रज के रूप में रजोगुण संग्रह कर रहे हैं। पृथ्वी का एक नाम 'रसा' है। श्रीकृष्ण ने सोचा कि सब रस तो ले चुका हूं अब रसा पृथ्वी रस का आस्वादन करूं। पृथ्वी का नाम 'क्षमा' भी है। माटी खाने का अर्थ क्षमा को अपनाना है। भगवान ने सोचा कि मुझे ग्वाल-बालों के साथ खेलना है, किंतु वे बड़े ढीठ हैं। खेल-खेल में वे मेरे सम्मान का ध्यान भी भूल जाते हैं। कभी तो घोड़ा बनाकर मेरे ऊपर चढ़ भी जाते हैं। इसलिए क्षमा धारण करके खेलना चाहिए। अत: श्रीकृष्ण ने क्षमारूप पृथ्वी अंश धारण किया।
भगवान ब्रजरज का सेवन करके यह दिखला रहे हैं कि जिन भक्तों ने मुझे अपनी सारी भावनाएं व कर्म समर्पित कर रखे हैं वे मेरे कितने प्रिय हैं। भगवान स्वयं अपने भक्तों की चरणरज मुख के द्वारा हृदय में धारण करते हैं। पृथ्वी ने गाय का रूप धारण करके श्रीकृष्ण को पुकारा तब श्रीकृष्ण पृथ्वी पर आये हैं। इसलिए वह मिट्टी में नहाते, खेलते और खाते हैं ताकि पृथ्वी का उद्धार कर सकें। अत: उसका कुछ अंश द्विजों (दातों) को दान कर दिया। गोपबालकों ने जाकर यशोदामाता से शिकायत कर दी 'मा ! कन्हैया ने माटी खायी है।' 'बालक माटी खायेगा तो रोगी हो जायेगा' ऐसा सोचकर यशोदामाता हाथ में छड़ी लेकर दौड़ी आयीं। उन्होंने कान्हा का हाथ पकड़कर डांटा। मां के डांटने पर जब श्रीकृष्ण ने अपना मुंह खोला तो उसमें पूरी सृष्टि ही नजर आने लगी।पाटोत्सव के अवसर पर प्रतिदिन मंदिर परिसर में संतों का भंडारा भी किया जाता है।कथा में हनुमानगढ़ी के श्रीमहंत ज्ञान दास महाराज के उत्तराधिकारी संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास, महंत माधव दास व वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास का महंत रामरतनदेवाचार्य ने स्वागत किया। इस अवसर पर ब्रह्म पीठाधीश्वर रामरतनदेवाचार्य महाराज सूरदास, मोहनदास सहित सैकड़ों संतो महंतों ने कथा श्रवण किया।
: आधुनिक शिक्षा के साथ सनातन धर्म की शिक्षा बहुत जरूरी: बापू
Tue, Aug 23, 2022
आज बड़े धूमधाम से होगा श्री सीताराम विवाह, पूरा हनुमान बाग सजा दुल्हन की तरह
अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठों में शुमार श्री हनुमान बाग मंदिर में इन दिनों गुजरात से पधारे प्रख्यात कथावाचक रामेश्वरबापू हरियाणी के श्री मुख से रामकथा कथा आनंदमयी वर्षा हो रही है। यह भव्य आयोजन महंत श्री चंदेश्वर बापू सीताराम कुटीर शीलज अहमदाबाद के पावन अध्यक्षता में सम्पादित हो रहा है। कथा श्रवण करने के लिए गुजरात से सौकड़ों भक्त भी पधारे है। महंत श्री चंदेश्वर बापू अनवरत रामकथा व भागवत कथा सहित धार्मिक अनुष्ठान कराते रहते है।इस महोत्सव को हनुमान बाग मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास महाराज का सानिध्य मिल रहा। कथा के पंचम दिवस रामेश्वरबापू हरियाणी ने कहा कि गुरू कृपा से राजा दशरथ के वहा अयोध्या मे चार पुत्र का जन्म हुआ। चार पुत्र आनी चार वेद के समान अयोध्या मे बडा उत्सव मनाया है। उन्होंने कहा कि गुरू वशिष्ट का आगमन अयोध्या मे हुआ। गुरूजीने चारेय पुत्र का नामकरण किया। राम आनी विश्राम देने वाला तत्व, भरत आनी विश्व का भरण पोषण करने वाला तत्व , शत्रुघ्न आनी शत्रु को मारने वाला तत्व ओर लखन आनी सेवा करने वाला ओर जागृत तत्व है। बापू ने कहा कि भगवान राम शिक्षा अभ्यास करने के लिए गुरू के आश्रम मे जाना पडा। शिक्षा मे पाच वस्तु हर बालक को मिलना चाहिये।आज की शिक्षा मे यह पाच वस्त मिलना बालक के और जीवन के लिए श्रेष्ठ माना गया है। आधुनिक शिक्षा के साथ साथ सनातन धर्म की भी बहोत जरूरी है। बिना धर्म व्यक्ति अच्छा जीवन जी पाता नही है। आने कल रामकथा मे भगवान राम का विवाह होगा। सब लोग राम की बारात मे विशेष रूप से मनाया जायेगी।रामेश्वरबापू हरियाणी ने कहा कि शाश्वत आत्मा में समाई हुई है, कुछ लोग उसे आत्मज्ञान कहते हैं। शरीर में व्याप्त आत्मा अमृत है अर्थात वह कभी मृत नहीं होती। तीर्थ में घूमने से पाप का भार कम होता है, शरीर में पाप अर्थात् ही नकारात्मकता नष्ट होगा तो सकारात्मकता अर्थात् ही श्रद्धा बढ़ने लगती है। उन्होंने कहा कि निरन्तर राम का नाम रटने से कोई पाप कर्म हमारे हाथों नहीं होगा। हमें राम जी को सर्वत्र समान समझना चाहिए, जहाँ कम समझ लिया वहां हम पाप में डूबते हैं। इस मौके पर सुनील दास, रोहित शास्त्री, गोलू दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।