: डा राघवाचार्य वाल्मिकी व्यास पुरस्कार से हुए सम्मानित
Thu, Aug 4, 2022
तुलसीदास जयंती पर मोरारी बापू ने रामलला सदन देवस्थान के पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य डा राघवाचार्य महाराज को वाल्मिकी व्यास पुरस्कार से किया सम्मानित
अयोध्या। रामचरित मानस सहित अनेक ग्रंथों के रचयिता संत तुलसीदास जी के जन्मोत्सव के अवसर पर 1 से 4 अगस्त भावनगर जिले के कैलास गुरुकुल में प्रख्यात कथावाचक मोरारी बापू की उपस्थिति में वाल्मिकी व्यास और तुलसी पुरस्कार समारोह का आयोजिन किया गया। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी तुलसी उत्सव में 1 से 3 अगस्त तक देश भर के विभिन्न प्रांतों के गायकों और कहानियों के पाठकों के व्याख्यान हुआ। हर वर्ष तुलसीदास जी की जन्म तिथि श्रावण शुक्ल सप्तमी पर वाल्मिकी रामायण, महाभारत, गीता, पुराण, रामचरित मानस के साथ-साथ तुलसीदास जी के साहित्य की कथाएँ, गीत, व्याख्यान-अध्ययन और जीवन भर सेवा के उपलक्ष्य में देश- विदेश के प्रतिष्ठित वरिष्ठ व्यक्तियों के शोध-प्रकाशन के साथ इस पुरस्कार से शिक्षाविदों के अलावा अन्य संगठनों को भी सम्मानित किया गया।
गुरुवार को तीनों पुरस्कारों का प्रस्तुतिकरण समारोह हुआ। वरिष्ठ विद्वानों में वाल्मिकी पुरस्कार प्रख्यात कथावाचक रामलला सदन देवस्थान पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज को दिया गया साथ ही ये पुरस्कार
विजय शंकर देवशंकर पंड्या अहमदाबाद, स्व.रामानन्द सागर मुंबई और व्यास पुरस्कार प्रा. शरदभाई व्यास, आचार्य गोस्वामी मृदुल कृष्णजी महाराज वृंदावन के साथ-साथ तुलसी पुरस्कार रामबेन हरियानी जयपुर, मुरलीधरजी महाराज ओंकारेश्वर और महंत राम हृदयदासजी चित्रकूट धाम को वंदनापात्र से सम्मानित किया गया। सूत्रमाला, शॉल मोरारी बापू जी नगद राशि मानदेय देकर सम्मानित किये।
: शिद्दत से शिरोधार्य हुए बाबा रामप्रसादाचार्य
Thu, Aug 4, 2022
विन्दुगद्यायाचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज के अध्यक्षता में संत धर्माचार्यों ने किया नमन
अयोध्या। चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राज महल महल बड़ा स्थान के संस्थापक आचार्य पूज्य बाबा रामप्रसादाचार्य जी महाराज की जयंती पर रामनगरी के संत-महंतों ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद कर आचार्य श्री की मूर्ति पर माल्यार्पण कर नमन किया। दशरथ महल के वर्तमान महंत विन्दुगद्यायाचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज के अध्यक्षता में संतों ने किया नमन।इस अवसर पर संतों-महंतों व श्रद्धालुओं को विन्दु सम्प्रदाय के संस्थापक बाबा रामप्रसादाचार्य की जीवनगाथा सुनाई। उन्होंने कहा कि तीन सौ वर्ष पूर्व बाबा रामप्रसाद दास महाराज ने श्री जानकी की कठिन तपस्या कर उनकी कृपा प्राप्त की। श्री जानकी ने महाराज श्री को स्वयं अपने पैर के अंगूठे से तिलक लगाकर आशीर्वाद प्रदान किया था।
श्री महाराज जी की जयंती के अवसर पर दशरथ महल में अयोध्या के संतो महंतों ने महाराज जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और इस अवसर पर वर्तमान महंत विंदुगद्यायाचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य ने बताया कि एक बार महाराज जी संत परंपरा के अनुसार टीका लगाना भूल गए और मां जानकी प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होकर के उनको टीका लगाया। उन्होंने बताया कि श्री महाराज जी को गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज के अवतार स्वरूप में माना जाता है। महाराज जी के जयंती के अवसर पर आए सभी संतो महंतों का स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य के कृपापात्र शिष्य मंगलभवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु राम भूषण दास जी स्वागत सत्कार किया। जानकी घाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण, रंगमहल पीठाधीश्वर रामशरण दास, दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश कुमार दास ,महंत शशिकांत दास, महंत मनीष दास, महंत राम कुमार दास, हनुमानगढ़ी के पुजारी पार्षद रमेश दास सहित सैकड़ों महंतों ने स्वामी जी के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किए।
: तुलसीदास जी हिंदी साहित्य के एक महान कवि थे: महंत विवेक आचारी
Thu, Aug 4, 2022
दंत धावन कुंड स्थित तुलसी चौरा मंदिर में धूमधाम से मनाया गया गोस्वामी तुलसीदास जी जन्म जयंती
अयोध्या। प्रभु श्रीराम को जन-जन तक रामचरित मानस से पहुंचाने वाले गोस्वामी तुलसीदास की जयंती रामनगरी अयोध्या में धूमधाम से मनाई गई। तुलसी चौरा मंदिर में तुलसी के जन्मोत्सव पर सुबह से बधाईयां बजी।
रामनगरी के दंत धावन कुंड स्थित तुलसी चौरा मंदिर जहां पर गोस्वामी तुलसीदास जी ने मानस की प्रथम टीका की थी। उसी पवित्र स्थान पर आज गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाई गई। जिसमें पूरे मंदिर को फूलों से सजाया गया। तो वही देर शाम कवि सम्मेलन व गोस्वामी तुलसीदास जी जीवन चरित्र पर विद्धानों द्धारा गोष्ठी किया गया। यह आयोजन मंदिर के पीठाधीश्वर महंत विवेक आचारी महाराज के संयोजन में हुआ। दंत धावन कुंड पीठाधीश्वर महंत विवेक आचारी महाराज कहते है कि सावन माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को तुलसीदास जयंती मनाई जाती है। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी हिंदी साहित्य के एक महान कवि थे। रामचरित मानस जैसे महाकाव्य की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने ही की थी। तुलसीदास की इस रचना ने उन्हें अमर कर दिया। रामचरित मानस में तुलसीदास जी ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन का काव्य रूप में वर्णन किया है। कहा जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास को प्रभु श्रीराम के साक्षात दर्शन हुए थे। तुलसीदास जी ने कवितावली, दोहावली, हनुमान बाहुक, पार्वती मंगल, रामलला नहछू आदि कई रचनाएं कीं। उनके दोहे भी जन-जन की जुबां पर आज भी हैं। उनके दोहों ने व्यक्ति एवं समाज को अच्छे संदेश दिए हैं। उनके दोहों से अच्छी सीख मिलती हैं। इस मौके पर कैस्तुभ मणि आचारी, बादल आचारी, महंत दिलीप दास त्यागी सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।