: हमारी श्वांस-प्रश्वांस आराध्य के साथ धड़कती है: महंत रामशरण दास
Mon, Jul 25, 2022
रंग महल में झूले पर विराजे अवधविहारी-विहारिणी को पुष्पों एवं पुष्पलड़ियों से इस कदर आच्छादित किया गया कि फूल-बंगला बन गया
झूलन के लिए बनवाया गया साठ किलो चांदी का झूला
शुक्ल पक्ष की एकादशी को होगी गलबहियां की झांकी
बमबम यादव
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में मधुर उपासना परंपरा की शीर्ष पीठ श्रीरंगमहल में बीती शाम झूलनोत्सव का चरम परिभाषित हुआ। झूले पर विराजे अवधविहारी-विहारिणी को पुष्पों एवं पुष्पलड़ियों से इस कदर आच्छादित किया गया कि फूल-बंगला बन गया। भक्ति में पगे संतों के बीच फूल-बंगला में आराध्य को सजाने की परंपरा पुरानी है और रंगमहल में इस परंपरा पर अमल के साथ आराध्य के सम्मुख संगीत की महफिल सजाई गई। इस दौरान मंदिर के संस्थापक एवं रसिक संत पूज्य सरयूशरण महाराज सहित कुछ अन्य दिग्गज आचार्यों के पदों की प्रस्तुति से भक्ति, अध्यात्म एवं संस्कृति की प्रवाहित त्रिवेणी आकर्षण के केंद्र में रही और इस सलिला में डुबकी लगाने वालों में मणिरामदास जी की छावनी के उत्ताराधिकारी महंत कमलनयन दास आचार्य पीठ दशरथमहल बड़ास्थान पीठाधीश्वर बिदुगाद्याचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य, जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, बावन जी मंदिर के वैदेही बल्लभ शरण, नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास आदि सहित रामनगरी के संत शामिल रहे। उत्सव की अध्यक्षता रंगमहल के महंत रामशरणदास ने किया। उन्होंने संतों का स्वागत करने के साथ आभारपूर्वक विदाई दी। रात्रि आठ बजे से शुरू संगीत संध्या मध्यरात्रि शयन आरती के साथ समाप्त हुई।
रंगमहल में आचार्य परम्परा में परम्परागत रीति से ही उत्सव मनाया जाता है। यही नहीं आचार्यों की ओर से प्रयुक्त होने वाले उपकरणों का भी प्रयोग होता रहा है। इसी कड़ी में झूलन के लिए ढ़ाई सौ साल पुराने लकड़ी के झूले का प्रयोग हो रहा था। मंदिर महंत रामशरण दास ने बताया कि परमात्मा की इच्छा से उसी लकड़ी पर चांदी का वर्क चढ़ाकर इस साल भगवान को उसी झूले पर प्रतिष्ठित किया गया है। झूले के निर्माण में साठ किलो चांदी का इस्तेमाल हुआ है। यहां चल रहे झूलनोत्सव की कड़ी में सावन तीज यानि की 31 जुलाई को मणिपर्वत के झूलन उत्सव के लिए भी ठाकुरजी को शोभायात्रा के रुप में धूमधाम से ले जाया जाएगा।
रंगमहल की आचार्य परम्परा में सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी को गलबहियां की झांकी सजाए जाने की प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है। मंदिर के पीठाधीश्वर महंत रामशरण दास महाराज ने बताया कि वाह्य जगत के लिए यह एक सांस्कृतिक उत्सव है लेकिन साधकों की दृष्टि से यह उपासना परम्परा है जो तत् सुखी सुखित्व की भावना से प्रेरित है जिसमें साधक आराध्य के सुख में ही सुख और आऩद की अनुभूति कर निरन्तर उन्हीं के चिंतन-मनन में व्यस्त रहते है जैसे कि एक मां अपने नन्हें बच्चे की चिंता करते हुए अपने सभी क्रियाकलाप को उसी के लिए समर्पित कर देती है। कार्यक्रम की देखरेख पुजारी साकेत जी व राहुल जी कर रहे है।
: श्रीमदभागवत कथा श्रीकृष्ण का वांगमय है: पं दीनानाथ
Mon, Jul 25, 2022
हनुमान बाग मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ महंत जगदीश दास महाराज ने दीप प्रज्वलित कर किया
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या के वासुदेव घाट स्थित प्रमुख मंदिर श्री हनुमान बाग में सावन मास के पवित्र अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का भव्य शुभारंभ दीप प्रज्वलित के साथ हुआ,कथा का शुभारंभ महंत जगदीश दास महाराज ने किया।व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा पंडित दीनानाथ पाण्डेय कर रहे। व्यासपीठ से कथा का महात्म्य बताते हुए कहते है कि भागवत कथा जीते जी ही नही मरने वालों को भी तार देती है।दीनानाथ जी ने कहा कि इन सबसे अधिक श्रीकृण की आराधना प्रभावशाली है, तभी तो गीता में श्रीकृष्ण ने खुद कहा है कि ”सर्व धमार्न परित्यज्य माम एकम शरणम व्रज” अथार्त सभी परंपराओं और युक्तियों को छोड़कर जो व्यक्ति केवल श्रीकृष्ण की आराधना करता है उसके लिए बाधाएं अवसर में और कांटे फूल में बदल जाते हैं। भगवताचार्य दीनानाथ जी ने बताया कि श्रीमदभागवत श्रीकृष्ण का वांगमय है। यही नही श्रीमदभागवत श्रीकृष्ण के मुख से निकली वाणी है और जब संकट में भगवत वाणी का श्रवण होता है तो संकट स्वत: टल जाता है। राजा परिक्षित से जब ऋषि शमीक का अपमान हो गया और ऋगी ऋषि के कारण सात दिन में सर्पदंश से मृत्यु का श्राप मिला तो सभी ऋषि मुनियो एवं महापुरूषों ने श्राप से मुक्ति के जो उपाय बताए वे प्रभावहीन रहे और जब शुकदेव महराज ने उन्हें भागवत का परायण कराया तो कथा का विश्राम होते होते परीक्षित का भय दूर हुआ और उन्हें सदगति प्राप्त हुई।
कथाव्यास दीनानाथ पाण्डेय का चंडीगढ़ के पंचकुला व वृंदावन धाम में मंदिर है। जहां पर हजारों वेदपाठी विद्या अध्ययन कर रहे हैं। महोत्सव की अध्यक्षता हनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज कर रहें। व्यवस्था में सुनील दास, रोहित शास्त्री सहित पूरा हनुमान बाग परिवार है । कार्यक्रम की आयोजक श्रीमती आशा गोयल व कृष्णा गोयल है। श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का समापन 30 जुलाई को होगा। ये कथा दो सत्र में होगी। कथा का प्रथम सत्र सुबह 11 बजे से 1 बजे तक व शाम को 6 से 8 बजे तक होगा। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पंजाब हरियाणा समेत पूरे भारत से हजारों शिष्य परिकर आये है।
: महंत रामाज्ञा दास जी त्याग, तपस्या और वैराग्य की प्रतिमूर्ति थे: महंत शुकदेव दास
Thu, Jul 21, 2022
फटिक शिला बगही धाम आश्रम में साकेतवासी महंत रामाज्ञा दास महाराज काे तृतीय पुण्यतिथि पर शिद्दत से किया गया याद
अयाेध्या। सरयू के पावन तट स्थित प्रसिद्ध श्री फटिक शिला बगही धाम आश्रम के साकेतवासी महंत रामाज्ञा दास महाराज काे तृतीय पुण्यतिथि पर शिद्दत से याद किया। आश्रम परिसर में गुरुवार काे श्रद्धांजलि सभा का आयाेजन हुआ। जिसमें रामनगरी के संत-महंताें ने पूर्वाचार्य महंत के चित्रपट पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया और कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर फटिक शिला पीठाधीश्वर महंत शुकदेव दास महाराज ने कहा कि साकेतवासी महंत हमारे गुरू भाई रहे। वह उन्हें बड़े भ्राता के रूप में मानते थे, जिनकी आश्रम परिसर में तृतीय पुण्यतिथि मनायी गई। उन्हाेंने बताया कि पूर्वाचार्य महंत त्याग, तपस्या और वैराग्य की प्रतिमूर्ति थे। मंदिर के विकास में हमेशा संकल्पित रहे। हर कार्याें में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया करते थे। वह पूरी तरह से साधुता की मिसाल थे। उनका जितना बखान किया जाए वह बहुत कम ही हाेगा। उनकी भगवान राम सीता के प्रति अनन्य भक्ति रही थी। उन्हाेंने सीताराम नाम काे बहुत महत्व दिया एवं उसी का प्रसार आजीवन करते रहे। आये हुए अतिथियों का स्वागत-सत्कार महंत शुकदेव दास व फटकशिला आश्रम परिवार ने किया। इस माैके पर जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, मणिरामदास छावनी उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, रामहर्षण कुंज महंत अयाेध्या दास, कनक महल महंत सीताराम दास महात्यागी, पूर्व सांसद रामविलास वेदांती के उत्तराधिकारी महंत राघवेश दास, महंत राम कुमार दास , हनुमानगढ़ी के मुख्य पुजारी रमेश दास ,महंत कल्याण दास, करतलिया बाबा आश्रम के महंत बालयोगी रामदास, महंत विनोद दास, खाकचाैक के माैनी महाराज, महंत मनीष दास, महंत अंगद दास,मिथिला बिहारी दास, रामनंदन दास, विद्यानन्द जी आदि माैजूद रहे।